Bihar NEW CM BJP Strategy; Nitish Kumar Rajya Sabha Plan

14 Min Read


नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के ऐलान के साथ ही बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना तय है। भले ही नतीजों के लगभग चार महीने बाद ऐसा होने जा रहा है, लेकिन इसकी स्क्रिप्ट बीजेपी ने चुनाव से पहले ही लिख रखी थी। सीटों के बंटवारे से लेकर नीतीश के

.

4 पॉइंट में जानेंगे बीजेपी ने कैसे लिखी स्क्रिप्ट… लेकिन उससे पहले बैकग्राउंड समझ लेते हैं…

5 मार्च को जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा का नॉमिनेशन फाइल किया, तब अमित शाह, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय जैसे बीजेपी के कद्दावर नेता मौजूद रहे।

5 मार्च को जब नीतीश कुमार ने राज्यसभा का नॉमिनेशन फाइल किया, तब अमित शाह, सम्राट चौधरी, विजय सिन्हा, नित्यानंद राय जैसे बीजेपी के कद्दावर नेता मौजूद रहे।

2020 बिहार चुनाव में मुकाबला दो बड़े गठबंधनों के बीच था। एक तरफ बीजेपी, जेडीयू, मांझी की हम और साहनी की वीआईपी पार्टी वाला एनडीए और दूसरी तरफ आरजेडी, कांग्रेस और लेफ्ट का महागठबंधन। ढाई साल पहले ही नीतीश पाला बदलकर वापस बीजेपी के साथ आए थे। एनडीए की तरफ से सीएम का चेहरा भी वहीं थे।

पर पर्दे के पीछे से बीजेपी अपना सीएम बनाने की जुगत में थी। उसने जदयू के बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की, लेकिन नीतीश इसके लिए तैयार नहीं हुए। नीतीश को पता था कि बीजेपी ज्यादा सीटें जीत गई, तो सीएम की कुर्सी पर दावा ठोक देगी। इसलिए वे खुद बड़े भाई की भूमिका में रहना चाहते थे।

चिराग की पार्टी एलजेपी तब एनडीए में शामिल होना चाहती थी। खुद को मोदी का हनुमान कहने वाले चिराग ने एलजेपी के लिए 40 सीटों की मांग कर दी। नीतीश इसके लिए भी तैयार नहीं हुए। उन्होंने साफ कह दिया कि बीजेपी, एलजेपी को गठबंधन में शामिल करना चाहती है, तो अपने कोटे से सीटें दे दें। बीजेपी ने इनकार कर दिया।

ऐसे में एलजेपी अकेले मैदान में उतरी और सोची समझी रणनीति के तहत नीतीश की सभी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार दिए। इनमें से ज्यादातर उम्मीदवार बीजेपी छोड़कर आए थे। कई तो सीधे तौर पर संघ से ताल्लुक रखने वाले थे।

तब सियासी गलियारों में चर्चा छिड़ी कि नीतीश को कमजोर करने के लिए एलजेपी, बीजेपी की बी टीम बनकर चुनाव लड़ रही है। चिराग ने भी कुछ ऐसा ही कैंपेन किया। जब नतीजे आए तो 115 सीटों पर लड़ने वाली जदयू 43 सीटों पर सिमट गई। 34 सीटों पर चिराग की पार्टी ने वोट काटकर उसे हरवा दिया। जबकि बीजेपी ने 110 सीटों पर लड़कर 74 सीटें जीत ली।

2020 में चुनावी नतीजे आने के बाद चिराग पासवान ने कहा था कि हम JDU को कमजोर करना चाहते थे और हम इसमें सफल रहे।

2020 में चुनावी नतीजे आने के बाद चिराग पासवान ने कहा था कि हम JDU को कमजोर करना चाहते थे और हम इसमें सफल रहे।

74 सीटें जीतकर बीजेपी NDA में सबसे बड़ी पार्टी बन गई। HAM और VIP को मिलाकर वह 82 तक पहुंच गई, लेकिन नीतीश के बिना बहुमत के लिए जरूरी 122 से काफी पीछे रह गई। यानी उसे सत्ता के लिए नीतीश का साथ जरूरी हो गया।

कम सीट जीतने के बाद भी नीतीश ने ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। तब कहा गया कि कुछ समय बाद बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। बीजेपी की तरफ से ऐसी कोशिशें भी हुईं। पर दो साल बाद ही नीतीश ने पाला बदलकर फिर से राजद के साथ सरकार बना ली। नीतीश ने आरोप भी लगाया कि उनकी पार्टी तोड़ने की साजिश रची जा रही थी।

दो साल बाद यानी 2024 में जदयू फिर से एनडीए में लौटी, लेकिन इस बार भी बीजेपी अपना सीएम नहीं बना पाई। मुख्यमंत्री नीतीश ही बने। क्योंकि मैजिक फिगर नीतीश के साथ ही था।

अब तक तो सियासी गलियारों में यह मान लिया गया कि नीतीश जब तक चाहेंगे वे सीएम रहेंगे और जिसके साथ जब जी करे सरकार बना लेंगे। लगातार चार बार पलटी मारकर उन्होंने यह बात बहुत हद तक साबित भी कर दी थी।

नीतीश के लिए बीजेपी ने 2025 के चुनाव में 4 खास स्ट्रैटजी अपनाई…

1. बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ना

2019 के लोकसभा में बीजेपी और जदयू बराबर-बराबर सीटों पर लड़ीं, लेकिन 2020 के विधानसभा में नीतीश ही बिग ब्रदर रहे। 2025 के चुनाव में बीजेपी ने साफ कर दिया था कि वह बराबर सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी। इसलिए ही बीजेपी ने आखिर-आखिर तक चिराग फैक्टर को मौजू बनाए रखा। आखिरकार जदयू और बीजेपी 101-101 सीटों पर लड़ने के लिए राजी हो गए।

वजह: बराबर सीटों पर लड़कर बड़ी पार्टी बनना। नतीजे भी बीजेपी के फेवर में आए और वो सबसे बड़ी पार्टी बनी।

2. सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें देना

बीजेपी समझ चुकी थी कि नीतीश इस बार चिराग को अलग चुनाव लड़ाने की गलती नहीं करेंगे। ऐसे में चिराग ने फिर से 40 सीटों की मांग कर दी। शुरुआत में तो जदयू ना नुकर करती रही, लेकिन फिर वो राजी हो गई। इस तरह 43 सीटें सहयोगियों के खाते में चली गईं। इनमें से 29 सीटें चिराग की पार्टी को मिलीं। NDA के भीतर बिहार में पहली बार गैर बीजेपी-जदयू वाले दलों को 43 सीटें मिलीं।

वजह: बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- ‘बीजेपी चाहती थी कि जदयू कम से कम सीटों पर लड़े। ऐसा तभी संभव था जब एनडीए के भीतर सहयोगियों को ज्यादा से ज्यादा सीटें मिले। और हुआ भी वैसा ही। चिराग को 29, मांझी-कुशवाहा को 6-6 सीटें मिलीं। यानी 43 सीट। इस तरह एनडीए में बिना नीतीश आंकड़ा 143 पहुंच गया। बीजेपी यहीं चाहती थी कि वो नीतीश के बिना वह बहुमत के आंकड़े के करीब पहुंच सके।’

समस्तीपुर की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, संजय झा, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान मौजूद थे।

समस्तीपुर की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम नीतीश कुमार, उपेंद्र कुशवाहा, संजय झा, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और चिराग पासवान मौजूद थे।

3. चुनाव से पहले नीतीश के नाम पर भ्रम फैलाना

ये 5 बयान पढ़िए…

  • जून 2025: एक अखबार को इंटरव्यू देते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, ‘चुनाव बाद NDA के विधायक दल की बैठक होगी, उसमें तय हो जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।’
  • 16 अक्टूबर 2025: एक टीवी इंटरव्यू में अमित शाह ने फिर कहा- ‘चुनाव बाद NDA के विधायक दल की बैठक होगी, उसमें तय हो जाएगा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा।’
  • 24 अक्टूबर 2025: पीएम मोदी ने समस्तीपुर में पहली चुनावी सभा की। 45 मिनट के भाषण में उन्होंने हर बार NDA सरकार बनाने की बातें कही, लेकिन एक बार भी उन्होंने फिर से नीतीश सरकार का नारा नहीं दिया। जबकि 2020 में उन्होंने लगभग हर मंच से नीतीश सरकार बनाने की अपील की थी।
  • 1 नंवबर 2025: एक इंटरव्यू में शाह ने कहा- ‘इसमें कोई कन्फ्यूजन नहीं है। मैं फिर से एक बार स्पष्ट करता हूं कि नीतीश ही मुख्यमंत्री हैं और चुनाव जीतने के बाद भी वही रहेंगे।’
  • 8 नवंबर 2025: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक इंटरव्यू में कहा- ‘हम नीतीश के नेतृत्व में चुनाव लड़ रहे हैं। जाहिर है चुनाव बाद मुख्यमंत्री वही होंगे।’

वजह: अमरनाथ तिवारी के मुताबिक बीजेपी चाहती थी कि पूरा चुनाव इस बात पर हो कि नीतीश सीएम होंगे या नहीं। राजद और कांग्रेस ने बार-बार कहा कि बीजेपी, नीतीश को सीएम नहीं बनाएगी। इन बयानों से जनता के बीच ये मैसेज चला गया कि नीतीश कमजोर हुए तो बीजेपी अपना सीएम बनाएगी। ऐसे में नीतीश के वोटर और पिछड़े तबके ने तय कर लिया कि नीतीश को इतना मजबूत बना दें कि बीजेपी उन्हें हटा नहीं पाए। कई लोगों ने नीतीश के आखिरी चुनाव समझकर भी उन्हें वोट किया। नतीजों में भी यह साफ दिखा। जदयू ने 101 में से 85 सीटें जीत ली। इसका सीधा नुकसान राजद को हुआ।

4. जदयू की सीटों पर मजबूती से प्रचार करना

प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार चुनाव के दौरान कुल 16 रैलियां कीं। कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 42 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। नतीजे आए तो 32 सीटें जदयू को मिलीं। इनमें से ज्यादातर वो सीटें थीं, जो 2020 में जदयू हार गई थी।

इसी तरह गृहमंत्री अमित शाह ने 28 रैलियों से 141 सीटें कवर कीं। इनमें से 58 सीटों पर जदयू लड़ रही थी। 42 पर उसे जीत भी मिल गई।

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने 25 रैलियों से कुल 122 सीटें कवर कीं। इनमें से 47 सीटें जदयू के खाते की थीं। 40 पर उसे जीत भी मिल गई।

यानी पीएम मोदी, शाह और योगी ने जहां रैली की वहां कुल 86 सीटों पर जदयू चुनाव लड़ रही थी। इनमें से 74 पर उसे जीत मिली। यानी स्ट्राइक रेट 86% रहा।

वजह: करीब 65% सीटों पर जदयू की सीधी लड़ाई आरजेडी से ही थी। बीजेपी चाहती थी कि आमने-सामने की टक्कर की ज्यादातर सीटें जदयू जीत ले और राजद कमजोर पड़ जाए। हुआ भी ऐसा ही।

बीजेपी के मनमुताबिक नतीजे आए, नीतीश का पाला बदलना मुश्किल

नतीजे आए तो बीजेपी को 89, जदयू को 85, चिराग की पार्टी को 19, हम को 5 और कुशवाहा की पार्टी आरएलएम को 4 सीटें मिलीं। इस तरह NDA का आंकड़ा 202 पहुंच गया। जबकि आरजेडी को 25, कांग्रेस को 6 और बाकी सहयोगियों को 4 सीटें मिलीं। यानी महागठबंधन को 35 सीटें मिलीं। इस तरह एकतरफा सीटें NDA के खाते में आ गईं और राजद बेहद कमजोर हो गई। इसे ऐसे समझिए…

नीतीश के बिना बहुमत के करीब पहुंच गई NDA

  • नीतीश के बिना चार पार्टियों बीजेपी, चिराग, मांझी और कुशवाहा के विधायकों को जोड़ दें तो (89+19+5+4) आंकड़ा 117 तक पहुंचता है। बहुमत 122 से सिर्फ 5 कम।
  • एक्सपर्ट्स का मानना है बीजेपी कांग्रेस के 6, लेफ्ट के 3 और बसपा के 1 विधायकों को मिलाकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लेगी। कई राज्यों में बीजेपी ऐसा कर भी चुकी है।
14 नवंबर 2025 को चुनावी नतीजे आने पर पटना के JDU ऑफिस में पीएम मोदी और सीएम नीतीश की फोटो लिए JDU सपोर्टर।

14 नवंबर 2025 को चुनावी नतीजे आने पर पटना के JDU ऑफिस में पीएम मोदी और सीएम नीतीश की फोटो लिए JDU सपोर्टर।

नीतीश राजद के साथ गए तो भी बहुमत से दूर

अगर नीतीश पाला बदलकर राजद के साथ जाते, तो भी बहुमत के आंकड़े से दूर रह जाते। गणित को ऐसा ही है। नीतीश की जदयू (85)+ राजद (25)+ कांग्रेस (6) + लेफ्ट+ (4)= 120 यानी बहुमत के लिए 122 से 2 कम।

बीजेपी ने अपना सीएम बनाने के लिए तीन महीने इंतजार क्यों किया?

चुनावी नतीजे बीजेपी के फेवर में थे। वह तब भी अपना मुख्यमंत्री बना सकती थी, लेकिन उसने नीतीश को सीएम बनाया। आखिर क्यों…?

बिहार के सीनियर जर्नलिस्ट अमरनाथ तिवारी बताते हैं- बीजेपी, नीतीश या विपक्ष को विक्टिम कार्ड खेलने का मौका नहीं देना चाहती थी। क्योंकि चुनाव नीतीश के नेतृत्व में लड़ा गया था और बीजेपी अपना सीएम बनाती तो पिछड़े वर्ग के वोटर नाराज हो सकते थे। नीतीश के कोर वोटर्स यानी कोईरी-कुर्मी बीजेपी से हमेशा के लिए कट सकते थे। ऐसे में बीजेपी चाहती थी कि नीतीश खुद आगे आकर सत्ता सौंपे। राज्यसभा के चुनाव उसके लिए सबसे मुफीद रहा। बीजेपी के प्लान के मुताबिक नीतीश ने राज्यसभा के लिए नामांकन किया और खुद ही सत्ता छोड़ने का ऐलान कर दिया।

————-

बिहार से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बिहार में बीजेपी का सीएम बनना ही था: 6 राज्यों में बीजेपी की राजनीति से समझिए, आखिर नीतीश को क्यों जाना पड़ा राज्यसभा

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक 105 दिन बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा का पर्चा भर दिया। मतलब वे सीएम नहीं रहेंगे। अब बिहार में पहली बार बीजेपी का सीएम बन सकता है। पूरी खबर पढ़िए…



Source link

Share This Article
Leave a Comment