आगर मालवा में 3800 करोड़ रुपये की मैककेन फूड परियोजना का ऐलान, 2 हजार लोगों को मिलेगा रोजगार; सीएम मोहन यादव ने 2027 तक 2700 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीदी का किया वादा

मध्य प्रदेश के आगर मालवा जिले में शुक्रवार को आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान राज्य सरकार द्वारा कृषि और औद्योगिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस भव्य कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए किसानों के हित में बड़े फैसलों की जानकारी दी। इस दौरान उन्होंने न केवल आगर मालवा में एक विशाल खाद्य प्रसंस्करण परियोजना की नींव रखी, बल्कि प्रदेश के गेहूं उत्पादक किसानों के लिए एक दूरगामी और राहत भरा वादा भी किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2027 तक राज्य में गेहूं की खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सुनिश्चित की जाएगी। यह घोषणा प्रदेश के लाखों किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे उनकी आय में निश्चित वृद्धि होने की उम्मीद है।
बलराम कृषि महोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आगर मालवा जिले में लगभग 3800 करोड़ रुपये के निवेश वाली मैककेन फूड परियोजना (McCain Food Project) की विस्तृत जानकारी दी। यह परियोजना क्षेत्र के औद्योगिक और कृषि परिदृश्य को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है। मैककेन फूड्स दुनिया की सबसे बड़ी फ्रोजन फूड कंपनियों में से एक है और आगर मालवा में इसके संयंत्र की स्थापना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी। इस मेगा प्रोजेक्ट के माध्यम से करीब 2000 लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने का अनुमान है। इसके अलावा, अप्रत्यक्ष रूप से हजारों अन्य लोगों को भी लाभ पहुंचेगा, जिसमें परिवहन, पैकेजिंग और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोग शामिल हैं।
इस विशाल परियोजना का सबसे बड़ा लाभ स्थानीय किसानों को होगा, क्योंकि मैककेन फूड्स मुख्य रूप से आलू और अन्य कृषि उत्पादों का प्रसंस्करण करती है। ऐसे में आगर मालवा और आसपास के जिलों के किसानों को अपनी उपज के लिए एक स्थायी और लाभकारी बाजार मिल जाएगा। उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दूर-दराज के मंडियों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि उनके ही क्षेत्र में एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की कंपनी उनकी फसल की खरीद सुनिश्चित करेगी। इससे किसानों की आय में वृद्धि के साथ-साथ क्षेत्र में अनुबंध खेती (Contract Farming) को भी बढ़ावा मिलेगा।
कार्यक्रम की एक विशेष बात यह रही कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केवल आगर मालवा में उपस्थित किसानों से ही संवाद नहीं किया, बल्कि तकनीक का उपयोग करते हुए हरदा जिले के किसानों से भी वर्चुअली (Virtual) बातचीत की। इस वर्चुअल संवाद के जरिए उन्होंने हरदा सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों के किसानों को भी इन योजनाओं और घोषणाओं से सीधे जोड़ा। मुख्यमंत्री ने किसानों से उनकी समस्याओं और सुझावों को जाना तथा सरकार द्वारा चलाई जा रही किसान हितैषी योजनाओं की जानकारी दी। यह डिजिटल पहल दर्शाती है कि राज्य सरकार किसानों तक सीधे पहुंचने और उनके साथ संवाद बनाए रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का भरपूर उपयोग कर रही है।
मुख्यमंत्री द्वारा 2027 तक गेहूं की खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा को कृषि अर्थशास्त्रियों और किसान संगठनों द्वारा एक साहसिक और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है। वर्तमान में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) और बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, किसानों को अपनी लागत का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में 2700 रुपये प्रति क्विंटल का लक्ष्य निर्धारित करना किसानों को आश्वस्त करता है कि सरकार उनकी आमदनी बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इस वादे से गेहूं की खेती करने वाले किसानों में उत्साह का संचार हुआ है और वे अब अधिक उत्पादन की ओर प्रेरित होंगे।
बलराम कृषि महोत्सव का आयोजन आगर मालवा जिले के कृषि विकास और किसानों के कल्याण के उद्देश्य से किया गया था। इस महोत्सव में कृषि विभाग के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। महोत्सव का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर आधारित ‘बलराम’ योजनाओं से प्रेरित माना जाता है, जिनका उद्देश्य हमेशा किसानों के जीवन स्तर को ऊपर उठाना रहा है। इस मंच से की गई घोषणाएं इसी सोच का विस्तार प्रतीत होती हैं।
कुल मिलाकर, आगर मालवा में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की घोषणाओं ने प्रदेश के कृषि और औद्योगिक क्षेत्र में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। 3800 करोड़ रुपये की मैककेन फूड परियोजना से जहां 2000 लोगों को रोजगार मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, वहीं 2027 तक गेहूं की कीमत 2700 रुपये प्रति क्विंटल करने के वादे ने किसानों के चेहरों पर खुशी ला दी है। हरदा के किसानों से वर्चुअल संवाद ने इस कार्यक्रम की पहुंच और पारदर्शिता को और भी व्यापक बना दिया। अब सभी की निगाहें इन घोषणाओं के समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन पर टिकी हुई हैं, ताकि इन योजनाओं का वास्तविक लाभ जमीनी स्तर पर किसानों और आम नागरिकों तक पहुंच सके।

