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Mon, Oct 12, 2026Updated 7:17 PM IST
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बड़वानी: कम बारिश से सूख रहीं फसलें, नहर का पानी छोड़ने की मांग को लेकर 11 गांवों के किसान पहुंचे कलेक्टर कार्यालय

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बड़वानी। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में इस वर्ष मानसून के दौरान हुई कम बारिश के कारण किसानों के सामने सिंचाई का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। खेतों में खड़ी फसलें पानी की कमी के कारण सूखने लगी हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। नहर में पानी छोड़े जाने की मांग को लेकर सोमवार दोपहर जिले के 11 गांवों के किसान एकत्रित होकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से अपनी समस्याओं का तत्काल समाधान करने की गुहार लगाई। वंदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, किसानों का कहना है कि यदि समय रहते नहर का पानी खेतों तक नहीं पहुंचाया गया तो उनकी पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी।

बड़वानी जिले में इस बार बारिश सामान्य से काफी कम रही है। पर्याप्त वर्षा न होने के कारण क्षेत्र के तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोतों में पानी का स्तर तेजी से गिर गया है। सिंचाई के परंपरागत साधनों में पानी उपलब्ध न होने से किसान अपने खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। खेतों में बोई गई फसलें अब पानी की बूंद-बूंद को तरस रही हैं। किसानों ने बताया कि फसल के विकास के इस अत्यंत महत्वपूर्ण चरण में पानी की भारी कमी के कारण पौधे पीले पड़ने लगे हैं और कई जगहों पर फसल पूरी तरह से सूखने की कगार पर पहुंच चुकी है। ऐसे में किसानों के सामने आर्थिक तबाही का खतरा मंडरा रहा है।

इसी समस्या को लेकर सोमवार दोपहर बड़वानी जिले के 11 गांवों के किसानों ने एकजुटता दिखाते हुए कलेक्टर कार्यालय का रुख किया। किसानों का यह समूह अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के समक्ष पहुंचा। किसानों ने कलेक्टर कार्यालय में अधिकारियों को अपनी व्यथा सुनाई और स्पष्ट शब्दों में मांग रखी कि क्षेत्र की नहरों में तुरंत पानी छोड़ा जाए ताकि उनके खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच सके। किसानों ने कहा कि वे लोग अपनी फसलों को सूखता हुआ नहीं देख सकते, क्योंकि यही फसलें उनके परिवार के भरण-पोषण और आने वाले समय की आजीविका का एकमात्र सहारा हैं।

किसानों ने प्रशासन के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि कम बारिश के कारण प्राकृतिक जल स्रोत पहले ही सूख चुके हैं या उनमें बहुत कम पानी बचा है। ऐसी स्थिति में केवल नहर के पानी के सहारे ही खेतों की सिंचाई संभव है। उन्होंने बताया कि यदि नहर में पानी नहीं छोड़ा गया तो 11 गांवों के किसानों की हजारों हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसल पूरी तरह नष्ट हो जाएगी। फसल नष्ट होने से न केवल किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा, बल्कि इसका सीधा असर जिले की कृषि उत्पादन क्षमता पर भी पड़ेगा। किसानों ने प्रशासन से यह भी आग्रह किया कि नहर में पानी छोड़ने की प्रक्रिया को बिना किसी देरी के शुरू किया जाए, क्योंकि हर बीतता दिन उनकी फसलों के लिए घातक साबित हो रहा है।

बड़वानी जिला मुख्यालय पर किसानों के इस प्रदर्शन और मांग को लेकर कृषि जगत में चिंता का माहौल है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में इस वर्ष मानसून की अनियमितता और कम बारिश ने कृषि क्षेत्र को प्रभावित किया है, जिसमें बड़वानी जिला भी शामिल है। किसानों का यह दल सोमवार दोपहर कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और उन्होंने अपनी बात रखी। हालांकि, प्रशासन की ओर से नहर में पानी छोड़ने को लेकर अभी तक कोई ठोस और लिखित आश्वासन मिलने की पुष्टि नहीं हो सकी है। किसानों ने प्रशासन से अपील की है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए जाएं कि वे नहरों में पानी छोड़ने की व्यवस्था सुनिश्चित करें।

यह पहला अवसर नहीं है जब किसानों को सिंचाई के लिए संघर्ष करना पड़ रहा हो। कम बारिश के मौसम में नहरों के पानी पर किसानों की निर्भरता हमेशा से बढ़ जाती है। ऐसे समय में प्रशासन की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। किसानों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने आए हैं और उन्हें उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी समस्या को समझेगा और नहर में पानी छोड़ने का आदेश जारी करेगा। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे भी अपना विरोध जारी रखेंगे।

वंदे भारत न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, 11 गांवों के किसानों द्वारा कलेक्टर कार्यालय में दी गई इस आवेदन और उनके विरोध के बाद अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। किसानों को इस बात की प्रतीक्षा है कि प्रशासन कब तक नहरों में पानी छोड़ने का निर्णय लेता है ताकि उनकी सूखती फसलों को बचाया जा सके। बड़वानी जिले के इन 11 गांवों के किसानों की यह मांग अब पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है और अन्य किसानों में भी इसे लेकर जागरूकता बढ़ी है। देखना यह होगा कि प्रशासन इस संकट की घड़ी में किसानों की मदद के लिए कब और क्या ठोस कदम उठाता है।