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Mon, Oct 12, 2026Updated 6:06 PM IST
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विक्रमशिला पुल के बाद अब मुंगेर-भागलपुर फोरलेन सड़क में भी दिखी दरार, रोजाना 10 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन जारी; NHAI को मीडिया से मिली जानकारी

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मुंगेर/भागलपुर। बिहार में सड़क और पुलों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में मुंगेर-भागलपुर के बीच स्थित विक्रमशिला पुल में दरार आने की घटना के बाद अब इसी मार्ग पर निर्माणाधीन मुंगेर-भागलपुर फोरलेन सड़क पर भी दरार सामने आई है। इस नई घटना ने क्षेत्र में यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को इस फोरलेन सड़क में आई दरार की जानकारी किसी आधिकारिक निरीक्षण या विभागीय रिपोर्ट के माध्यम से नहीं, बल्कि मीडिया के जरिए मिली है। यह तथ्य स्वयं में निर्माण एजेंसियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली व निगरानी तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुंगेर और भागलपुर के बीच बन रही इस फोरलेन सड़क पर दरार पड़ने की सूचना सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। यह सड़क दोनों जिलों के बीच आवागमन का एक प्रमुख और व्यस्त मार्ग है। बताया जा रहा है कि इस निर्माणाधीन फोरलेन सड़क पर प्रतिदिन 10 हजार से अधिक वाहनों का आवागमन हो रहा है। इतनी भारी संख्या में वाहनों के गुजरने के कारण सड़क पर पहले से ही अत्यधिक दबाव बना हुआ है। ऐसे में सड़क की सतह पर दरार दिखाई देना यातायात सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा माना जा रहा है। भारी वाहनों, कारों, बसों और दोपहिया वाहनों की लगातार आवाजाही के बीच इस दरार के और चौड़ा होने या दुर्घटनाओं को आमंत्रित करने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले को उस समय और अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है, जब कुछ समय पहले ही मुंगेर-भागलपुर के बीच गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु में भी दरार आने की खबरें सामने आई थीं। विक्रमशिला पुल बिहार के पूर्वी हिस्से में यातायात की जीवन रेखा माना जाता है। उस पुल में दरार पाए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर सतर्कता बरती गई थी। अब ठीक उसी क्षेत्र में बन रही नई फोरलेन सड़क पर भी इसी तरह की समस्या उत्पन्न हो जाना यह दर्शाता है कि क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और उसके रखरखाव को लेकर व्यापक स्तर पर समीक्षा की आवश्यकता है। पुल के बाद अब सड़क में दरार आने की घटनाक्रम ने स्थानीय जनता के मन में निर्माण कार्यों की मजबूती को लेकर संदेह पैदा कर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) इस फोरलेन परियोजना की निगरानी और निर्माण से जुड़ी प्रमुख एजेंसी है। हालांकि, इस मामले में जो बात सबसे अधिक ध्यान खींच रही है वह यह है कि NHAI के पास सड़क में आई दरार की कोई पूर्व सूचना या आंतरिक रिपोर्ट नहीं थी। जब मीडिया में इस संबंध में खबरें प्रसारित हुईं और सड़क की स्थिति को लेकर सवाल उठाए गए, तब जाकर NHAI के संज्ञान में यह मामला आया। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने के बाद ही विभाग की ओर से इस पर ध्यान दिया गया। यह स्थिति स्पष्ट रूप से इंगित करती है कि जमीनी स्तर पर परियोजना की नियमित जांच और गुणवत्ता नियंत्रण के तंत्र में कहीं न कहीं चूक हुई है। यदि मीडिया द्वारा इस मामले को प्रकाश में नहीं लाया जाता, तो संभवतः यह दरार और अधिक गंभीर रूप ले सकती थी और बड़ी संख्या में वाहन चालकों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

मुंगेर और भागलपुर दोनों ही ऐतिहासिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण जिले हैं। इन दोनों शहरों के बीच बेहतर सड़क संपर्क स्थापित करने के उद्देश्य से इस फोरलेन सड़क का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना का लक्ष्य यात्रा के समय को कम करना, व्यापार को बढ़ावा देना और क्षेत्र के समग्र विकास में योगदान देना है। लेकिन निर्माण अवस्था में ही सड़क पर दरार आने से इस मेगा प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर असर पड़ना स्वाभाविक है। रोजाना 10 हजार से ज्यादा वाहनों का दबाव इस बात का प्रमाण है कि यह मार्ग जनता के लिए कितना उपयोगी और अनिवार्य है। ऐसे में सड़क की मरम्मत और सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।

फिलहाल, इस घटना के बाद स्थानीय स्तर पर यात्रियों और वाहन चालकों में असुरक्षा का भाव देखा जा रहा है। लोग सवाल कर रहे हैं कि जब निर्माणाधीन सड़क ही वाहनों के भारी दबाव में दरकने लगे, तो भविष्य में इसकी स्थिति क्या होगी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह दरार सड़क के किस हिस्से में और कितनी लंबी है, या इसके पीछे का मुख्य तकनीकी कारण क्या है। क्या यह मिट्टी के धंसने, निर्माण सामग्री की खराब गुणवत्ता, या फिर वाहनों के अत्यधिक भार के कारण हुआ है, इसकी पुष्टि के लिए विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच किए जाने की आवश्यकता है। स्रोत सामग्री में दरार के सटीक कारणों या उसके आयामों का उल्लेख नहीं है, इसलिए इस संबंध में कोई अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

अब देखना यह होगा कि मीडिया के जरिए जानकारी मिलने के बाद NHAI और संबंधित निर्माण एजेंसियां इस मामले में क्या ठोस कदम उठाती हैं। क्या इस दरार की मरम्मत के लिए तत्काल कार्य शुरू किया जाएगा, या फिर पूरी सड़क की गुणवत्ता जांच के लिए किसी उच्चस्तरीय समिति का गठन होगा। साथ ही, विक्रमशिला पुल और अब इस फोरलेन सड़क में दरार आने की लगातार घटनाओं के मद्देनजर राज्य सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से बिहार में चल रही अन्य सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता की समीक्षा किए जाने की भी मांग उठने लगी है। जनता की सुरक्षा और करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़कों की मजबूती से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में NHAI की ओर से इस मामले में आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।