Bengal Babri Masjid Political Row; TMC MLA Humayun Kabir BJP Muslim

12 Min Read


पश्चिम बंगाल में मुर्शिदाबाद का बेलडांगा। यहीं बाबरी मस्जिद बन रही है। अभी चारदीवारी की नींव भरी जा रही है। 50 से ज्यादा मजदूर काम में जुटे हैं। पास ही असगरुल की चाय की दुकान हैं। मस्जिद की ओर जाते वक्त मेन रोड पर सबसे पहले यही दुकान मिलती है, इसलिए

.

मस्जिद की वजह से असगरुल का धंधा जरूर चमक गया, लेकिन वे फिक्रमंद हैं। कहते हैं, ‘मंदिर-मस्जिद दोनों जरूरी हैं। मैं मजहब को मानता हूं। मस्जिद चाहिए, लेकिन बेटे के लिए स्कूल भी तो हो। वो छठवीं में पढ़ता है, पर 50 तक गिनती नहीं आती। सिर्फ थाल बजाने और खाने के लिए बच्चे को स्कूल क्यों भेजूं।’

असगरुल के साथ चाय की दुकान पर उनका बेटा भी काम में हाथ बंटाता है।

असगरुल के साथ चाय की दुकान पर उनका बेटा भी काम में हाथ बंटाता है।

पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी। 6 मुस्लिम बहुल जिलों मुर्शिदाबाद, मालदा, नॉर्थ 24 परगना, साउथ 24 परगना, नादिया और उत्तर दिनाजपुर में करीब 124 सीटें हैं। TMC छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया, तो उनकी इस कोशिश को मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिश माना गया। हुमायूं फिलहाल BJP से 1000 करोड़ की डील वाले वीडियो पर सफाई दे रहे हैं। इधर बाबरी मस्जिद का काम चल रहा है।

इस मस्जिद की अहमियत, मायने और चुनाव में असर समझने के लिए हमने 5 किरदार चुने।

1. असगरुल शेख, जिन्हें मस्जिद के साथ बेटे के लिए अच्छा स्कूल चाहिए। 2. बदरुद्दीन, जो मुंबई छोड़कर घर आ गए और मस्जिद के पास जूस की दुकान खोल ली। 3. रफीकुल अंसारी, जो झारखंड से 200 किमी दूर बाबरी मस्जिद देखने आए थे। 4. हुमायूं शेख, जिन्हें लगता है कि हुमायूं कबीर अपनी राजनीति के लिए मस्जिद बनवा रहे हैं। 5. हुमायूं कबीर, जो कहते हैं कि BJP या TMC कितना भी रोके, मस्जिद बनकर रहेगी।

पढ़िए हर किरदार की कहानी… असगरुल के लिए बंगाल में कुछ नहीं बदला

असगरुल शेख की दुकान पर चाय पीते हुए बातचीत शुरू हुई। तभी उनका बेटा आया। मैंने पूछा- स्कूल जाते हो? जवाब असगरुल ने दिया। पास में सरकारी स्कूल है, वहीं पढ़ता है।

वे चाय बनाते हुए बताते हैं, ‘मैं छठवीं तक पढ़ा हूं। बेटा भी अब पढ़ाई छोड़ देगा। दोनों बाप-बेटे छठवीं तक ही पढ़े। 40-50 साल में बंगाल में कुछ नहीं बदला। मैं दुकान चला लेता हूं, ये तो हिसाब भी नहीं कर सकता। मजदूरी ही करेगा। यही हमारा सच है।’

असगरुल बताते हैं कि बेटा बांग्ला में अपना नाम लिख लेता है, लेकिन मेरा नहीं लिख पाता।

असगरुल बताते हैं कि बेटा बांग्ला में अपना नाम लिख लेता है, लेकिन मेरा नहीं लिख पाता।

असगरुल आगे कहते हैं, ‘स्कूल में 10 टीचर होने चाहिए, सिर्फ 2-3 हैं। सरकार अपनी जेब भर रही है। विधायक अपना फायदा देख रहे हैं। गरीब की कौन सुनता है।’

उनके इस सवाल का जवाब नहीं था। हम यहां से आगे बढ़ गए। थोड़ी दूर बाबरी मस्जिद का ऑफिस है। इसकी छत पर तिरंगा लहरा रहा है। बाहर चंदे के लिए क्यूआर कोड लगे हैं। एक बोर्ड पर लिखा है, ‘द होली बाबरी मस्जिद’।

इस पर अयोध्या वाली बाबरी मस्जिद की फोटो है। हमने फोटो लेनी चाही, तो एक शख्स ने रोक दिया। बोला कि यहां फोटो-वीडियो नहीं ले सकते। लोग वीडियो बनाते हैं, फिर गलत इस्तेमाल करते हैं।

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के ऑफिस की तस्वीर।

मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद के ऑफिस की तस्वीर।

बाबरी मस्जिद का ऑफिस खाली था, इसलिए हम मस्जिद साइट के पास बने मार्केट की ओर बढ़ गए। रास्ते में कई छोटी-छोटी दुकानें हैं। आसपास मेले जैसा माहौल है। बाबरी मस्जिद की फोटो वाले कपड़े और कप बिक रहे हैं।

यहां रास्ते में ही कपड़े की एक दुकान पर टी-शर्ट टंगी दिखीं, जिन पर इंग्लिश और बांग्ला में लिखा है- आई लव बाबरी मस्जिद।

यहां रास्ते में ही कपड़े की एक दुकान पर टी-शर्ट टंगी दिखीं, जिन पर इंग्लिश और बांग्ला में लिखा है- आई लव बाबरी मस्जिद।

बदरुद्दीन ने मस्जिद के बाहर दुकान खाेली, बोले- मस्जिद और वोट दोनों अलग

बदरुद्दीन पहले मुंबई में काम करते थे। पता चला कि बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनने वाली है, इसलिए घर लौट आए। तिरपाल और बांस-बल्ली से दुकान बनाई और जूस बेचने लगे। हमने पूछा मस्जिद से क्या फायदा मिल रहा है, क्या इसके नाम पर वोट भी देंगे।

बदरुद्दीन फौरन जवाब देते हैं, ‘मस्जिद अलग है, चुनाव अलग। मस्जिद में लोग इबादत के लिए आ रहे हैं। हिंदू और मुस्लिम दोनों दान दे रहे हैं। इसके बनने से हजारों लोगों को रोजी-रोटी मिलेगी। मैं खुद मुंबई छोड़कर गांव लौट आया हूं। एक महीने पहले ही ये दुकान खोली है।’

यूपी, बिहार, असम से मस्जिद देखने आ रहे लोग, रफीकुल 200 किमी बाइक से आए

मस्जिद की ओर बढ़ते हुए बाइक पर बैठे रफीकुल अंसारी मिले। वे झारखंड के दुमका के रहने वाले हैं। रफीकुल बताते हैं, ‘200 किमी बाइक चलाकर आया हूं। सुना था कि बाबरी मस्जिद बन रही है। इसका बनना जरूरी भी है।’

यहीं असम से आए कुछ लड़के भी थे। गन्ने का जूस बेच रहे एक दुकानदार ने बताया कि यूपी, बिहार, झारखंड, असम और दूसरे राज्यों से लोग मस्जिद देखने आ रहे हैं। बिजनेस बढ़ रहा है। यही फायदेमंद है, बाकी वोट तो मर्जी से ही देंगे।

हुमायूं कबीर से नाराजगी, हुमायूं शेख बोले- अपने फायदे के लिए मस्जिद बनवा रहे

4 एकड़ में बन रही बाबरी मस्जिद पर 69 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इसे वेस्ट बंगाल इस्लामिक फाउंडेशन ऑफ इंडिया कमेटी बनवा रही है। हुमायूं कबीर इसी ट्रस्ट के फाउंडर थे। चुनाव लड़ने की वजह से ट्रस्ट छोड़ दिया। उनका एक वीडियो वायरल है, जिसमें वे BJP से 1 हजार करोड़ की डील करते दिख रहे हैं।

बेलडांगा में ढाबा चलाने वाले अब्दुल मन्नफ मलिक कहते हैं,

QuoteImage

मस्जिद का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। इसे बनाने में हिंदू भाई सहयोग कर रहे हैं। हुमायूं कबीर तो बनवा ही रहे हैं। वीडियो की सारी बातें झूठी हैं।

QuoteImage

वे कहते हैं कि हुमायूं कबीर ने मस्जिद की नींव रखी है, तभी से ममता बनर्जी उनके पीछे पड़ी हैं। TMC अब की हार रही है, इसलिए इस तरह की बातें फैला रहे हैं।

बेलडांगा से करीब 100 किमी दूर शमशेरगंज के लोगों के ख्याल अलग हैं। फोटोकॉपी की दुकान चलाने वाले हुमायूं शेख कहते हैं, ‘मैं हुमायूं कबीर को मुसलमानों का नेता नहीं मानता। उन्होंने भले बाबरी मस्जिद की नींव रखी हो, लेकिन ये सब राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। वे वीडियो में डील करते साफ दिख रहे हैं। भले ही इसे AI वीडियो बताएं, लेकिन ऐसा कुछ नहीं है।’

वहीं, मोहम्मद साबिर कहते हैं कि हुमायूं कबीर तो BJP का आदमी है। मुसलमानों को ये बात थोड़ी देर से समझ आई। मुझे पहले से उनकी हरकतों पर शक था। पहले मुसलमानों के बीच उनके लिए थोड़ा बहुत प्यार था। वीडियो आने के बाद वो भी खत्म हो गया।

इस वायरल वीडियो में हुमायूं कबीर BJP नेताओं के साथ एक हजार करोड़ रुपए की डील के बारे में बता रहे थे।

इस वायरल वीडियो में हुमायूं कबीर BJP नेताओं के साथ एक हजार करोड़ रुपए की डील के बारे में बता रहे थे।

हुमायूं कबीर बोले- मुसलमानों से गद्दारी नहीं करूंगा, बाबरी बनकर रहेगी

हुमायूं कबीर ने माना है कि वायरल वीडियो उनका ही है, लेकिन आवाज AI से बदली गई है। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि मैं मुसलमानों के साथ कभी गद्दारी नहीं करूंगा। मेरे लिए पहले कौम है। बाबरी तो बनेगी, इसे न BJP रोक पाएगी और न TMC। मुर्शिदाबाद में 66% मुस्लिम आबादी है, इसलिए यहां मस्जिद बनवा रहा हूं।

अबीरुल के लिए बाबरी से बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट से नाम कटना

मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज में बाबरी मस्जिद से बड़ा मुद्दा वोटर लिस्ट से नाम कटना है। यहां रहने वाले अबीरूल के परिवार में 8 वोटर थे, इनमें 6 के नाम कट गए। इनमें अबीरुल भी शामिल हैं। वे कहते हैं, ‘हमें लग रहा है कि बंगाल से बाहर काम करने गए, तो हमें बांग्लादेशी न समझ लिया जाए। इसलिए काम के लिए बाहर नहीं जा रहे हैं। हम लोगों के लिए TMC अच्छा काम कर रही है।’

वहीं रफीक कहते हैं कि मेरा नाम भी कट गया है। यहां TMC जीत सकती है, इसलिए BJP वालों ने जानबूझकर ऐसा किया है। इसके बाद भी BJP जीत नहीं पाएगी।’

24 परगना के असमताली मुल्ला BJP के सपोर्ट में हैं। वे कहते हैं कि पहले हम TMC को वोट देते थे। अब ममता दीदी सबसे ज्यादा घोटाले कर रही हैं। TMC वाले कहते हैं कि BJP सरकार बनाएगी, तो मुस्लिमों को भगा देगी। हम ही BJP में आ जाएंगे, तो फिर कोई क्यों भगाएगा।

एक्सपर्ट बोले: बाबरी मस्जिद का असर सिर्फ हुमायूं कबीर की सीट तक

क्या हुमायूं कबीर को मस्जिद बनवाने का फायदा पूरे बंगाल में मिलेगा? जवाब में पॉलिटिकल एक्सपर्ट सुमन भट्टाचार्य कहते हैं, ‘नहीं। हुमायूं कबीर का असर सिर्फ बेलडांगा में है। मुसलमानों को समझ है कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद का दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। इसका ये मतलब नहीं कि मुस्लिम वोटर TMC से ज्यादा खुश हैं। बस वे उससे अलग नहीं हो पाते। TMC के बाद उनकी पसंद कांग्रेस है, लेकिन वो ज्यादा एक्टिव नहीं है।’

आखिर में हम बेलडांगा से करीब 20 किमी दूर बहरामपुर पहुंचे। हुमायूं कबीर ने जिस दिन बाबरी मस्जिद बनाने का ऐलान किया था, उसी दिन यहां राम मंदिर बनाने की बात कही गई थी। बहरामपुर के BJP नेता शंकवाह सरकार ने ये दावा किया था। हमने उनसे पूछा कि मंदिर का काम कहां तक पहुंचा। उन्होंने जवाब दिया, अभी शुरू ही नहीं हुआ।

================ इनपुट: पूनम मसीह ================ पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये इंटरव्यू भी पढ़ें…

1000 करोड़ की डील पर हुमायूं बोले-BJP से दोस्ती नहीं

6 दिसंबर 2025 को मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करने के बाद हुमायूं को ममता ने पार्टी से निकाल दिया। अब वो अपनी पार्टी बनाकर विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। पिछले दिनों BJP के साथ उनकी 1000 करोड़ की डील का वायरल वीडियो सुर्खियों में रहा। इन सभी मसलों पर हुमायूं कबीर से सीधी बातचीत। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…



Source link

Share This Article
Leave a Comment