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Tue, Oct 13, 2026Updated 10:18 AM IST
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ट्रम्प ने रूस से डीजल आयात के फैसले का किया बचाव, कहा- अमेरिका को हो रहा फायदा; EU पर भी साधा निशाना

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वाशिंगटन। वंदे भारत न्यूज़। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रूस से डीजल खरीदने के अपने प्रशासन के फैसले का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यह सौदा पूरी तरह से अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है और इससे देश को लाभ हो रहा है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए यूरोपीय संघ (EU) की ऊर्जा खरीद नीतियों पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि यूरोपीय संघ ने भी रूस से लगभग 250 अरब डॉलर मूल्य की ऊर्जा खरीदी है। इसके साथ ही, ट्रम्प ने अमेरिकी मीडिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मीडिया जानबूझकर यूरोपीय संघ के इस विशाल ऊर्जा खर्च को नजरअंदाज कर रहा है और केवल अमेरिका के कारोबार पर ही सवाल उठाए जा रहे हैं।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब वैश्विक ऊर्जा बाजारों में रूस के तेल और डीजल की खरीद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बहस जारी है। पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर विभिन्न प्रतिबंधों के बीच, ट्रम्प प्रशासन का रूसी डीजल आयात का बचाव करना एक महत्वपूर्ण नीतिगत रुख के रूप में देखा जा रहा है। ट्रम्प ने अपने संबोधन में यह रेखांकित करने का प्रयास किया कि अमेरिका द्वारा लिया गया यह कदम कोई अपवाद नहीं है, बल्कि अन्य बड़े वैश्विक ब्लॉक भी रूसी ऊर्जा संसाधनों पर निर्भर हैं और भारी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

ट्रम्प ने यूरोपीय संघ की ऊर्जा खरीद का जिक्र करते हुए जो आंकड़ा पेश किया, वह बेहद चौंकाने वाला है। उन्होंने बताया कि यूरोपीय संघ ने रूस से कुल 250 अरब डॉलर यानी 250 बिलियन डॉलर की ऊर्जा खरीदी है। ट्रम्प के अनुसार, इतनी विशाल राशि खर्च करने के बावजूद यूरोपीय संघ की इस खरीद पर वैसी चर्चा नहीं होती, जैसी अमेरिका के डीजल आयात को लेकर की जा रही है। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड करार देते हुए कहा कि अमेरिका के हितों की रक्षा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि रूस से डीजल खरीदने से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और उपभोक्ताओं को फायदा पहुंच रहा है, तो इस सौदे का विरोध करना तर्कसंगत नहीं होगा।

इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति ने घरेलू मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। ट्रम्प ने सीधे तौर पर कहा कि अमेरिकी मीडिया यूरोपीय संघ द्वारा किए गए 250 अरब डॉलर के ऊर्जा खर्च को पूरी तरह से नजरअंदाज कर रहा है। उनका आरोप है कि मीडिया का एक वर्ग केवल अमेरिकी प्रशासन के फैसलों को निशाना बनाने में लगा हुआ है, जबकि वैश्विक स्तर पर हो रही वास्तविक खरीद-फरोख्त के आंकड़ों को जनता के सामने सही ढंग से पेश नहीं किया जा रहा है। ट्रम्प ने मीडिया से अपेक्षा की है कि वे तथ्यों को उनके सही संदर्भ में रिपोर्ट करें और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जटिलताओं को समझें।

यह पहली बार नहीं है जब राष्ट्रपति ट्रम्प ने ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार के मुद्दों पर अमेरिका फर्स्ट की नीति का हवाला दिया हो। उनके कार्यकाल में ऊर्जा स्वतंत्रता और किफायती ईंधन की उपलब्धता हमेशा से मुख्य एजेंडा रहे हैं। रूस से डीजल के आयात का बचाव करते हुए, ट्रम्प ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि अमेरिकी सरकार किसी भी देश से व्यापार करने में संकोच नहीं करेगी, बशर्ते उससे अमेरिकी जनता और अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिल रहा हो। डीजल की कीमतों को नियंत्रित रखना और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाए रखना अमेरिकी परिवहन और औद्योगिक क्षेत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।

अंतरराष्ट्रीय संबंधों के जानकारों की मानें तो ट्रम्प का यह बयान अमेरिका और यूरोप के बीच ऊर्जा नीतियों को लेकर मौजूद मतभेदों को भी उजागर करता है। यूरोपीय संघ ने रूसी ऊर्जा पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन ट्रम्प द्वारा दिए गए 250 अरब डॉलर के आंकड़े यह दर्शाते हैं कि वास्तविकता में यूरोप का रूसी ऊर्जा से मोहभंग पूरी तरह से नहीं हुआ है। यह आंकड़ा यूरोपीय संघ की आधिकारिक ऊर्जा रणनीति और जमीनी स्तर पर हो रहे व्यापार के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।

उल्लेखनीय है कि रूस दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उत्पादकों में से एक है और उसके डीजल तथा कच्चे तेल की वैश्विक बाजार में हमेशा मांग रहती है। अमेरिका जैसे बड़े उपभोक्ता देश के लिए ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण करना एक व्यावहारिक जरूरत है। ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि रूसी डीजल की गुणवत्ता और कीमत अमेरिकी बाजार की मांगों के अनुकूल है, इसलिए इस आयात को रोका जाना अमेरिकी हितों के खिलाफ होगा।

कुल मिलाकर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का यह बयान अमेरिकी ऊर्जा नीति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और मीडिया की रिपोर्टिंग पर एक साथ कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने न केवल अपने प्रशासन के फैसले का दृढ़ता से बचाव किया है, बल्कि यूरोपीय संघ के ऊर्जा खर्च और अमेरिकी मीडिया के रवैये को भी कठघरे में खड़ा किया है। अब यह देखना होगा कि ट्रम्प के इन दावों और आंकड़ों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय और घरेलू विपक्ष कैसी प्रतिक्रिया देता है। वंदे भारत न्यूज़ की ओर से इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है ताकि पाठकों तक बिना किसी लाग-लपेट के सटीक जानकारी पहुंच सके।