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Mon, Oct 12, 2026Updated 7:17 PM IST
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बेगूसराय में पीएम मोदी का पुतला दहन: दिल्ली पुलिस के लाठीचार्ज के विरोध में एआईएसएफ ने किया प्रदर्शन, वोट चोरी का लगाया आरोप

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बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंककर अपना आक्रोश व्यक्त किया। यह प्रदर्शन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के खिलाफ कथित रूप से किए गए पुलिसिया लाठीचार्ज के विरोध में आयोजित किया गया था। एआईएसएफ कार्यकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई की तीखी निंदा करते हुए इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया।

बेगूसराय में हुए इस प्रदर्शन के दौरान एआईएसएफ के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। संगठन ने अपने संबोधन में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि देश में मतदान के अधिकार को छीनने की एक सुनियोजित साजिश रची जा रही है। एआईएसएफ ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार लगातार इस दिशा में काम कर रहे हैं। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि वोट देने का अधिकार हर नागरिक का मौलिक और संवैधानिक अधिकार है, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में इसे कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यह भी आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में हुए चुनावों में वोट चोरी के माध्यम से ही भाजपा की सरकारें बनाई गई हैं। एआईएसएफ ने विशेष रूप से बिहार, पश्चिम बंगाल और केंद्र सरकार के गठन का जिक्र करते हुए कहा कि इन सभी जगहों पर जनमत की अनदेखी करके सत्ता हासिल की गई है। संगठन ने इसे ‘वोट चोरी का पर्दाफाश’ बताते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर लगातार जनता के बीच जागरूकता फैलाने का काम करेंगे। उनका कहना था कि जब तक चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक लोकतंत्र की वास्तविक मजबूती संभव नहीं है।

इस पूरे घटनाक्रम की पृष्ठभूमि दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुई घटनाओं से जुड़ी है। जंतर-मंतर देश की राजधानी में शांतिपूर्ण प्रदर्शन और धरने का सबसे प्रमुख स्थल माना जाता रहा है। एआईएसएफ के अनुसार, उनके छात्र साथी वहां लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। छात्र संगठन ने इस पुलिसिया कार्रवाई को पूरी तरह से अलोकतांत्रिक और दमनकारी बताया है। बेगूसराय में हुए प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य दिल्ली में छात्रों के साथ हुई इस कथित ज्यादती के खिलाफ आवाज बुलंद करना और प्रधानमंत्री का पुतला फूंककर केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित करना था।

एआईएसएफ ने बेगूसराय में आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों का ध्यान खींचने का प्रयास किया। प्रदर्शन में शामिल छात्रों ने कहा कि अगर दिल्ली जैसे शहर में, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं, वहां छात्रों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जा सकता है, तो अन्य राज्यों और छोटे शहरों में स्थिति कितनी भयावह हो सकती है, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। उन्होंने मांग की कि जंतर-मंतर पर छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए और दोषियों को दंडित किया जाना चाहिए।

इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एआईएसएफ के पदाधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष केवल एक दिन या एक घटना तक सीमित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि छात्रों के अधिकारों का हनन इसी तरह जारी रहा और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो संगठन आने वाले समय में और भी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। संगठन ने अन्य छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों से भी अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट हों और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाएं।

बेगूसराय में प्रधानमंत्री का पुतला दहन और उसके बाद दिए गए बयानों से यह स्पष्ट होता है कि एआईएसएफ ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को एक बहाने के रूप में उपयोग करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और चुनाव आयोग तीनों को अपने निशाने पर लिया है। हालांकि, प्रशासन या पुलिस की ओर से इस प्रदर्शन और लगाए गए आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर वास्तव में किस संदर्भ में और कब यह लाठीचार्ज हुआ, क्योंकि एआईएसएफ के स्थानीय प्रदर्शन में इसकी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है।

कुल मिलाकर, बेगूसराय में एआईएसएफ का यह प्रदर्शन छात्र राजनीति और राष्ट्रीय मुद्दों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है। वोट चोरी के आरोपों से लेकर चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर साजिश रचने के दावों तक, संगठन ने कई गंभीर विषयों को सार्वजनिक मंच पर उठाया है। अब देखना यह होगा कि इन आरोपों और प्रदर्शनों पर चुनाव आयोग, दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की क्या प्रतिक्रिया आती है।