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यवतमाल–आर्णी–माहूर–किनवट–आदिलाबाद नए रेलमार्ग की मांग ने पकड़ा जोर

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यवतमाल–आर्णी–माहूर–किनवट–आदिलाबाद नए रेलमार्ग की मांग ने पकड़ा जोर

18 अक्टूबर को आर्णी में हुई महत्वपूर्ण बैठक; धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को रेलमार्ग से जोड़ने पर हुई चर्चा

आर्णी, यवतमाल : यवतमाल–आर्णी–माहूर–किनवट–आदिलाबाद नए रेलमार्ग की मांग को लेकर 18 अक्टूबर को आर्णी में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में प्रस्तावित रेलमार्ग को लेकर विस्तार से चर्चा की गई तथा इस मांग को शासन स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रयास तेज करने पर विचार-विमर्श किया गया।

प्रस्तावित रेलमार्ग के माध्यम से क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक, ऐतिहासिक एवं पर्यटन स्थलों को रेल सुविधा से जोड़ा जा सकता है। इससे नागरिकों की यात्रा अधिक सुविधाजनक होगी और क्षेत्र के विकास को भी गति मिलेगी, ऐसी अपेक्षा बैठक में व्यक्त की गई।

इस रेलमार्ग में मांदेव देवस्थान, दाभाड़ी स्थित ओंकारेश्वर मंदिर, बाबा कंबलपोष दरगाह, आर्णी क्षेत्र के अन्य धार्मिक स्थलों तथा महाराष्ट्र के साढ़े तीन शक्तिपीठों में से एक माने जाने वाले माहूर स्थित श्री रेणुका माता मंदिर को शामिल करने की मांग की गई।

प्रस्तावित रेलमार्ग से महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के साथ-साथ माहूर, किनवट और तेलंगाना राज्य के आदिलाबाद क्षेत्र के नागरिकों को भी लाभ मिल सकता है। रेल सुविधा उपलब्ध होने से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ ही व्यापार, रोजगार और आवागमन की सुविधाओं में भी वृद्धि होने की संभावना है।

रावते सर के मार्गदर्शन में बैठक

रावते सर के मार्गदर्शन में आयोजित इस बैठक में यवतमाल–आर्णी–माहूर–किनवट–आदिलाबाद नए रेलमार्ग की मांग को शासन के समक्ष प्रभावी ढंग से रखने तथा इस महत्वपूर्ण परियोजना को गति देने के संबंध में चर्चा की गई।

इस महत्वाकांक्षी रेलमार्ग से विदर्भ, मराठवाड़ा और महाराष्ट्र-तेलंगाना के सीमावर्ती क्षेत्रों के नागरिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसलिए संबंधित प्रशासन और रेल मंत्रालय इस मांग पर गंभीरता से विचार करें तथा प्रस्तावित रेलमार्ग को साकार करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, ऐसी अपेक्षा क्षेत्र के नागरिकों द्वारा व्यक्त की जा रही है।