शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए, 33 जिला संघों के प्रतिनिधि रहे मौजूद

भोपाल। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान ने खेल प्रशासन के क्षेत्र में औपचारिक रूप से प्रवेश कर लिया है। मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ के हाल ही में संपन्न हुए चुनाव में कार्तिकेय सिंह चौहान को संघ का नया अध्यक्ष निर्विरोध चुना गया है। इस चुनावी प्रक्रिया में राज्य भर के 33 जिला वॉलीबॉल संघों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और उनकी उपस्थिति में यह चुनाव संपन्न हुआ। यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कार्तिकेय सिंह चौहान की चुनावी राजनीति में प्रवेश से पहले ही खेल प्रशासन के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका शुरू हो गई है।
मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ के नए पदाधिकारियों के चयन के लिए बीते दिन चुनाव आयोजित किए गए थे। इस चुनावी प्रक्रिया में राज्य के सभी 33 जिलों के वॉलीबॉल संघों के प्रतिनिधि मौजूद रहे। इन प्रतिनिधियों की सर्वसम्मति से कार्तिकेय सिंह चौहान को मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ का अध्यक्ष घोषित किया गया। उनके खिलाफ किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया, जिसके परिणामस्वरूप उनका निर्वाचन निर्विरोध हुआ। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सभी जिला संघों के प्रतिनिधियों ने इस निर्णय पर अपनी सहमति व्यक्त की।
कार्तिकेय सिंह चौहान केंद्रीय कृषि मंत्री और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे हैं। शिवराज सिंह चौहान वर्तमान में केंद्र सरकार में कृषि मंत्रालय का कार्यभार संभाल रहे हैं और मध्यप्रदेश की राजनीति में एक प्रमुख चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। उनके पुत्र कार्तिकेय सिंह चौहान द्वारा खेल प्रशासन में कदम रखने को राजनीतिक और खेल जगत दोनों दृष्टिकोणों से देखा जा रहा है। हालांकि, अभी तक कार्तिकेय सिंह चौहान ने चुनावी राजनीति में सीधे तौर पर प्रवेश नहीं किया है, लेकिन खेल संघ के अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति को उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत के तौर पर विश्लेषित किया जा रहा है।
मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ राज्य में वॉलीबॉल खेल के विकास, प्रबंधन और नियंत्रण के लिए जिम्मेदार शीर्ष संस्था है। इस संघ के माध्यम से राज्य स्तर पर वॉलीबॉल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, खिलाड़ियों का चयन होता है और राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व करने वाली टीमों को तैयार किया जाता है। ऐसे में संघ के अध्यक्ष का पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस पद पर बैठने वाले व्यक्ति को राज्य भर में खेल के बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और टूर्नामेंट्स की दिशा तय करने की जिम्मेदारी होती है।
इस चुनाव प्रक्रिया में 33 जिला संघों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि राज्य भर के वॉलीबॉल समुदाय ने कार्तिकेय सिंह चौहान के नेतृत्व पर भरोसा जताया है। मध्यप्रदेश में कुल जिलों की संख्या के अनुरूप ही संघ में प्रतिनिधित्व होता है और सभी जिला इकाइयों के प्रतिनिधियों का एक साथ सहमति देना संघ के भीतर एकरूपता को प्रदर्शित करता है। निर्विरोध चुनाव होने से यह स्पष्ट होता है कि संघ के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर कोई मतभेद नहीं था और सभी पक्ष नए अध्यक्ष के चयन पर एकमत थे।
खेल प्रशासन में राजनीतिक हस्तियों या उनके परिजनों की भागीदारी भारत में कोई नई बात नहीं है। देश के कई राज्यों में विभिन्न खेल संघों के प्रमुख पदों पर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्तियों को देखा जाता रहा है। खेल प्रशासकों की भूमिका खेल नीतियों को लागू करने, सरकारी और निजी संसाधनों को जुटाने और खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में अहम होती है। कार्तिकेय सिंह चौहान के मामले में भी यह उम्मीद की जा रही है कि उनके पारिवारिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ मध्यप्रदेश में वॉलीबॉल खेल के प्रसार और विकास में मिल सकता है।
उल्लेखनीय है कि शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और उनके कार्यकाल में राज्य में खेलों के विकास पर विशेष ध्यान दिया गया था। अब उनके पुत्र के सीधे तौर पर किसी खेल संघ की कमान संभालने से मध्यप्रदेश की खेल राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि कार्तिकेय सिंह चौहान भविष्य में चुनावी राजनीति में भी सक्रिय होंगे या उनका पूरा ध्यान केवल खेल प्रशासन पर ही केंद्रित रहेगा।
मध्यप्रदेश वॉलीबॉल संघ के अध्यक्ष के रूप में कार्तिकेय सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान राज्य में वॉलीबॉल की स्थिति, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खिलाड़ियों के विकास पर आगामी समय में नजर रहेगी। 33 जिला संघों के प्रतिनिधियों के समर्थन से मिली इस जिम्मेदारी को वह किस प्रकार निभाते हैं, यह खेल जगत के लिए देखने योग्य होगा। फिलहाल, बीते दिन संपन्न हुए इस चुनाव ने मध्यप्रदेश के खेल प्रशासन में एक नए नेतृत्व की औपचारिक शुरुआत कर दी है।

