नई दिल्ली: बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का असर देश के कई हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात में रविवार दोपहर से ही मौसम बदल गया और कई क्षेत्रों में भारी बारिश की स्थिति उत्पन्न हो गई। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देशभर के कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किए हैं, जिनमें सोमवार के लिए झारखंड में बारिश का ऑरेंज अलर्ट शामिल है, जबकि मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, मराठवाड़ा, कोंकण-गोवा, आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और केरल में यलो अलर्ट लागू है।
गुजरात के जूनागढ़ में गिरनार वन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण एक गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई। इंद्रेश्वर महादेव मंदिर जाने वाली सड़क पर अचानक पानी का बहाव तेज हो गया, जिससे मंदिर में दर्शन करने गए बच्चों सहित लगभग 40 लोग बहाव में फंस गए। बारिश के कारण गिरनार पर्वत से गिरने वाले झरने में भी बाढ़ आ गई, जिससे स्थिति और चिंताजनक हो गई। राहत की बात यह है कि रेस्क्यू अभियान के तहत सभी 40 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
वहीं, केरल के मल्लपुरम जिले में पूक्कोट्टुम्पडम क्षेत्र में कोट्टाप्पुझा नदी में अचानक बाढ़ आ गई। इस अचानक आई बाढ़ में पांच लोगों का एक समूह बह गया। इस दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य अभी लापता बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू और राहत अभियान की प्रक्रिया जारी है, हालांकि स्रोत में इस बात का स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि शेष एक व्यक्ति की स्थिति क्या है।
मौसम विभाग के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने इस कम दबाव के क्षेत्र के कारण मानसूनी गतिविधियों में तेजी आई है। इसका सीधा असर मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों के साथ-साथ दक्षिणी भारत के कई राज्यों पर भी पड़ रहा है। रविवार दोपहर से मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात में मौसम बदलने लगा, जिससे इन क्षेत्रों में बारिश की संभावना बढ़ गई।
मौसम विभाग ने सोमवार के लिए झारखंड में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जो इंगित करता है कि राज्य में भारी से अति भारी बारिश हो सकती है। नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। ऑरेंज अलर्ट का मतलब होता है कि मौसमी स्थिति गंभीर हो सकती है और इससे जानमाल की क्षति का जोखिम बढ़ जाता है।
इसके अलावा, देश के कुल 10 से अधिक क्षेत्रों में यलो अलर्ट लागू है। इनमें मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, मराठवाड़ा, कोंकण-गोवा, आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और केरल शामिल हैं। यलो अलर्ट का अर्थ है कि इन क्षेत्रों में भारी बारिश होने की संभावना है और लोगों को अपडेट रखने और सतर्क रहने की आवश्यकता है।
गुजरात के जूनागढ़ में हुई घटना इस बात का प्रमाण है कि पहाड़ी और वन क्षेत्रों में अचानक बारिश के कारण कितनी जल्दी स्थिति खतरनाक हो सकती है। गिरनार वन क्षेत्र में इंद्रेश्वर महादेव मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर पानी का तेज बहाव ने दर्शनार्थियों को फंसा दिया। बच्चों सहित 40 लोगों के फंसने की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू टीमों को मौके पर भेजा गया। गिरनार पर्वत से गिरने वाले झरने में बाढ़ आने से पानी का स्तर बढ़ गया, लेकिन समय रहते रेस्क्यू कार्य सफल रहा और सभी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया।
केरल में हुई घटना अधिक दुखद रही। मल्लपुरम जिले के पूक्कोट्टुम्पडम में कोट्टाप्पुझा नदी में अचानक आई बाढ़ ने पांच लोगों को बहा दिया। इसमें दो लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य अभी तक लापता हैं। खोज और रेस्क्यू अभियान जारी है, लेकिन लापता लोगों के बारे में अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।
मौसम विभाग की ओर से जारी सैटेलाइट मैप के अनुसार, मानसूनी बादलों की स्थिति देश के बड़े हिस्से में सक्रिय है। आने वाले दो दिनों, यानी 22 और 23 सितंबर के लिए मौसम का हाल बताया गया है, जिसमें कई राज्यों में बारिश जारी रहने की संभावना है। देशभर के प्रमुख शहरों का अनुमानित तापमान भी मौसम विभाग द्वारा जारी किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सितंबर माह में मानसून की वापसी के समय अक्सर ऐसे कम दबाव के क्षेत्र बनते हैं, जो अचानक भारी बारिश का कारण बन सकते हैं। इसलिए नागरिकों को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम अपडेट से लगातार अवगत रहें और नदियों, झरनों तथा निचले क्षेत्रों में जाने से बचें। विशेषकर पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि अचानक बाढ़ और भूस्खलन जैसी स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, बंगाल की खाड़ी के कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से देश के विभिन्न हिस्सों में मौसमी गतिविधियां तेज हो गई हैं। गुजरात में 40 लोगों के सुरक्षित रेस्क्यू होने से बड़ी दुर्घटना टल गई, लेकिन केरल में दो लोगों की मौत और दो के लापता होने से मौसमी तबाही की गंभीरता एक बार फिर उभरकर सामने आई है। मौसम विभाग के अलर्ट और अपडेट का पालन करना इन परिस्थितियों में अत्यंत आवश्यक है।














