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Tue, Oct 13, 2026Updated 10:21 AM IST
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ट्रम्प ने रूस से डीजल आयात के फैसले का किया बचाव, कहा- अमेरिका को हो रहा फायदा; EU पर 250 अरब डॉलर खर्च करने का आरोप

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वाशिंगटन। वंदे भारत न्यूज़। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल आयात करने के अपने प्रशासन के फैसले का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सौदा पूरी तरह से अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है और इससे देश को लाभ हो रहा है। इसके साथ ही राष्ट्रपति ट्रम्प ने यूरोपीय संघ (EU) की ऊर्जा नीतियों पर भी तीखा प्रहार किया और कहा कि यूरोपीय संघ ने रूस से ऊर्जा खरीदने पर लगभग 250 अरब डॉलर का विशाल खर्च किया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिकी मीडिया इन तथ्यों को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहा है और जनता के सामने सही तस्वीर पेश नहीं कर रहा है।

राष्ट्रपति ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा व्यापार, विशेषकर रूस से होने वाले ईंधन आयात को लेकर वैश्विक राजनीति में लगातार बहस चल रही है। ट्रम्प ने अपने संबोधन में साफ किया कि रूस से डीजल खरीदने का निर्णय कोई जल्दबाजी में उठाया गया कदम नहीं है, बल्कि यह एक सोचा-समझा और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद कदम है। उनका तर्क था कि जब तक कोई व्यापारिक समझौता अमेरिका को आर्थिक रूप से मजबूत करता है और देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होता है, तब तक उसे लागू करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

ट्रम्प ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यूरोपीय संघ के ऊर्जा खर्च का सीधा जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ ने रूस से ऊर्जा खरीदने पर 250 अरब डॉलर खर्च किए हैं। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यूरोपीय देशों ने पिछले कुछ वर्षों में रूस पर विभिन्न प्रकार के प्रतिबंध लगाने और उससे ऊर्जा निर्भरता कम करने की बार-बार घोषणाएं की हैं। ट्रम्प ने इस विरोधाभास की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि जहां एक तरफ यूरोप रूस के खिलाफ कड़ी नीतियों की बात करता है, वहीं दूसरी तरफ वह ऊर्जा के लिए रूस पर भारी मात्रा में धन खर्च कर रहा है।

इस पूरे मामले में अमेरिकी मीडिया की भूमिका पर भी राष्ट्रपति ट्रम्प ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया जानबूझकर उन खबरों और तथ्यों को दरकिनार कर रहा है जो उनके प्रशासन के पक्ष में हैं या जो यूरोपीय संघ की वास्तविक स्थिति को दर्शाते हैं। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिकी मीडिया ने यूरोपीय संघ द्वारा रूस पर किए गए 250 अरब डॉलर के ऊर्जा खर्च को वह कवरेज नहीं दी जिसकी वह हकदार थी। उनका कहना था कि अगर यही खर्च अमेरिका ने किया होता तो मीडिया इसे सबसे बड़ा मुद्दा बना देता, लेकिन जब बात यूरोप की आती है तो मीडिया चुप्पी साध लेता है।

ऊर्जा सुरक्षा और आयात नीतियों को लेकर ट्रम्प प्रशासन हमेशा से ‘अमेरिका फर्स्ट’ की नीति पर जोर देता रहा है। डीजल जैसे आवश्यक ईंधन का आयात किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और परिवहन व्यवस्था के लिए बेहद अहम होता है। ट्रम्प ने इस बात पर बल दिया कि रूस से डीजल खरीदने के फैसले से अमेरिका को फायदा हो रहा है। हालांकि, उन्होंने इस फायदे के विशिष्ट आर्थिक आंकड़ों या बचत के विस्तृत ब्योरे पर कोई अतिरिक्त जानकारी साझा नहीं की। उन्होंने केवल इतना स्पष्ट किया कि यह सौदा अमेरिकी हितों के अनुरूप है और सरकार ने इसे लागू करते समय सभी पहलुओं को ध्यान में रखा है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों का मानना है कि ट्रम्प का यह बयान केवल ऊर्जा व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों की वर्तमान स्थिति को भी दर्शाता है। यूरोपीय संघ और अमेरिका दोनों ही रूस को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण रखते रहे हैं, और ट्रम्प का यह बयान इसी अंतर को रेखांकित करता है। 250 अरब डॉलर के ऊर्जा खर्च का जिक्र करके ट्रम्प ने यूरोप की उस नीति पर सवाल खड़े किए हैं जिसमें वह एक तरफ रूस पर दबाव बनाने की बात करता है और दूसरी तरफ उसी से भारी मात्रा में ऊर्जा खरीदता है।

यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिकी मीडिया पर पक्षपातपूर्ण रिपोर्टिंग का आरोप लगाया हो। उन्होंने पहले भी कई मौकों पर कहा है कि मीडिया उनके प्रशासन की उपलब्धियों और तार्किक फैसलों को जनता तक पहुंचाने से बचता है। इस बार उन्होंने रूस से डीजल आयात और यूरोपीय संघ के ऊर्जा खर्च के मामले को इसी श्रेणी में रखा है। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी जनता को सही जानकारी मिलनी चाहिए ताकि वे स्वयं तय कर सकें कि कौन सा फैसला देश के हित में है और कौन सा नहीं।

हालांकि, स्रोत सामग्री में यूरोपीय संघ की ओर से ट्रम्प के इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण शामिल नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि 250 अरब डॉलर का यह खर्च किस निश्चित अवधि में किया गया है या इसमें किन-किन ऊर्जा स्रोतों को शामिल किया गया है। ट्रम्प ने अपने बयान में इन विवरणों को नहीं खोला है, जिससे इस आंकड़े की सटीक प्रकृति के बारे में अनिश्चितता बनी हुई है।

कुल मिलाकर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान अमेरिका की ऊर्जा नीतियों, यूरोपीय संघ के साथ उसके आर्थिक संबंधों और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टिंग पर एक साथ कई सवाल खड़े करता है। रूस से डीजल आयात का बचाव करते हुए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि उनका प्रशासन हर फैसला अमेरिका के फायदे को ध्यान में रखकर लेता है। वहीं, यूरोपीय संघ के 250 अरब डॉलर के ऊर्जा खर्च का जिक्र करके उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर यूरोप की ऊर्जा नीतियों की विश्वसनीयता पर भी चर्चा छेड़ दी है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि इस बयान पर यूरोपीय संघ, रूस और अमेरिकी मीडिया की क्या प्रतिक्रिया आती है।