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Mon, Oct 12, 2026Updated 1:16 PM IST
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मध्य प्रदेश: सांदीपनि विद्यालयों की बसों का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर आज कैबिनेट में हो सकती है मुहर, कलेक्टरों को मिलेंगे अधिकार

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भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार राज्य में संचालित सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं के लिए परिवहन सुविधाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण निर्णय पर आज मुहर लगाने जा रही है। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए एक प्रस्ताव को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज होने वाली कैबिनेट बैठक में रखा जाना है। इस प्रस्ताव में सांदीपनि विद्यालयों में संचालित बसों का किराया बढ़ाने और इसके निर्धारण के लिए जिला कलेक्टरों को अधिकार देने का प्रावधान शामिल है। माना जा रहा है कि कैबिनेट इस प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे सकती है, जिसके बाद प्रदेश भर के सांदीपनि विद्यालयों में आने-जाने वाले बच्चों के परिजनों पर सीधा असर पड़ेगा।

स्कूल शिक्षा विभाग ने यह प्रस्ताव इसलिए तैयार किया है ताकि सांदीपनि विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बस सेवा का लाभ सुचारू रूप से मिल सके। वर्तमान में इन विद्यालयों में संचालित बसों के किराए को लेकर कई तरह की चुनौतियां सामने आ रही थीं। ईंधन की बढ़ती कीमतों, वाहनों के रखरखाव और ड्राइवरों तथा परिचालकों के वेतन जैसे खर्चों में लगातार हो रही वृद्धि के कारण परिवहन व्यवस्था को पहले की दरों पर चलाना कठिन होता जा रहा था। ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग ने स्थिति का आकलन करने के बाद किराया संशोधन का यह प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष रखा है। यदि आज की बैठक में इसे मंजूरी मिल जाती है, तो बसों का नया किराया लागू हो जाएगा और बच्चों को नियमित रूप से बस सेवा उपलब्ध कराई जा सकेगी।

इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि सरकार ने किराया तय करने की जिम्मेदारी सीधे अपने पास रखने के बजाय जिला स्तर पर कलेक्टरों को देने का फैसला किया है। सूत्रों के अनुसार, कैबिनेट की मंजूरी के बाद कलेक्टरों को यह पावर दी जाएगी कि वे अपने-अपने जिलों की स्थानीय परिस्थितियों, दूरियों और अन्य जरूरी मापदंडों को ध्यान में रखते हुए बसों का किराया तय कर सकें। चूंकि मध्य प्रदेश का भौगोलिक क्षेत्रफल काफी बड़ा है और हर जिले में सड़कों की दूरी, परिवहन की उपलब्धता और स्थानीय बाजार की स्थिति अलग-अलग होती है, इसलिए एक समान किराया लागू करना व्यावहारिक नहीं माना गया। कलेक्टरों को अधिकार दिए जाने से उम्मीद की जा रही है कि हर जिले में बच्चों और उनके अभिभावकों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक उचित और तार्किक किराया निर्धारित किया जा सकेगा।

सांदीपनि विद्यालय मध्य प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल है, जिसका उद्देश्य सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है। इन विद्यालयों में दूर-दराज के गांवों और कस्बों से भी बच्चे पढ़ने आते हैं। ऐसे में उनके लिए सुरक्षित और सुलभ परिवहन व्यवस्था का होना अत्यंत आवश्यक है। बस सेवा के बिना कई बच्चों के लिए नियमित रूप से स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसलिए सरकार का यह कदम परिवहन व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने और बच्चों की पढ़ाई में किसी भी प्रकार की बाधा न आने देने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आज होने वाली इस कैबिनेट बैठक में सांदीपनि विद्यालयों के बस किराये के अलावा कुछ अन्य प्रशासनिक और नीतिगत मामलों पर भी चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, स्कूल शिक्षा विभाग का यह प्रस्ताव आज की बैठक के एजेंडे में प्रमुखता से शामिल है। सरकार की ओर से अभी तक नए किराये की कोई निश्चित दर या प्रतिशत सार्वजनिक नहीं किया गया है। यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही कलेक्टरों को निर्देश जारी किए जाएंगे और उसके बाद ही जिलों में नई दरें तय की जाएंगी।

परिवहन विशेषज्ञों और शिक्षा से जुड़े लोगों का मानना है कि किराया बढ़ाए जाने का प्रस्ताव समय की मांग थी, क्योंकि पुरानी दरों पर बस संचालकों के लिए सेवाएं जारी रखना आर्थिक रूप से बोझिल हो चुका था। वहीं, कलेक्टरों को अधिकार दिए जाने से पारदर्शिता और स्थानीय जरूरतों के अनुसार लचीलापन बनाए रखने में मदद मिलेगी। अभिभावकों को अब इस बात का इंतजार रहेगा कि कैबिनेट की मंजूरी के बाद उनके जिले के कलेक्टर नया किराया क्या तय करते हैं।

वन्दे भारत न्यूज़ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग ने इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया है। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सांदीपनि विद्यालयों में नामांकित बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। सरकार की प्राथमिकता शिक्षा और परिवहन दोनों को सुचारू रूप से जोड़े रखना है। आज की कैबिनेट बैठक में जब इस प्रस्ताव पर औपचारिक मुहर लगेगी, तभी यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस नई व्यवस्था का क्रियान्वयन किस तिथि से प्रदेश में शुरू किया जाएगा। फिलहाल सभी निगाहें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में होने वाली इस अहम कैबिनेट बैठक पर टिकी हुई हैं।