Wed, 14 Oct 20261:01 PM
Wed, Oct 14, 2026Updated 1:01 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

किसान की जमीन पर संकट! सिंचाई योजना के काम में लापरवाही का आरोप, गरीब किसान की उपजाऊ मिट्टी बही पिता को खोने के बाद परिवार का सहारा बने करण धनगर अब खेत के नुकसान से परेशान, प्र

WhatsAppFacebookX

News video GIF

पिता को खोने के बाद परिवार का सहारा बने करण धनगर अब खेत को हुए नुकसान से चिंतित, निष्पक्ष जांच, मुआवजे और जमीन की मरम्मत की मांग

लोकेशन: मंदसौर, मध्य प्रदेश
रिपोर्ट: रामप्रसाद धनगर गुर्जर, जिला ब्यूरो चीफ, मंदसौर | वंदे भारत न्यूज़

मंदसौर। किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने और सिंचाई की सुविधा बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित बहुउद्देशीय सिंचाई योजना के निर्माण कार्य को लेकर ग्राम पंचायत बर्दिया ऊंचा में एक किसान के खेत को नुकसान पहुंचने का मामला सामने आया है। किसान करण पिता स्वर्गीय शंभूलाल धनगर ने सूक्ष्म नहर यानी पाइपलाइन निर्माण कार्य के दौरान कथित लापरवाही का आरोप लगाया है। किसान के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान उसके खेत की उपजाऊ मिट्टी बह गई और जमीन में गहरा गड्ढा बन गया। इससे खेत की स्थिति प्रभावित हुई है और खेती करके परिवार का भरण-पोषण करने की उसकी चिंता बढ़ गई है।

किसान का कहना है कि खेती ही उसके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। ऐसे में खेत की जमीन को नुकसान पहुंचना उसके लिए केवल आर्थिक परेशानी नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला भी है। किसान ने संबंधित विभाग और जिला प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उचित राहत दिलाने की मांग की है।

पिता की मौत के बाद कम उम्र में संभाली परिवार की जिम्मेदारी

पीड़ित किसान करण धनगर के अनुसार, करीब चार से पांच वर्ष पहले आकाशीय बिजली गिरने की घटना में उनके पिता स्वर्गीय शंभूलाल धनगर का निधन हो गया था। पिता को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी कम उम्र में ही करण के कंधों पर आ गई। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने खेती को परिवार के जीवनयापन का मुख्य सहारा बनाए रखा।

खेती-किसानी के सहारे परिवार को संभालने की कोशिश कर रहे करण के सामने अब खेत को हुए नुकसान की समस्या खड़ी हो गई है। उनका आरोप है कि सिंचाई योजना के अंतर्गत पाइपलाइन निर्माण कार्य के दौरान खेत की उपजाऊ मिट्टी बह गई और जमीन पर गहरा गड्ढा बन गया। इससे प्रभावित हिस्से में खेती करना कठिन हो गया है।

एक ओर परिवार की जिम्मेदारी और दूसरी ओर खेत को दोबारा खेती योग्य बनाने की चिंता ने किसान की परेशानी बढ़ा दी है। करण चाहते हैं कि संबंधित अधिकारी उनकी समस्या को गंभीरता से लें और मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें।

किसानों के हित में बनी योजना, फिर किसान के खेत को नुकसान कैसे?

बहुउद्देशीय सिंचाई योजना का उद्देश्य किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन करण धनगर का आरोप है कि इसी योजना के अंतर्गत किए जा रहे सूक्ष्म नहर यानी पाइपलाइन निर्माण कार्य के दौरान उनके खेत को नुकसान पहुंचा है।

किसान के मुताबिक, खेत की उपजाऊ मिट्टी बहने से जमीन की स्थिति प्रभावित हुई है। यदि समय रहते उचित मरम्मत नहीं कराई गई, तो उन्हें आगामी खेती में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, खेत को हुए नुकसान का वास्तविक कारण, निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही हुई या नहीं और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इन सभी बिंदुओं की पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

किसान का सवाल है कि जब योजनाएं किसानों की सुविधा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए बनाई जाती हैं, तो निर्माण कार्य के दौरान किसी किसान की निजी जमीन को नुकसान पहुंचने पर उसकी भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी?

ठेकेदार से संपर्क करने का प्रयास, संतोषजनक जवाब नहीं मिलने का आरोप

करण धनगर ने बताया कि खेत को नुकसान पहुंचने के बाद उन्होंने संबंधित ठेकेदार से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया। किसान के अनुसार, उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई।

किसान का कहना है कि वह किसी विवाद के बजाय अपनी समस्या का उचित समाधान चाहते हैं। उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचकर खेत का निरीक्षण करें, नुकसान का वास्तविक आकलन कराएं और निर्माण कार्य से जुड़े सभी तथ्यों की जांच करें।

इस मामले में संबंधित ठेकेदार और विभाग का पक्ष सामने आना भी जरूरी है, ताकि नुकसान के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।

जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और उचित मुआवजे की मांग

पीड़ित किसान करण धनगर ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से निम्नलिखित मांगें की हैं:

मौके का निरीक्षण: संबंधित विभाग के अधिकारी गांव बर्दिया ऊंचा पहुंचकर प्रभावित खेत का निरीक्षण करें।

नुकसान का आकलन: खेत की उपजाऊ मिट्टी बहने और जमीन में बने गहरे गड्ढे से हुए नुकसान का निष्पक्ष आकलन कराया जाए।

जिम्मेदारी तय हो: पाइपलाइन निर्माण कार्य से संबंधित सभी तथ्यों की जांच कर, यदि लापरवाही की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार पक्ष के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

उचित मुआवजा मिले: किसान को हुए नुकसान के आकलन के आधार पर नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए।

खेत की मरम्मत कराई जाए: प्रभावित जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए आवश्यक सुधार कार्य कराया जाए, ताकि किसान अपनी आजीविका जारी रख सके।

किसान की मांग है कि प्रशासन इस मामले को केवल निर्माण कार्य से जुड़ी शिकायत मानकर नजरअंदाज न करे, बल्कि इसे उस परिवार की आजीविका से जुड़ी समस्या के रूप में भी देखे, जिसका मुख्य सहारा खेती है।

सबसे बड़ा सवाल: किसान की जमीन को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

यह मामला कई अहम सवाल खड़े करता है। यदि किसानों के खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए बनाई जा रही सिंचाई योजना के निर्माण कार्य के दौरान किसी किसान की जमीन को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या निर्माण कार्य के दौरान खेतों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सावधानियां बरती गई थीं? क्या संबंधित अधिकारियों ने निर्माण कार्य की निगरानी की थी?

इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा। फिलहाल किसान करण धनगर को उम्मीद है कि जिला प्रशासन और संबंधित विभाग उनकी शिकायत पर संज्ञान लेकर मौके की वास्तविक स्थिति का पता लगाएंगे और नियमानुसार उचित राहत उपलब्ध कराएंगे।

पिता को खोने के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रहे करण धनगर के लिए खेती केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं, बल्कि परिवार की आजीविका का आधार है। ऐसे में उनकी मांग है कि खेत को हुए नुकसान की निष्पक्ष जांच हो, जिम्मेदारी तय की जाए और जमीन को दोबारा खेती योग्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कब तक संज्ञान लेता है और पीड़ित किसान को राहत दिलाने के लिए क्या कार्रवाई की जाती है।

खास खबर: रामप्रसाद धनगर गुर्जर
पद: जिला ब्यूरो चीफ, मंदसौर
न्यूज़ चैनल: वंदे भारत न्यूज़