अमेरिका में सड़क हादसे में करनाल के 25 वर्षीय युवक जतिन की दर्दनाक मौत, ट्राला पलटने से गई जान; डंकी रूट से गया था अमेरिका

करनाल। वंदे भारत न्यूज़। अमेरिका में एक सड़क दुर्घटना में हरियाणा के करनाल जिले के सीकरी गांव निवासी 25 वर्षीय युवक जतिन की दर्दनाक मौत हो गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा अमेरिका में उस समय हुआ जब जतिन जिस ट्राला (ट्रैक्टर-ट्रॉली) में सवार था, वह पलट गया। इस गंभीर दुर्घटना में जतिन ने अपनी जान गंवा दी। बेटे की मौत की खबर जैसे ही सीकरी गांव पहुंची, पूरे परिवार और गांव में मातम का माहौल छा गया। मृतक की मां रोते हुए बेसुध हो गईं और उन्होंने कहा कि उनके ऊपर मानो बिजली गिर गई है। परिवार ने अब आर्थिक मदद की गुहार लगाई है ताकि वे अपने बेटे का पार्थिव शरीर स्वदेश ला सकें और उसका अंतिम संस्कार कर सकें।
बताया जा रहा है कि जतिन अवैध तरीके से यानी ‘डंकी’ रूट के जरिए अमेरिका गया था। डंकी रूट का अर्थ है अवैध रूप से कई देशों की सीमाएं पार करते हुए अमेरिका या अन्य विकसित देशों में प्रवेश करना। हरियाणा और पंजाब के कई युवा बेहतर भविष्य और अधिक कमाई की उम्मीद में एजेंटों के चक्कर में फंसकर इस खतरनाक रास्ते को चुनते हैं। इस रूट में युवाओं को लंबी और जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ती है, जिसमें कई बार जान भी चली जाती है। जतिन भी इसी उम्मीद में अपना घर-परिवार छोड़कर विदेश गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उसे जो काम मिला, उसी के दौरान यह हादसा हो गया।
ट्राला पलटने से हुई इस दुर्घटना की खबर मिलने के बाद से सीकरी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन लोगों ने जतिन को खेलते-कूदते देखा था, वे आज उसके इस तरह चले जाने पर स्तब्ध हैं। जतिन के परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत अच्छी नहीं थी। बेटे को अमेरिका भेजने के लिए परिवार ने भारी कर्ज लिया था। एजेंटों को लाखों रुपये देने के बाद परिवार इस उम्मीद में बैठा था कि जतिन वहां जाकर मेहनत करेगा और कर्ज चुकाने के साथ-साथ परिवार का जीवन स्तर भी सुधारेगा। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अब बेटे की मौत की खबर के साथ-साथ परिवार पर कर्ज का बोझ और बढ़ गया है।
जतिन की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने बताया कि उनका इकलौता सहारा उनसे छिन गया है। मां ने रुंधे गले से कहा, “हमारे ऊपर बिजली गिर गई है।” परिवार के अन्य सदस्य भी गहरे सदमे में हैं। उन्हें सबसे बड़ी चिंता यह है कि जतिन का शव अमेरिका से भारत कैसे लाया जाए। शव को स्वदेश लाने की प्रक्रिया अत्यंत खर्चीली और जटिल होती है। इसके लिए दूतावास, एयरलाइंस और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसमें लाखों रुपये का खर्च आता है। ऐसे में गरीब परिवार के पास इतनी बड़ी रकम जुटाना लगभग असंभव है।
इसी कारण से जतिन के परिजनों ने सरकार, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवी संस्थाओं से आर्थिक मदद की अपील की है। परिवार का कहना है कि यदि समय रहते कोई मदद नहीं मिली, तो वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाएंगे। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से मांग की है कि पीड़ित परिवार को तुरंत आर्थिक सहायता प्रदान की जाए ताकि मृतक युवक का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द गांव लाया जा सके।
हरियाणा के युवाओं में विदेश जाने का क्रेज पिछले कई वर्षों से तेजी से बढ़ा है। विशेष रूप से करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में युवा अमेरिका, कनाडा, यूके और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों का रुख करते हैं। हालांकि, वैध वीजा न मिल पाने की स्थिति में कई युवा अनैतिक और अवैध मार्गों का सहारा लेते हैं। डंकी रूट के तहत युवाओं को पहले लैटिन अमेरिकी देशों में भेजा जाता है और फिर वहां से पैदल या अन्य साधनों से अमेरिका की सीमा में प्रवेश कराया जाता है। इस पूरी यात्रा के दौरान उन्हें जंगलों, नदियों और रेगिस्तानों से गुजरना पड़ता है, जहां भूख, प्यास, बीमारी और सुरक्षा बलों की गोली का सामना करना पड़ता है।
जतिन की मौत की घटना एक बार फिर से इस बात की ओर ध्यान आकर्षित करती है कि डंकी रूट कितना घातक है। इस रूट से जाने वाले युवा न केवल रास्ते में अपनी जान गंवा बैठते हैं, बल्कि गंतव्य पर पहुंचने के बाद भी उन्हें अवैध प्रवासी होने के कारण अत्यंत जोखिम भरे और कम वेतन वाले काम करने पड़ते हैं। ट्राला चलाना या कृषि कार्यों में मदद करना ऐसे ही कामों में शामिल है, जहां सुरक्षा मानकों की अक्सर अनदेखी की जाती है। जतिन के साथ भी ऐसा ही हुआ, जब वह ट्राला पर काम कर रहा था और वाहन पलटने से उसकी जान चली गई।
स्थानीय स्तर पर इस घटना के बाद लोगों में गहरा दुख और आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को ऐसे एजेंटों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो युवाओं को झूठे सपने दिखाकर अवैध तरीके से विदेश भेजते हैं। साथ ही, राज्य और केंद्र सरकार को हरियाणा के गांवों में रोजगार के बेहतर अवसर पैदा करने चाहिए ताकि युवाओं को अपनी जान जोखिम में डालकर विदेश न जाना पड़े। फिलहाल, सीकरी गांव में शोक की लहर है और हर किसी की आंखें नम हैं। सभी की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और सरकार कब तक इस गरीब परिवार की मदद के लिए आगे आती है, ताकि जतिन का शव उसके गांव पहुंच सके और उसे अंतिम विदाई दी जा सके।

