Vande Bharat News
होम› देश› समाचार

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को सख्त निर्देश दिया: प्रधानमंत्री मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीर तुरंत हटाएं, केस में संवेदनशीलता बरतने की गारंटी

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मेटा प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीर वाले आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटा ले। न्यायालय ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक महिला का मामला नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला […]
दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को सख्त निर्देश दिया: प्रधानमंत्री मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीर तुरंत हटाएं, केस में संवेदनशीलता बरतने की गारंटी
शेयर करेंFacebookX

दिल्ली उच्च न्यायालय ने मेटा प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड (छेड़छाड़ की गई) तस्वीर वाले आपत्तिजनक कंटेंट को तुरंत हटा ले। न्यायालय ने इस मामले में यह स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक महिला का मामला नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा मामला है, जिसे विशेष संवेदनशीलता से संभाला जाना चाहिए।

दिल्ली हाई कोर्ट की इस कार्रवाई के पीछे एक याचिका है, जिसे उसी महिला ने दायर किया थी, जिसकी तस्वीर का उपयोग करके डीपफेक यानी मॉर्फ्ड तस्वीर बनाई गई थी। इस याचिका में यह आरोप लगाया गया था कि कुछ लोगों ने प्रधानमंत्री के साथ एक महिला की अश्लील और मॉर्फ्ड तस्वीर फैलाई है, जिससे प्रधानमंत्री की छवि और सम्मान को नुकसान पहुंचाया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस कारिया की बेंच को केस लिस्ट किया, जिसके बाद जस्टिस गिरीश कठपालिया ने मामले की सुनवाई की। शुक्रवार को ही न्यायालय ने इस मामले पर तत्काल सुनवाई की सहमति दी थी। न्यायालय ने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि दिल्ली पुलिस को इस मामले को लेकर पूरी संवेदनशीलता से काम करना चाहिए।

इस मामले में चीफ जस्टिस पार्टी (CJP) के दो प्रमुख नेताओं सौरव दास और अभिजीत दिपके को न्यायालय ने नोटिस जारी किया है। इन पर आरोप है कि उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ एक महिला की मॉर्फ्ड और अश्लील तस्वीर फैलाई थी। न्यायालय ने इन दोनों व्यक्तियों को नोटिस जारी करते हुए उनसे अपनी बहस और जवाब दायर करने को कहा है।

मामले की मुख्य बात यह है कि जिस महिला की तस्वीर का उपयोग करके मॉर्फ्ड तस्वीर बनाई गई, वही महिला ने इस याचिका दायर की है। इसका मतलब है कि मॉर्फ्ड तस्वीर के विरुद्ध वही व्यक्ति कानूनी रिश्तेदार के रूप में आगे बढ़ रही है। न्यायालय ने इस बात पर भी अपनी ध्यान दी है कि महिला के अधिकों की रक्षा की जाए और उसकी स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए।

दिल्ली हाई कोर्ट ने मेटा को यह निर्देश दिया है कि वह तत्काल उस सभी कंटेंट को हटा ले जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के साथ महिला की मॉर्फ्ड तस्वीर मौजूद है। न्यायालय ने इस बात को भी अपने निर्णय का हिस्सा बनाया कि ऐसा कंटेंट जो राष्ट्रप्रमुख की छवि को नुकसान पहुंचाता है, उसे प्लेटफॉर्म पर रखना उचित नहीं है।

न्यायालय ने यह भी सुनिश्चित किया कि दिल्ली पुलिस को इस मामले को लेकर संवेदनशील रहना चाहिए। यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री से जुड़े किसी भी प्रकार के केस में कानूनी प्रक्रिया को बिना किसी पूर्वाग्रह के संभाला जाएगा। न्यायालय ने इस मामले की तेज़ी से सुनवाई की और निर्णय लिया कि मेटा को तुरंत कार्रवाई करनी होगी।

यह मामला देश में डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग और उसके कानूनी प्रभावों पर एक महत्वपूर्ण मामला है। जैसे-जैसे डिजिटल तकनीक आगे बढ़ रही है, मॉर्फ्ड तस्वीरों और वीडियो को लेकर कानूनी चुनौतियाँ बढ़ रही हैं। दिल्ली हाई कोर्ट का यह निर्णय ऐसे मामलों में न्यायालय की दृष्टिकोण को दर्शाता है, जहाँ राष्ट्रप्रमुख की छवि और महिला के अधिकों दोनों की रक्षा की जाती है।

चीफ जस्टिस पार्टी के नेताओं सौरव दास और अभिजीत दिपके पर लगे नोटिस के बाद यह मामला आगे की सुनवाई के लिए तैयार है। न्यायालय ने दोनों व्यक्तियों से उनकी बहस और जवाब दायर करने को कहा है। मामले की आगे की सुनवाई की तारीख न्यायालय द्वारा तय की जाएगी। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

Advertisement

आपके लिए और खबरें