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वायनाड दौरे पर प्रियंका गांधी: बेकरी में कपकेक बनाया, आदिवासी स्कूल में बच्चों संग नृत्य किया; बताया- इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 12 साल की उम्र से घर पर हुई पढ़ाई

वायनाड: कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जहां एक औद्योगिक बेकिंग इकाई में जाकर केक बनाने की बारीकियां सीखीं और खुद कपकेक पर आइसिंग की, वहीं एक आदिवासी मॉडल आवासीय विद्यालय के बच्चों के साथ समय बिताया, उनके साथ पारंपरिक […]
वायनाड दौरे पर प्रियंका गांधी: बेकरी में कपकेक बनाया, आदिवासी स्कूल में बच्चों संग नृत्य किया; बताया- इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 12 साल की उम्र से घर पर हुई पढ़ाई
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वायनाड: कांग्रेस सांसद और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र वायनाड का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जहां एक औद्योगिक बेकिंग इकाई में जाकर केक बनाने की बारीकियां सीखीं और खुद कपकेक पर आइसिंग की, वहीं एक आदिवासी मॉडल आवासीय विद्यालय के बच्चों के साथ समय बिताया, उनके साथ पारंपरिक नृत्य किया और उनके सवालों के बेहद निजी और भावुक जवाब दिए। प्रियंका ने छात्रों को बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 12 साल की उम्र में उनका और भाई राहुल गांधी का स्कूल जाना बंद हो गया था और दोनों ने घर पर रहकर ही पढ़ाई पूरी की।

कांग्रेस सांसद गुरुवार सुबह वायनाड स्थित KINFRA पार्क की एक बेकिंग यूनिट पहुंचीं। वहां उन्होंने स्वच्छता मानकों का पालन करते हुए सिर पर हेयर नेट पहना और शेफ तथा कर्मचारियों की देखरेख में केक बनाने की प्रक्रिया को समझा। प्रियंका ने खुद अपने हाथों से कपकेक तैयार किए और उन पर आइसिंग (सजावटी परत) लगाई। इस दौरान यूनिट के कर्मचारियों ने उन्हें बेकिंग की तकनीकी बारीकियों, तापमान नियंत्रण और सामग्री के मिश्रण के बारे में विस्तार से जानकारी दी। प्रियंका ने पूरी दिलचस्पी के साथ प्रक्रिया को देखा और कर्मचारियों के साथ सहजता से बातचीत की।

बेकरी यूनिट के बाद प्रियंका गांधी कल्लूर, नूलपुझा स्थित राजीव गांधी मेमोरियल मॉडल रेजिडेंशियल स्कूल पहुंचीं। यह विद्यालय आदिवासी समुदाय के बच्चों के लिए संचालित होता है। प्रियंका ने यहां छात्र-छात्राओं के साथ काफी समय बिताया। उन्होंने बच्चों के साथ पारंपरिक आदिवासी नृत्य में भाग लिया, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गईं। नृत्य के बाद उन्होंने छात्रों के साथ एक संवाद सत्र में भाग लिया, जहां बच्चों ने उनसे खुलकर सवाल पूछे।

एक छात्र के सवाल पर प्रियंका ने अपने बचपन का वह पहलू साझा किया जो कम ही सार्वजनिक मंचों पर आता है। उन्होंने पूछा, “क्या आपने इंदिरा गांधी के बारे में सुना है? वह मेरी दादी थीं। हम एक ही घर में रहते थे। वहीं उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद मैं स्कूल नहीं गई।” प्रियंका ने बताया कि 1984 में दादी की हत्या के बाद सुरक्षा कारणों से उनका और राहुल गांधी का सामान्य स्कूली जीवन थम गया। दोनों भाई-बहन घर पर ही रहकर पढ़ाई करने लगे। उन्होंने कहा, “हम अकेले घर पर पढ़ते थे। दोनों ज्यादा बाहर नहीं जा सकते थे और हमारे ज्यादा दोस्त भी नहीं थे।” प्रियंका ने छात्रों से कहा कि वे आज बाहर जा पाते हैं, घूम पाते हैं और अपनी जिंदगी का आनंद ले पाते हैं, यह उनके लिए बहुत अच्छी बात है।

एक अन्य छात्र ने जब उनसे उनके रोल मॉडल (आदर्श) के बारे में पूछा, तो प्रियंका का जवाब अप्रत्याशित और भावनात्मक था। उन्होंने किसी ऐतिहासिक शख्सियत या राजनेता का नाम न लेकर उस महिला का नाम लिया जो उनके घर में घरेलू सहायिका के रूप में काम करती हैं। प्रियंका ने कहा, “मेरी रोल मॉडल वह महिला हैं, जो हमारे घर में तब से काम कर रही हैं, जब मेरे बच्चे तीन महीने के थे।” उन्होंने बताया कि वह महिला बेहद मजबूत हैं। कई मुश्किलों और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद उन्होंने दिन-रात उनके घर में काम किया है। प्रियंका के अनुसार, वह महिला उनके बच्चों की मां की तरह देखभाल करती हैं और उन्हें भरपूर प्यार देती हैं।

पढ़ाई-लिखाई के अनुभव साझा करते हुए प्रियंका ने स्वीकार किया कि सातवीं कक्षा तक वे अच्छी छात्रा थीं, लेकिन उसके बाद उनका प्रदर्शन कमजोर पड़ गया था। हालांकि, बाद में इसमें सुधार आया। पसंदीदा विषयों के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें भौतिकी (फिजिक्स), गणित (मैथ्स) और जीव विज्ञान (बायोलॉजी) पसंद थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं बायोलॉजी में अच्छी थी, लेकिन गणित में नहीं।” इस सहज स्वीकारोक्ति पर बच्चों ने तालियां बजाईं।

संवाद के दौरान प्रियंका गांधी ने वायनाड के लिए अपने एक बड़े सपने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) सरकार की प्रमुख पहलों में वायनाड में एक आदिवासी विश्वविद्यालय की स्थापना करना शामिल है। प्रियंका ने कहा, “इसका मकसद आदिवासी बच्चों को अवसर देना और उनकी संस्कृति तथा विरासत को बचाए रखना है। हमारा सपना है कि इस यूनिवर्सिटी में दुनिया में उपलब्ध सबसे अच्छे अवसर मिलें। आप आधुनिक और बेहतरीन माहौल में पढ़ें।” उन्होंने बताया कि यह एक अनोखी यूनिवर्सिटी होगी, जिसमें आदिवासी समुदायों से भी शिक्षक आएंगे। इससे छात्र अपनी परंपराओं, भाषाओं और संस्कृतियों को गहराई से समझ सकेंगे, उनका सम्मान करना और उनसे सीखना भी जानेंगे।

प्रियंका गांधी का यह दौरा उनके संसदीय क्षेत्र के प्रति उनकी सक्रियता और जमीनी जुड़ाव को दर्शाता है। एक ओर वे औद्योगिक इकाई में जाकर स्थानीय रोजगार और कौशल विकास की संभावनाओं को टटोलती दिखीं, तो दूसरी ओर आदिवासी बच्चों के बीच जाकर उनकी शिक्षा, संस्कृति और भविष्य के सपनों को आवाज दी। स्कूली बच्चों के साथ उनका संवाद न केवल उनके निजी जीवन के अनछुए पहलुओं को सामने लाया, बल्कि उन बच्चों में भी एक आत्मविश्वास जगाने का काम किया जो अक्सर मुख्यधारा की चर्चा से दूर रहते हैं।

गौरतलब है कि प्रियंका गांधी हाल ही में एक अन्य बयान को लेकर भी चर्चा में रही थीं। लोकसभा में एंटी पेपर लीक बिल पर चर्चा के दौरान उन्होंने सरकार द्वारा गठित एक समिति के सदस्यों का जिक्र करते हुए आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामकोटि को “गोमूत्र विशेषज्ञ” कहा था। इस टिप्पणी के विरोध में देशभर के 215 वर्तमान और पूर्व कुलपतियों तथा शिक्षाविदों ने उन्हें पत्र लिखकर मतभेदों के बावजूद मर्यादा बनाए रखने का आग्रह किया था। हालांकि, वायनाड का यह दौरा पूरी तरह से उनके सांसद के रूप में क्षेत्रीय दायित्वों और जनसंपर्क पर केंद्रित रहा।

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