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Fri, Oct 9, 2026Updated 10:36 AM IST
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अमेरिका में विदेशी छात्रों के लिए नौकरी महंगी होगी: ट्रम्प सरकार ने OPT फीस बढ़ाकर 70 हजार डॉलर करने का प्रस्ताव रखा, भारत और चीन के छात्रों पर सबसे ज्यादा असर

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वाशिंगटन। अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले विदेशी छात्रों के लिए पढ़ाई पूरी होने के बाद वहां नौकरी करना अब काफी महंगा हो सकता है। डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है, जिसके तहत हर नए विदेशी छात्र से ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) के लिए 70 हजार डॉलर यानी भारतीय मुद्रा में करीब 68 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस वसूलने का प्रावधान रखा गया है। यह प्रस्ताव उन लाखों विदेशी छात्रों के भविष्य को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है, जो अमेरिका में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वहीं काम करने और अनुभव प्राप्त करने की योजना बनाते हैं।

जानकारी के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव का सीधा उद्देश्य अमेरिकी श्रम बाजार में विदेशी छात्रों की भागीदारी को नियंत्रित करना और उन्हें कम करना है। वर्तमान में अमेरिका में पढ़ने वाले विदेशी छात्रों को अपनी डिग्री या पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद एक निश्चित अवधि के लिए काम करने की अनुमति दी जाती है, जिसे ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) कहा जाता है। अब तक इस सुविधा के लिए अपेक्षाकृत कम शुल्क लिया जाता था, लेकिन नए प्रस्ताव में इसे बढ़ाकर 70 हजार डॉलर प्रति छात्र करने की बात कही गई है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो यह अमेरिकी इतिहास में विदेशी छात्रों के लिए सबसे बड़ी आर्थिक बाधाओं में से एक साबित होगा।

इस नीतिगत बदलाव का सबसे गहरा और प्रत्यक्ष असर भारत और चीन जैसे देशों के छात्रों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि अमेरिका के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले कुल विदेशी छात्रों में सबसे बड़ा हिस्सा इन्हीं दोनों देशों का होता है। भारत से हर साल लाखों छात्र इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, इनफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और अन्य उच्च तकनीकी क्षेत्रों में पढ़ाई के लिए अमेरिका जाते हैं। इन छात्रों का मुख्य लक्ष्य अमेरिकी कंपनियों में काम करके वैश्विक स्तर का अनुभव हासिल करना होता है। ऐसे में 68 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस का बोझ उनके लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं होगा।

ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) अमेरिकी आव्रजन नियमों के तहत दी जाने वाली वह सुविधा है, जिसके जरिए F-1 वीजा पर पढ़ने वाले विदेशी छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान या उसके बाद अमेरिका में काम कर सकते हैं। सामान्यतः STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथमेटिक्स) विषयों के छात्रों को इसका विशेष लाभ मिलता है, जिनके लिए यह अवधि अधिकतम तीन साल तक हो सकती है। कई विदेशी छात्र OPT अवधि के दौरान ही अमेरिकी कंपनियों में अपना प्रदर्शन दिखाकर H-1B वर्क वीजा के लिए चुने जाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इसलिए, OPT को अमेरिका में स्थायी रूप से करियर बनाने का पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम माना जाता रहा है।

ट्रम्प प्रशासन का यह कदम उनकी ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का ही एक हिस्सा देखा जा रहा है। इस नीति के तहत सरकार का जोर इस बात पर रहा है कि अमेरिकी नागरिकों को ही रोजगार के अधिक अवसर मिलें और विदेशी कामगारों पर निर्भरता कम की जाए। हालांकि, अमेरिका के कई विश्वविद्यालय और शिक्षा जगत के विशेषज्ञ इस तरह के प्रस्तावों को लेकर चिंता व्यक्त करते रहे हैं। उनका मानना है कि विदेशी छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था, नवाचार और विश्वविद्यालयों के राजस्व में बहुत बड़ा योगदान देते हैं। यदि विदेशी छात्रों की संख्या में भारी गिरावट आती है, तो अमेरिकी उच्च शिक्षा संस्थानों को भी भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

भारतीय छात्रों के दृष्टिकोण से देखें तो यह प्रस्ताव बेहद चिंताजनक है। भारत के मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों की विदेश में पढ़ाई के लिए पहले ही करोड़ों रुपये खर्च करते हैं। पढ़ाई के बाद 68 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस भरना अधिकांश परिवारों के लिए लगभग असंभव होगा। इसके परिणामस्वरूप, कई भारतीय छात्र अमेरिका के बजाय कनाडा, यूरोप या ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य विकल्पों की ओर रुख करने पर विचार कर सकते हैं, जहां पढ़ाई के बाद काम करने के नियम तुलनात्मक रूप से कम खर्चीले हैं।

वहीं, चीन के छात्र भी अमेरिकी विश्वविद्यालयों में दूसरी सबसे बड़ी संख्या में मौजूद रहते हैं। ट्रम्प सरकार के इस प्रस्ताव से चीनी छात्रों की अमेरिका में नौकरी और करियर की योजनाओं पर भी समान रूप से गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह प्रस्ताव अभी प्रस्तावित अवस्था में है, लेकिन यदि इसे औपचारिक रूप से लागू कर दिया जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय शिक्षा और अमेरिकी रोजगार बाजार के ढांचे में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल, दुनिया भर के छात्र और शैक्षणिक संस्थान इस प्रस्ताव के अंतिम रूप से लागू होने या उसमें संभावित संशोधनों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।