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Mon, Oct 12, 2026Updated 1:21 PM IST
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बहाली के आदेश नहीं मिलने से पलटे पटवारी: सीएम मोहन यादव से मुलाकात के बाद भी कलेक्टरों ने नहीं हटाए निलंबन-बर्खास्तगी के आदेश, स्वामित्व योजना का काम करने से किया इनकार

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भोपाल। मध्य प्रदेश में पटवारियों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर उस समय गहरा गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद काम पर लौटने की सहमति देने वाले पटवारी अब अपने फैसले से पीछे हट गए हैं। पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने सोमवार को एक वीडियो जारी कर स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया है, जिसके कारण वे स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम शुरू नहीं करेंगे। इस ऐलान के बाद राजस्व विभाग के कामकाज और ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन-जायदाद की रजिस्ट्री प्रक्रिया पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने जारी किए गए वीडियो में बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बैठक में उन्हें आश्वासन दिया गया था कि सरकार उनकी मांगों को लेकर दो आदेश जारी करेगी। इन आदेशों के माध्यम से उन पटवारियों की बहाली सुनिश्चित की जानी थी, जिन्हें हाल ही में निलंबित या बर्खास्त किया गया था। संघ के अनुसार, इसी आश्वासन के आधार पर पटवारियों ने यह तय किया था कि वे सोमवार से स्वामित्व योजना के अंतर्गत रजिस्ट्री का कार्य फिर से शुरू कर देंगे। हालांकि, सोमवार तक कोई ठोस आदेश जारी नहीं होने और स्थिति यथावत रहने के कारण पटवारियों ने अपना निर्णय बदल लिया है।

पटवारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्तर पर भले ही सकारात्मक बातचीत हुई हो, लेकिन जिला स्तर पर कलेक्टरों ने निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश अभी तक वापस नहीं लिए हैं। जब तक उनके निलंबित और बर्खास्त किए गए साथियों की बहाली के लिखित और आधिकारिक आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक वे किसी भी प्रकार का राजस्व कार्य या स्वामित्व योजना से जुड़ी रजिस्ट्री प्रक्रिया में भाग नहीं लेंगे। संघ ने स्पष्ट किया है कि मौखिक आश्वासनों के आधार पर अब काम शुरू करना संभव नहीं है और सरकार को अपने वादों को कागज पर उतारना होगा।

स्वामित्व योजना केंद्र और राज्य सरकार की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके आवासीय परिसरों का वैध कानूनी अधिकार (स्वामित्व) प्रदान करना है। इस योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण के माध्यम से गांवों के घरों और जमीनों का सटीक नक्शा तैयार किया जाता है और उसके बाद पटवारियों की मदद से रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाती है। पटवारियों द्वारा इस योजना के कामकाज का बहिष्कार किए जाने से प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में लाखों लाभार्थियों को स्वामित्व कार्ड मिलने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इसके अलावा, आम जनता को जमीन की खरीद-फरोख्त और रजिस्ट्री से जुड़े अन्य दैनिक कार्यों में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

पटवारी संघ ने वीडियो के जरिए अपनी बात रखते हुए सरकार पर भरोसा टूटने का संकेत दिया है। उनका तर्क है कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद उन्हें लगा था कि समस्या का समाधान निकल आएगा, लेकिन कलेक्टरों द्वारा पुराने निलंबन और बर्खास्तगी के आदेशों को बरकरार रखने से यह साफ हो गया है कि प्रशासनिक स्तर पर उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जा रहा है। पटवारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं और बहाली के आदेश नहीं आते, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

मध्य प्रदेश में पटवारियों का विरोध प्रदर्शन और कामकाज का बहिष्कार राजस्व विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। पटवारी राजस्व व्यवस्था की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई होते हैं। रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी में सुधार, फसल सर्वेक्षण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका अनिवार्य होती है। ऐसे में पटवारियों के काम रोक देने से न केवल स्वामित्व योजना, बल्कि समूचे राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली प्रभावित होने की संभावना है।

अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और प्रशासन इस गतिरोध को दूर करने के लिए क्या कदम उठाता है। क्या मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद कलेक्टरों को निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस लेने के निर्देश दिए जाएंगे, या फिर सरकार पटवारियों के खिलाफ कोई सख्त रुख अपनाएगी। फिलहाल, पटवारी संघ अपने फैसले पर अड़ा हुआ है और सोमवार से स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री का काम पूरी तरह से ठप रहने की स्थिति बन गई है। इस मामले में सरकार की अगली प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है, क्योंकि इस विवाद का सीधा असर प्रदेश की राजस्व व्यवस्था और आम नागरिकों पर पड़ रहा है।