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Tue, Oct 13, 2026Updated 10:25 AM IST
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SIR के खिलाफ विपक्ष की याचिका में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने गिनाईं 14 खामियां, ₹220 कम कोर्ट फीस और मल्लिकार्जुन खड़गे का धुंधला आईडी कार्ड भी शामिल

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नई दिल्ली। वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने और कथित गड़बड़ियों के आरोपों को लेकर दायर की गई विपक्षी नेताओं की याचिका में सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने 14 खामियां पाई हैं। रजिस्ट्री की ओर से बताई गई इन कमियों में कोर्ट फीस 220 रुपये कम जमा करने से लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का धुंधला आईडी कार्ड लगाना जैसे तकनीकी बिंदु शामिल हैं। इस याचिका को राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव समेत कुल 11 विपक्षी नेताओं की तरफ से दायर किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री की जांच में सामने आया है कि विपक्षी नेताओं द्वारा प्रस्तुत की गई इस याचिका में 10 से ज्यादा नहीं, बल्कि कुल 14 तकनीकी और प्रक्रियागत खामियां मौजूद हैं। रजिस्ट्री ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर दर्ज किया है कि याचिका के साथ जो कोर्ट फीस जमा कराई गई थी, वह निर्धारित शुल्क से 220 रुपये कम थी। सर्वोच्च न्यायालय में किसी भी याचिका को स्वीकार किए जाने के लिए नियमानुसार सटीक कोर्ट फीस का भुगतान अनिवार्य होता है। ऐसे में शुल्क में यह कमी याचिका की स्वीकार्यता पर सीधे तौर पर प्रश्नचिह्न लगाती है।

इसके अलावा, रजिस्ट्री ने एक अन्य महत्वपूर्ण खामी की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए बताया कि याचिका के साथ संलग्न दस्तावेजों में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का पहचान पत्र (आईडी कार्ड) पूरी तरह से धुंधला था। सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार, याचिकाकर्ताओं की पहचान स्पष्ट रूप से स्थापित होनी चाहिए और इसके लिए प्रस्तुत किए जाने वाले सभी दस्तावेज साफ और पठनीय होने चाहिए। धुंधले आईडी कार्ड को प्रक्रियात्मक मानकों का उल्लंघन माना गया है।

गौरतलब है कि यह याचिका देश भर में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के दौरान उठे विवादों और गंभीर आरोपों के मद्देनजर दायर की गई थी। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण और सूचना के हटा दिए गए हैं। विपक्ष का दावा है कि इस प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां हुई हैं, जिससे लाखों मतदाताओं के मताधिकार प्रभावित होने का खतरा उत्पन्न हो गया है। इन आरोपों को आधार बनाकर विपक्ष ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था ताकि इस मामले में न्यायिक हस्तक्षेप सुनिश्चित किया जा सके।

इस याचिका को दायर करने वालों में देश के प्रमुख विपक्षी दलों के शीर्ष नेता शामिल हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राजद नेता तेजस्वी यादव सहित कुल 11 विपक्षी नेताओं ने मिलकर इस जनहित और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े अत्यंत संवेदनशील मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया था। विपक्षी नेताओं की ओर से यह प्रयास किया गया था कि मतदाता सूची में कथित हेराफेरी और नाम हटाए जाने के मामलों की स्वतंत्र जांच हो और आगामी चुनावी प्रक्रियाओं से पहले इसे दुरुस्त किया जाए।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा 14 खामियां गिनाए जाने के बाद अब यह देखना होगा कि याचिकाकर्ताओं की ओर से इन तकनीकी कमियों को किस प्रकार और कब तक दूर किया जाता है। सर्वोच्च न्यायालय की प्रक्रिया के मुताबिक, जब रजिस्ट्री किसी याचिका में खामियां पाती है, तो वह याचिकाकर्ताओं को उन्हें सुधारने के लिए एक निश्चित समय देती है। यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर इन कमियों को दूर कर दिया जाता है, तो याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा सकता है। लेकिन अगर याचिकाकर्ता इन खामियों को ठीक करने में असफल रहते हैं, तो याचिका को खारिज भी किया जा सकता है।

मतदाता सूची का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन, सटीक और त्रुटिरहित बनाने के लिए चलाया जाने वाला एक विशेष अभियान है। इस प्रक्रिया के तहत मृत व्यक्तों, स्थानांतरित हो चुके नागरिकों और फर्जी मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाते हैं, जबकि नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार की SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है और जानबूझकर कुछ विशेष वर्गों या क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

वहीं, इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने केवल प्रक्रियागत और तकनीकी बिंदुओं पर ही अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। रजिस्ट्री ने याचिका में उठाए गए मूल आरोपों यानी वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और नाम हटाए जाने के मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। यह स्पष्ट रूप से एक प्रशासनिक प्रक्रिया है जो हर याचिका के दायर होने पर लागू होती है।

देश की राजनीति में मतदाता सूची की शुद्धता हमेशा से एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय रहा है। 11 प्रमुख विपक्षी नेताओं द्वारा एक साथ मिलकर इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट का रुख करना इस बात का संकेत है कि विपक्ष इस मामले को गंभीरता से ले रहा है। हालांकि, रजिस्ट्री द्वारा बताई गईं 14 खामियां, जिनमें 220 रुपये की कम कोर्ट फीस और मल्लिकार्जुन खड़गे का धुंधला आईडी कार्ड शामिल है, विपक्षी नेताओं के लिए एक प्रक्रियात्मक चुनौती जरूर खड़ी करती हैं। वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में दी गई जानकारी उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है और आगे की न्यायिक कार्यवाही पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।