Thu, 08 Oct 20265:01 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 5:01 PM IST
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आरा में महागठबंधन का लोकतंत्र बचाओ मार्च: SIR रद्द करने की मांग, PM मोदी और CEC ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका

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बिहार के भोजपुर जिले के मुख्यालय आरा में महागठबंधन के घटक दलों ने ‘लोकतंत्र बचाओ मार्च’ निकाला। इस प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में चल रहे विशेष गहन संशोधन (SIR) को रद्द कराने की मांग करना था। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। मार्च के दौरान भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हिस्सा लिया, जिन्होंने मतदाता सूची में हो रही कथित अनियमितताओं पर गंभीर सवाल उठाए।

महागठबंधन की ओर से निकाले गए इस मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि मतदाता सूची का जो ‘शुद्धिकरण’ किया जा रहा है, वह पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए। उनका आरोप है कि मौजूदा प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और इसके जरिए एक खास वर्ग को निशाना बनाया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि मतदाता सूची के संशोधन के नाम पर दलितों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों के नाम जानबूझकर काटे जा रहे हैं। उनके अनुसार, यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ खिलवाड़ है और आम मतदाताओं के मताधिकार का हनन है।

यह मार्च शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरता हुआ अंबेडकर चौक पर पहुंचकर समाप्त हुआ। अंबेडकर चौक पर पहुंचने के बाद प्रदर्शनकारियों का आक्रोश चरम पर देखा गया। वहां इकट्ठा हुई भीड़ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका। पुतला दहन के दौरान केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ तीखे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की, क्योंकि उनका मानना है कि चुनाव आयोग की वर्तमान कार्यप्रणाली निष्पक्ष नहीं रह गई है।

विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर महागठबंधन के नेताओं और कार्यकर्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि मतदाता सूची का अपडेशन और शुद्धिकरण एक नियमित प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन इसे जिस तरीके से अंजाम दिया जा रहा है, उससे लाखों योग्य मतदाताओं के नाम सूची से गायब होने का खतरा पैदा हो गया है। विशेष रूप से समाज के कमजोर और हाशिए पर मौजूद वर्गों, जैसे अनुसूचित जाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम काटे जाने की बात सामने आ रही है, जिसे महागठबंधन ने किसी भी हालत में स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

मार्च के दौरान महागठबंधन के नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतदान का अधिकार सबसे बड़ा अधिकार है। यदि कोई सरकार या संस्था इस अधिकार को छीनने का प्रयास करती है, तो उसके खिलाफ सड़कों पर उतरना हर नागरिक का कर्तव्य बन जाता है। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सत्ता में बने रहने के लिए मतदाता सूची में हेरफेर की जा रही है, जो भारतीय संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के सर्वथा विपरीत है।

आरा में हुए इस प्रदर्शन ने भोजपुर जिले के राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। महागठबंधन ने साफ कर दिया है कि अगर उनकी मांगों को नहीं माना गया और विशेष गहन संशोधन (SIR) को रद्द नहीं किया गया, तो वे आगे भी ऐसे ही आंदोलन जारी रखेंगे। प्रदर्शनकारियों ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए और एक स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा पारदर्शी जांच कराई जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम बिना ठोस कारण के सूची से नहीं हटाया गया है।

अंबेडकर चौक पर पुतला दहन के बाद भीड़ को शांत कराते हुए नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई सिर्फ एक दिन की नहीं है। जब तक दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के नाम वापस मतदाता सूची में नहीं जुड़ जाते और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक महागठबंधन का यह जन-आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया कि आखिर किसके इशारे पर मतदाता सूची में इस तरह की कथित गड़बड़ी की जा रही है।

इस पूरे मामले में अभी तक केंद्र सरकार या निर्वाचन आयोग की ओर से महागठबंधन के इन विशिष्ट आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, आरा में हुए इस बड़े मार्च और पुतला दहन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्षी दल मतदाता सूची के मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को घेरने की पूरी तैयारी में हैं। भोजपुर जिले में हुए इस प्रदर्शन ने राज्य के अन्य जिलों में भी विपक्षी दलों को इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाने का संकेत दिया है। पुलिस प्रशासन ने पूरे मार्च और पुतला दहन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हुए थे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।