West Bengal Election: BJP vs TMC

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पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 92% वोटिंग हुई है। अगर यही पैटर्न दूसरे और आखिरी फेज की 142 सीटों पर रहा, तो यह बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट होगा। 2021 विधानसभा चुनाव में 82% वोट पड़े थे।

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आजादी के बाद पश्चिम बंगाल में कुल 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं और 4 बार सत्ता परिवर्तन हुआ है। इनमें 3 चुनावों में जब वोटिंग 4.5% से ज्यादा घटी या बढ़ी है, तो सत्ता बदल गई। चौथी बार 2011 में जब ममता ने लेफ्ट के 34 साल के शासन को खत्म किया, तब 2.4% वोटिंग बढ़ी थी।

इस बार बंगाल में इतनी ज्यादा वोटिंग क्यों हुई और इससे टीएमसी या बीजेपी किसे मिलेगा फायदा; पिछले चुनावों के एनालिसिस और एक्सपर्ट्स से जानेंगे पूरी कहानी…

रानीनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ पर लाइन में लगीं महिला मतदाता।

रानीनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पोलिंग बूथ पर लाइन में लगीं महिला मतदाता।

पहले जानते हैं कि इस बार बंगाल में रिकॉर्ड वोटिंग क्यों हो रही है?

वजह-1: SIR में 91 लाख नाम कटे, लेकिन वोट देने वाले उतने ही

  • चुनाव से पहले SIR के जरिए करीब 91 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.75 करोड़ रह गई है, यानी 11.8% की कमी।
  • कोलकाता की सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी बताती हैं कि मतदान-प्रतिशत के बढ़ने की एक वजह SIR हो सकती है।
  • एक लॉजिक ये भी दिया जा रहा है कि वोट देने वालों की संख्या उतनी ही, लेकिन कुल वोटर्स की संख्या घट गई है। इसलिए वोटर टर्नआउट ज्यादा आ रहा है।
  • मान लीजिए कि किसी विधानसभा में 100 वोटर्स थे, जिनमें से 70 ही वोट डालते थे। यानी वोटर टर्नआउट 70% हुआ।
  • लेकिन SIR के बाद 12 मृत या डुप्लीकेट वोटर्स का नाम कट गया। इसके बाद कुल 88 वोटर्स बचे, लेकिन अब भी 70 वोटर ही वोट डाल रहे हैं। यानी वोटर टर्नआउट 79.5% हुआ।
  • VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी का आकलन है कि 2021 में जितनी संख्या में मतदाताओं ने वोटिंग की थी, उतनी ही संख्या इस बार होने के लिए कम से कम 86% वोटर टर्नआउट होना जरूरी है, जो रिकॉर्ड है।
  • सेफोलॉजिस्ट जय मृग के मुताबिक, SIR की वजह से वोटर्स को लग रहा है कि अगर वोट नहीं दिया तो नाम कट जाएगा। एक तरह लोगों को अपने अस्तित्व का डर बैठ गया है।
  • पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकरमणि तिवारी मानते हैं कि लोगों ने SIR का विरोध करने के लिए इस बार ज्यादा वोट डाला है।

वजह-2: टीएमसी और बीजेपी ने महिलाओं से वादे कर लामबंद किया

  • ममता बनर्जी ने मौजूदा लक्ष्मीर भंडार योजना की राशि 500 रुपए बढ़ाने का वादा किया है, जिसका 2.4 करोड़ महिलाओं को फायदा मिलेगा। अभी सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1000 रुपए और SC/ST महिलाओं को 1200 रुपए मासिक मिल रहे हैं। महिला सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस पिंक बूथ और पैट्रोल टीम का भी वादा किया है।
  • वहीं बीजेपी ने ऐलान किया है कि सत्ता में आते ही वे महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए की मदद देंगे। सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण देने का वादा किया है।
  • दरअसल, पिछले कुछ चुनावों से महिला वोटर्स एक फैक्टर बन चुकी हैं। महिलाओं में ट्रेंड बन चुका है कि जो उनके लिए स्कीम्स लाएगा या उनकी बात करेगा, वे उसे ही मजबूती से वोट करेंगी।
  • नवंबर 2023 से नवंबर 2025 तक 15 राज्यों में चुनाव हुए हैं। इनमें से 11 राज्यों में महिलाओं को पैसे देने वाली कैश स्कीम लागू की गई या वादा किया गया। इन 11 में से 10 राज्यों में योजना कारगर रही। स्ट्राइक रेट 90% रहा।

वजह-3: चुनाव के लिए 2.4 लाख जवानों की तैनाती

  • आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा, यानी ACLED ने पिछले 16 चुनावों का एनालिसिस करके पश्चिम बंगाल को सबसे ज्यादा हिंसक राज्य बताया।
  • 2021 में 278 हिंसक घटनाएं रिपोर्ट हुई थीं, जिनमें से 108 मामलों में TMC और 87 मामलों में बीजेपी ने हमला किया था।
  • इन्हीं के मद्देनजर इस बार केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की 2450 कंपनियों, यानी 2.4 लाख से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया है। करीब हर 150 वोटर्स पर एक सुरक्षा कर्मी।
  • कोलकाता के सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं कि इस बार पहले की तरह ज्यादा वॉयलेंस नहीं हुआ है। इसके चलते भी वोटर टर्नआउट बढ़ा है।
2.4 लाख जवानों के साथ दर्जनों बख्तरबंद गाड़ियां और ट्रक भी तैनात किए गए हैं।

2.4 लाख जवानों के साथ दर्जनों बख्तरबंद गाड़ियां और ट्रक भी तैनात किए गए हैं।

वजह-4: ममता को लेकर एंटी-इनकमबेंसी या प्रो-इनकमबेंसी फैक्टर

  • 2011 के बाद लगातार 15 सालों से टीएमसी सत्ता पर काबिज है और ममता बनर्जी सीएम हैं।
  • इतने लंबे शासन में बेरोजगारी, अपराध और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे उठने लगते हैं। इनसे निपटने के लिए टीएमसी ने 74 विधायकों के टिकट काट दिए और 15 विधायकों की सीट बदल दी।
  • Axis My India के डायरेक्टर प्रदीप गुप्ता मानते हैं कि किसी भी सरकार के लिए तीन कार्यकाल, यानी 15 साल बहुत होते हैं। खासकर डिजिटल के दौर में। लाखों युवा वोटर्स ने टीएमसी के अलावा किसी दूसरी पार्टी की सरकार नहीं देखी है। ऐसे में हो सकता है कि वो बदलाव के लिए ज्यादा तादाद में बाहर निकल रहे हों।
  • हालांकि VoteVibe के सर्वे के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में अब भी 41.6% वोटर्स ममता बनर्जी को सीएम बनाना चाहते हैं।

इतनी ज्यादा वोटिंग से बीजेपी या ममता किसे फायदा होगा?

  • इंडियन पॉलिटिक्स एंड पॉलिसी जर्नल में 2025 में पब्लिश हुए एक रिसर्च पेपर के मुताबिक, मतदान में भारी बढ़ोतरी अक्सर कॉम्पिटिटिव इफेक्ट, यानी कांटे की टक्कर की ओर इशारा करती है।
  • जब वोटर मौजूदा सरकार या नेता के कामकाज से बहुत ज्यादा असंतुष्ट होते हैं, तो वे उन्हें हटाने के मकसद से बड़ी संख्या में बाहर निकलते हैं।
  • इलेक्शन एनालिस्ट प्रो. संजय कुमार के मुताबिक, 2020 तक देश में करीब 332 विधानसभा चुनाव हुए हैं। इनमें से 188 चुनावों में मतदान-प्रतिशत बढ़ा, जिनमें 89 सरकारें दोबारा चुनी गईं। वहीं 144 बार मतदान-प्रतिशत घटा है, जिनमें 56 सरकारें दोबारा चुनी गईं। साफ तौर पर मतदान-प्रतिशत और चुनावी नतीजों के बीच कोई मजबूत संबंध नहीं है।
  • अहमदाबाद यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर नीलांजन सरकार मानते हैं कि कभी-कभी हाई टर्नआउट भरोसे का प्रतीक होता है, जहां मतदाता अपने पसंदीदा नेता जैसे- नरेंद्र मोदी या ममता बनर्जी को और मजबूत करने के लिए वोट देने निकलते हैं।

यानी यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि वोटर टर्नआउट बढ़ने से किसे फायदा मिलेगा। पश्चिम बंगाल के पिछले चुनावों के एनालिसिस से भी कोई साफ पैटर्न समझ नहीं आता। आजादी के बाद १७ चुनावों में 9 बार वोटिंग 4.5% से ज्यादा घटी/बढ़ी है। इसमें सिर्फ 3 बार सत्ता परिवर्तन हुआ, बाकी 6 बार मौजूदा सरकार ही बरकरार रही।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकरमणि तिवारी मानते हैं कि SIR की नाराजगी का फायदा टीएमसी को मिल सकता है।

सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य बताते हैं कि इतनी ज्यादा वोटिंग होना, बीजेपी के लिए चुनौती साबित हो सकती है। क्योंकि पहले फेज में जिस इलाके में वोटिंग हुई है, वो बीजेपी का गढ़ है। वहीं अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर बीजेपी को सबक सिखाने के लिए ज्यादा वोटर्स निकले, खासकर महिलाएं।

SIR के बाद बिहार चुनाव में 10% वोटिंग बढ़ी, BJP को फायदा मिला

  • जून 2025 में बिहार में कुल 7.89 करोड़ वोटर्स थे। फिर SIR शुरू हुआ। अक्टूबर 2025 में जारी फाइनल लिस्ट में वोटर्स की संख्या 6% घटकर 7.42 करोड़ हो गई। इसमें 69.29 लाख नाम कटे गए और 21.53 लाख नए नाम जोड़े गए।
  • दो फेज में वोटिंग के बाद 67% वोटर टर्नआउट रहा। पिछले चुनाव से 10% ज्यादा। 2020 चुनाव में करीब 57% वोटिंग हुई थी।
  • फिर जब नतीजे आए तो NDA को कुल 202 सीटें मिलीं, जबकि महागठबंधन 35 सीटों पर सिमट गया। बीजेपी ने 89 और जेडीयू ने 85 सीटें जीतीं। वहीं आरजेडी को 25 और कांग्रेस को महज 6 सीटें मिलीं।

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