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IIT बॉम्बे में छात्र ने की आत्महत्या, परीक्षा में ChatGPT से नकल करते पकड़े जाने के बाद उठाया कदम; 7 महीने में तीसरा मामला, 400 से अधिक छात्रों का प्रदर्शन

मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के परिसर में शुक्रवार शाम एक और छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिससे संस्थान में शोक और तनाव की लहर दौड़ गई है। सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी। साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल […]
IIT बॉम्बे में छात्र ने की आत्महत्या, परीक्षा में ChatGPT से नकल करते पकड़े जाने के बाद उठाया कदम; 7 महीने में तीसरा मामला, 400 से अधिक छात्रों का प्रदर्शन
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मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) बॉम्बे के परिसर में शुक्रवार शाम एक और छात्र की आत्महत्या का मामला सामने आया है, जिससे संस्थान में शोक और तनाव की लहर दौड़ गई है। सेकेंड ईयर के छात्र साहिल वाकोडे ने हॉस्टल के अपने कमरे में फंदे से लटककर जान दे दी। साहिल महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के रहने वाले थे और एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग में अध्ययनरत थे। घटना से चंद घंटे पहले ही उन्हें परीक्षा हॉल में मोबाइल फोन का उपयोग करते हुए पकड़ा गया था, जहां वे प्रश्नपत्र की तस्वीर खींचकर ChatGPT पर अपलोड कर नकल करने का प्रयास कर रहे थे।

संस्थान प्रशासन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया है कि घटना शुक्रवार शाम की है। दोपहर की पाली में आयोजित परीक्षा के दौरान निरीक्षक ने साहिल को मोबाइल फोन इस्तेमाल करते हुए पकड़ा। जांच में सामने आया कि उन्होंने क्वेश्चन पेपर की फोटो खींचकर उसे ChatGPT पर डालकर उत्तर प्राप्त करने की कोशिश की थी। परीक्षा शाम चार बजे समाप्त हुई, जिसके बाद साहिल अपने हॉस्टल लौट गए। शाम को जब उनके कमरे का दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला तो साथी छात्रों और वार्डन ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया, जहां वे मृत अवस्था में मिले। तत्काल उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

IIT बॉम्बे के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि इस प्रकरण में साहिल के विरुद्ध कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई थी। संबंधित इंस्ट्रक्टर और विभागाध्यक्ष ने उनसे बातचीत की थी और उन्हें समझाया था। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया गया था कि इस घटना का उनके अकादमिक करियर पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। संस्थान ने छात्र की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है।

घटना की जानकारी मिलते ही परिसर में माहौल गरमा गया। देखते ही देखते 400 से अधिक छात्र प्रशासनिक भवन के सामने एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि संस्थान में शैक्षणिक दबाव और मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र की कमी के चलते ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कुलपति और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की मांग की। देर शाम निदेशक प्रोफेसर शिरीष केदारे ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उनकी चिंताओं को सुना। छात्रों के आक्रोश और मांग को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को स्थगित करने की घोषणा कर दी।

यह विगत सात महीनों में IIT बॉम्बे परिसर में आत्महत्या का तीसरा मामला है। इसी वर्ष जुलाई में नए सेमेस्टर की शुरुआत के साथ ही इसी हॉस्टल में बीटेक सेकेंड ईयर के 20 वर्षीय एक छात्र ने आत्महत्या कर ली थी। उससे पहले फरवरी माह में हॉस्टल-4 में सेकेंड ईयर के एक अन्य छात्र ने अपनी जान दे दी थी। लगातार हो रही इन घटनाओं ने संस्थान की छात्र कल्याण नीतियों और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

IIT बॉम्बे में छात्रों के मानसिक तनाव को दूर करने के लिए स्टूडेंट वेलनेस सेंटर (SWC) कार्यरत है, जहां व्यक्तिगत काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन की सुविधाएं उपलब्ध हैं। छात्र wellness@iitb.ac.in पर ईमेल या 022-2576-9070 पर फोन करके अपॉइंटमेंट ले सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई छात्र बात-बात पर चिड़चिड़ा होने लगे, पढ़ाई छोड़ दे, खुद को कमरे में बंद रखे, कम खाए-सोए या हमेशा निराशा भरी बातें करे, तो ये गंभीर मानसिक तनाव के लक्षण हो सकते हैं और ऐसे में तत्काल पेशेवर मदद लेनी चाहिए।

सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़े इस समस्या की भयावहता को उजागर करते हैं। IIT कानपुर के पूर्व छात्र धीरज सिंह द्वारा दायर RTI के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच देश के विभिन्न IITs में कुल 65 छात्रों ने आत्महत्या की। अकेले वर्ष 2025 में अब तक 15 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इन पांच वर्षों में IIT खड़गपुर में सर्वाधिक 11 मामले सामने आए हैं। धीरज सिंह IIT छात्रों के लिए एक ग्लोबल मेंटरिंग नेटवर्क का संचालन करते हैं और लंबे समय से इस मुद्दे को उठाते रहे हैं।

इस घटना ने एक बार फिर देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी संस्थानों में छात्रों पर पड़ रहे अत्यधिक शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा और मानसिक स्वास्थ्य संसाधनों की अपर्याप्तता पर बहस को तेज कर दिया है। छात्र संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि संस्थानों में काउंसलर की संख्या बढ़ाई जाए, पीयर सपोर्ट सिस्टम मजबूत किया जाए और शैक्षणिक नीतियों को अधिक मानवीय बनाया जाए। फिलहाल IIT बॉम्बे प्रशासन ने जांच पूरी होने तक परीक्षाएं स्थगित रखने का निर्णय लिया है और छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है।

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