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Tue, Oct 13, 2026Updated 10:21 AM IST
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सुकमा: पालाचलमा जंगल में नक्सली डम्प से 13 हथियार और 208 डेटोनेटर बरामद, BGL लॉन्चर सहित भारी मात्रा में गोला-बारूद जब्त

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छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में सुरक्षा बलों को नक्सलियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिले के किस्टाराम थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पालाचलमा गांव के पहाड़ी और घने जंगल इलाके में सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने नक्सलियों द्वारा छिपाकर रखे गए एक बड़े डम्प का भंडाफोड़ किया है। इस डम्प से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। सर्चिंग ऑपरेशन के दौरान कुल 13 हथियार और 208 डेटोनेटर जब्त किए गए हैं। इसके अलावा बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) लॉन्चर और कारतूस भी बड़ी संख्या में मिले हैं। यह बरामदगी सुरक्षा बलों के लिए माओवादियों के खिलाफ जारी अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

वन्दे भारत न्यूज़ को प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा अभियान आत्मसमर्पित नक्सलियों से मिली सूचना के आधार पर शुरू किया गया था। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने सुरक्षा बलों को बताया था कि पालाचलमा गांव के आसपास के पहाड़ी और जंगल क्षेत्रों में नक्सलियों ने अपने हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री को जमीन के नीचे या सुरक्षित ठिकानों पर छिपाकर रखा है। इस सूचना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई की योजना बनाई गई। सूचना मिलने के बाद जिला पुलिस बल, डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) और बस्तर फाइटर्स की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया। इन तीनों बलों के जवानों ने मिलकर पालाचलमा के जंगलों में एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग अभियान चलाया।

सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने पालाचलमा गांव के पहाड़ी-जंगल इलाके में पहुंचकर बारीकी से तलाशी अभियान शुरू किया। घने जंगलों और ऊंचे-नीचे पहाड़ी रास्तों के बीच यह सर्चिंग ऑपरेशन किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन जवानों ने पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ काम किया। तलाशी के दौरान ही टीम को वह डम्प मिल गया, जिसकी सूचना आत्मसमर्पित नक्सलियों ने दी थी। डम्प की खुदाई और जांच के दौरान वहां से बड़ी मात्रा में घातक सामग्री बरामद हुई। बरामद सामग्री में 13 हथियार शामिल हैं, जो नक्सलियों द्वारा सुरक्षा बलों या अन्य हमलों में इस्तेमाल किए जाने थे। इसके साथ ही 208 डेटोनेटर भी जब्त किए गए हैं। डेटोनेटर का उपयोग मुख्य रूप से आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) यानी विस्फोटकों को ट्रिगर करने के लिए किया जाता है।

बरामद की गई सामग्री में बीजीएल (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) लॉन्चर का मिलना विशेष रूप से ध्यान खींचता है। बीजीएल लॉन्चर एक बेहद खतरनाक हथियार माना जाता है, जिसका इस्तेमाल माओवादी सुरक्षा बलों के काफिलों या कैंपों पर हमले के लिए करते हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में कारतूस भी जब्त किए गए हैं। इन सभी हथियारों और विस्फोटक सामग्रियों को नक्सलियों ने भविष्य में किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने या सुरक्षा बलों के अभियानों को विफल करने की नीयत से छिपाकर रखा था। सुरक्षा बलों की समय रहते की गई इस कार्रवाई से नक्सलियों की एक बड़ी साजिश नाकाम हो गई है।

किस्टाराम थाना क्षेत्र सुकमा जिले के उन संवेदनशील इलाकों में शुमार है, जहां माओवादी प्रभाव समय-समय पर देखा जाता रहा है। पालाचलमा जैसे पहाड़ी और घने जंगल वाले क्षेत्र नक्सलियों के लिए छिपने और अपनी गतिविधियां संचालित करने के अनुकूल होते हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों द्वारा लगातार एरिया डोमिनेशन और सर्चिंग अभियान चलाए जाते हैं ताकि माओवादियों को उनके ठिकानों से बाहर निकाला जा सके और उनकी रसद तथा हथियारों के जखीरे को नष्ट किया जा सके। हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों ने बस्तर संभाग में नक्सलियों के खिलाफ अपना दबाव काफी बढ़ा दिया है। आत्मसमर्पण नीति के तहत कई माओवादी मुख्यधारा में लौट रहे हैं और सुरक्षा बलों को उनके पूर्व साथियों की गतिविधियों और हथियार छिपाने के ठिकानों की सटीक जानकारी दे रहे हैं। पालाचलमा में मिली यह सफलता इसी रणनीति का परिणाम है।

आत्मसमर्पित नक्सलियों की सूचना पर कार्रवाई करना सुरक्षा बलों के लिए दोहरी जीत होती है। एक तरफ जहां हथियार और विस्फोटक बरामद कर लिए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह संदेश भी जाता है कि माओवादी संगठन अब अंदर से कमजोर हो रहा है और उसके सदस्य हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण जीवन की ओर लौट रहे हैं। 13 हथियारों, 208 डेटोनेटरों, बीजीएल लॉन्चर और कारतूसों की यह बरामदगी नक्सलियों की उस क्षमता को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी, जिसका वे इस्तेमाल हिंसक घटनाओं को अंजाम देने के लिए करते थे।

सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ने बरामद किए गए सभी हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री को कब्जे में ले लिया है। किस्टाराम थाना क्षेत्र में इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के सफल सर्चिंग ऑपरेशन से न केवल नक्सलियों का मनोबल टूटेगा, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को भी माओवादी हिंसा से राहत मिलेगी। पालाचलमा जंगल में मिली इस सफलता के बाद सुरक्षा बलों ने आसपास के अन्य संदिग्ध इलाकों में भी अपनी निगरानी और तलाशी अभियान को और तेज कर दिया है, ताकि यदि कोई और डम्प मौजूद हो तो उसे भी समय रहते खोज निकाला जा सके। वन्दे भारत न्यूज़ की यह रिपोर्ट सुरक्षा बलों की इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर आधारित है।