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Tue, Oct 13, 2026Updated 10:21 AM IST
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CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिलने पर फिर आंदोलन की चेतावनी

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नई दिल्ली। वंदे भारत न्यूज़। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और दिल्ली पुलिस के बीच जारी विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। संगठन ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि उन्हें राजधानी के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति और तारीख नहीं दी गई, तो वे दोबारा आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। इस पूरे मामले में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर भी बहस छिड़ गई है, जिसमें संगठन से जुड़े दीपक ने आरोप लगाया है कि उनकी हिरासत का अधूरा वीडियो सार्वजनिक किया गया है, जिससे तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

दरअसल, यह पूरा विवाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर किए गए प्रदर्शन और उसके बाद हुई कार्रवाई से जुड़ा है। संगठन ने दिल्ली पुलिस पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया जा रहा है। CJP का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में हर नागरिक और संगठन को अपने विचार व्यक्त करने तथा शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। इसके बावजूद, जब उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी, तो उन्हें उचित तारीख आवंटित नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने अब दिल्ली पुलिस के सामने 24 घंटे का कड़ा अल्टीमेटम रखा है।

CJP की ओर से जारी बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगर निर्धारित 24 घंटे की समयसीमा के भीतर दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं देती है और कोई निश्चित तारीख तय नहीं करती है, तो संगठन दोबारा आंदोलन का रास्ता अपनाएगा। संगठन ने चेतावनी दी है कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं और पुलिस प्रशासन की इस ढुलमुल नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका मानना है कि प्रदर्शन की इजाजत न देना उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का सीधा हनन है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक वीडियो भी विवाद का केंद्र बना हुआ है, जिसे लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित हो रहे इस वीडियो को लेकर CJP से जुड़े दीपक ने गंभीर आपत्ति जताई है। दीपक ने दावा किया है कि जो वीडियो दिखाया जा रहा है, वह पूरी तरह से अधूरा है। उनका कहना है कि हिरासत के दौरान बनाए गए इस वीडियो को काट-छांट कर पेश किया गया है, ताकि असली स्थिति को जनता के सामने सही तरीके से न लाया जा सके। दीपक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधूरा वीडियो दिखाकर संगठन और उसके सदस्यों की छवि को जानबूझकर खराब करने का प्रयास किया जा रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है।

दीपक के इस बयान से यह स्पष्ट होता है कि संगठन पुलिस की कार्रवाई और मीडिया में चल रही रिपोर्टिंग दोनों से असंतुष्ट है। उनका तर्क है कि यदि वीडियो को बिना किसी एडिटिंग या कट के पूरा दिखाया जाए, तो असलियत सामने आ जाएगी और यह साबित होगा कि वे किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं कर रहे थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस की ओर से इस वीडियो विवाद और दीपक के इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक या विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह भी अनिश्चित है कि पुलिस प्रशासन इस वीडियो को लेकर अपनी कोई स्पष्टीकरण जारी करेगा या नहीं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर को ऐतिहासिक रूप से धरना-प्रदर्शन और नागरिकों के विरोध प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र माना जाता रहा है। यहां विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और अन्य संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए एकत्र होते हैं। ऐसे में किसी संगठन को प्रदर्शन की अनुमति न मिलना और उस पर पुलिस कार्रवाई का मामला हमेशा से संवेदनशील रहा है। CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी का यह मामला भी अब इसी शृंखला में एक नया विवाद बनकर उभरा है।

फिलहाल, सभी की निगाहें दिल्ली पुलिस के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि क्या पुलिस प्रशासन CJP द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम को गंभीरता से लेता है और उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देता है, या फिर संगठन अपनी चेतावनी के अनुसार दोबारा आंदोलन की घोषणा करता है। यदि अनुमति नहीं मिलती है, तो राजधानी में कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

वंदे भारत न्यूज़ की ओर से यह स्पष्ट किया जाता है कि इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। दीपक द्वारा लगाए गए आरोपों और वीडियो के अधूरे होने के दावे को उनकी प्रतिक्रिया के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है। पुलिस प्रशासन का पक्ष आने पर स्थिति और अधिक स्पष्ट हो सकेगी। संगठन ने अपनी मांगों को लेकर जो रुख अपनाया है, वह फिलहाल बरकरार है और 24 घंटे की समयसीमा समाप्त होने के बाद उनके अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।