- Hindi News
- National
- West Bengal SIR List Controversy; Election Duty Officers | Supreme Court CJI
नई दिल्ली12 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

बंगाल में पहले फेज की वोटिंग 23 अप्रैल को हुई, इसमें वोटिंग 93% रही।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हुई रिकॉर्ड वोटिंग की तारीफ की। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपिन पंचोली की बेंच ने राज्य में चुनावी हिंसा न होने पर संतोष जताया।
CJI ने कहा- भारत के नागरिक के रूप में, मुझे मतदान प्रतिशत देखकर बहुत खुशी हुई। जब लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं, तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, कि वे लोग समाधान के लिए कोर्ट की तरफ से नियुक्त 19 अपीलीय ट्रिब्यूनलों से संपर्क करें।
कोर्ट बंगाल में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव से पहले इस प्रक्रिया को रोकने से इनकार कर दिया था।
कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों से कहा कि वे उन लोगों को पहले सुनवाई का मौका दें, जो वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने के लिए अर्जेंट सुनवाई की गुहार लगाते हैं।
कोर्ट ने बंगाल चुनाव ड्यूटी में लोगों की याचिका सुनने से इनकार किया
सुप्रीम कोर्ट ने 24 अप्रैल को उन विभिन्न लोगों की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिनके नाम पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) के दौरान मतदाता सूची से काट दिए गए थे; इनमें लगभग 65 चुनाव ड्यूटी अधिकारी भी शामिल थे।
याचिकाकर्ता के वकील एमआर शमशाद ने कहा कि कई अधिकारियों के नाम बिना किसी कारण के मनमाने ढंग से मतदाता सूची से हटा दिए गए थे। उनके ड्यूटी ऑर्डर में एपिक नंबरों का उल्लेख है। अब उन नंबरों को हटा दिया गया है। अब चुनाव कराने वाले लोग वोट नहीं दे सकते। यह मनमाना है। कई मामलों में कारण भी नहीं बताए गए हैं।”
इस पर जस्टिस बागची ने कहा, “इस चुनाव में शायद वे वोट नहीं दे पाएंगे। में उनका नाम बनाए रखने का महत्वपूर्ण अधिकार सुरक्षित रखा जाएगा।”
कोर्ट रूम लाइव
- एडवोकेट कल्याण बनर्जी: दायर की गई 27 लाख अपीलों में से 136 का ही निपटारा किया गया है। यह बहुत दुख की बात है। इस बार 92% मतदान हुआ। दूर-दूर से प्रवासी मजदूर मतदान करने आए हैं। हिंसा की कोई घटना भी नहीं हुई।
- CJI सूर्यकांत: मैं मतदान प्रतिशत देखकर बहुत प्रसन्न हुआ।
- SG तुषार मेहता: यह ऐतिहासिक मतदान है। लेकिन मैं बनर्जी से सहमत हूं… कुछ घटनाओं को छोड़कर यह एक शांतिपूर्ण चुनाव था।
- जस्टिस बागची: राजाये राजाये जुद्धो होये, कुलो कांगरार जान जाए, यानी युद्ध राजाओं के बीच लड़े जाते हैं, लेकिन आम लोग अपनी जान गंवाते हैं। पहली बार चुनाव आयोग के मुवक्किल की सभी लोग सराहना कर रहे हैं।

बंगाल में वोट प्रतिशत बढ़ने की 4 वजह
- SIR: राज्य में 91 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए, जिससे कुल मतदाता संख्या घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि 2024 लोकसभा चुनाव में इन्हीं 152 सीटों पर वोटिंग करीब 80% और 2021 विधानसभा चुनाव में करीब 82.17% रही थी। यानी कुल मतदाता घटे, लेकिन वोट डालने वालों की संख्या लगभग बराबर या ज्यादा रही।
- एंटी इनकंबेंसी: राज्य में 15 साल से तृणमूल सरकार है। नेताओं से असंतोष, रोजगार, भ्रष्टाचार, सिंडिकेट जैसे मुद्दे भी ज्यादा मतदान की वजह हो सकते हैं। वहीं, मुस्लिम बहुल जिलों और सीमावर्ती इलाकों में यह SIR और NRC के डर से उपजी प्रतिक्रिया भी मानी जा रही है। इस बार ध्रुवीकरण भी जबरदस्त है। इसलिए माना जा रहा है कि हिंदू मतदाताओं का भी वोट प्रतिशत ज्यादा रहा होगा।
- प्रवासी कामगार: यह भी बड़ा ‘टर्निंग पॉइंट’ है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों से केवल वोट डालने बंगाल लौटे हैं। उन्हें लगा कि इस बार वोट नहीं दिया, तो हमेशा के लिए अधिकार छिन सकता है। TMC ने आरोप लगाया कि भाजपा ट्रेन भर कर वोट डालने के लिए लोगों को ला रही है।
- आयोग की सख्ती: निर्वाचन आयोग की अभूतपूर्व निगरानी और 2.40 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती के कारण मतदाताओं ने बिना किसी डर के मतदान किया।
पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं को हटाने वाली SIR लिस्ट के पब्लिश होने के बाद चुनाव हो रहे हैं। गुरुवार को हुए मतदान में महिला वोटर्स की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। महिला वोटर 92.69% रहीं, जबकि पुरुष वोटर 90.92% रहे। थर्ड जेंडर के वोटर का 56.79% थे।
















