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Fri, Oct 9, 2026Updated 6:43 PM IST
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अशोकनगर में राजस्व विभाग की बड़ी कार्रवाई: काम में लापरवाही और 82 दिन बिना बताए गैरहाजिर रहने पर तीन पटवारी सस्पेंड

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अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में राजस्व विभाग ने अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है। जिले में गुरुवार को राजस्व संबंधी कार्यों में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता और बिना सूचना दिए लंबे समय तक ड्यूटी से नदारद रहने के आरोप में तीन पटवारियों को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई जिले के अलग-अलग उपखंड अधिकारियों (एसडीएम) द्वारा की गई है। निलंबित किए गए तीनों पटवारी क्रमशः बामोरीताल, गणेशखेड़ा और बामोरीखुटिया में तैनात थे। इनमें से एक महिला पटवारी भी शामिल है, जिस पर बिना किसी पूर्व सूचना या स्वीकृति के लगातार 82 दिनों तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का गंभीर आरोप है।

राजस्व विभाग की इस कार्रवाई से पूरे जिले के पटवारी वर्ग और राजस्व अमले में हड़कंप मच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार को हुई इस कार्रवाई के तहत बामोरीताल, गणेशखेड़ा और बामोरीखुटिया क्षेत्रों में तैनात पटवारियों के खिलाफ उनके संबंधित एसडीएम ने आदेश जारी किए हैं। इन तीनों पटवारियों पर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में राजस्व के दैनिक और महत्वपूर्ण कार्यों में लगातार लापरवाही बरतने तथा सरकारी नियमों और अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप सिद्ध पाए गए हैं। इसके बाद ही उनके खिलाफ निलंबन की कड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई है।

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू एक महिला पटवारी की गैरहाजिरी से जुड़ा है। स्रोत के मुताबिक, यह महिला पटवारी बिना किसी पूर्व सूचना, औपचारिक आवेदन या छुट्टी की स्वीकृति के सीधे 82 दिनों तक अपने पद से गैरहाजिर रही। सरकारी सेवा नियमों के तहत बिना बताए इतने लंबे समय तक ड्यूटी से नदारद रहना अत्यंत गंभीर कदाचार और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। इस प्रकार की अनधिकृत अनुपस्थिति से न केवल राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली बाधित होती है, बल्कि आम जनता को भी भूमि रिकॉर्ड, खसरा-खतौनी और अन्य राजस्व संबंधी जरूरी कामों के लिए भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। महिला पटवारी की इस लंबी और बिना सूचना वाली गैरहाजिरी को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है, जिसके परिणामस्वरूप उसके खिलाफ निलंबन का आदेश जारी किया गया है।

बामोरीताल, गणेशखेड़ा और बामोरीखुटिया में तैनात अन्य दो पटवारियों पर भी अपने-अपने हल्कों में राजस्व कार्यों में लापरवाही और कर्तव्यनिष्ठा की कमी के स्पष्ट आरोप थे। पटवारी ग्रामीण राजस्व प्रशासन की सबसे निचली लेकिन सबसे महत्वपूर्ण इकाई होता है। किसानों के भूमि रिकॉर्ड का रखरखाव, फसल सर्वेक्षण, राजस्व वसूली, शासकीय योजनाओं के लिए भूमि संबंधी रिपोर्ट तैयार करना और स्थानीय प्रशासन को सहयोग देना पटवारी की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। जब ये कर्मचारी ही अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन हो जाते हैं या बिना बताए लंबे समय तक गायब रहते हैं, तो पूरी राजस्व व्यवस्था चरमरा जाती है और आम नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

उपखंड अधिकारियों (एसडीएम) द्वारा की गई इस संयुक्त और समन्वित कार्रवाई से जिला प्रशासन का स्पष्ट संदेश निकलकर सामने आया है कि राजस्व विभाग में किसी भी स्तर पर लापरवाही, कामचोरी या अनुशासनहीनता को अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अलग-अलग एसडीएम ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले इन तीनों पटवारियों के कार्यों की समीक्षा की और मिली शिकायतों व तथ्यों के आधार पर उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्णय लिया।

गौरतलब है कि राज्य में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को सुधारने और इसे अधिक पारदर्शी व जनहितैषी बनाने के लिए समय-समय पर ऐसे अभियान चलाए जाते रहे हैं। अशोकनगर जिले में गुरुवार को एक साथ तीन पटवारियों के निलंबन की यह घटना इसी कड़ी का हिस्सा मानी जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि इस सख्त कार्रवाई का असर जिले के अन्य राजस्व कर्मचारियों पर भी पड़ेगा और वे अपने कार्यों को अधिक जिम्मेदारी व निष्ठा के साथ पूरा करेंगे।

हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि निलंबित पटवारियों के हल्कों का अतिरिक्त प्रभार किसे सौंपा गया है या उनकी जगह नई तैनाती कब तक की जाएगी। साथ ही, 82 दिन गैरहाजिर रहने वाली महिला पटवारी के खिलाफ आगे क्या विभागीय जांच या अन्य कानूनी प्रक्रिया होगी, इस बारे में भी प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई है। इस संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है।

वंदे भारत न्यूज़ के संवाददाता के अनुसार, अशोकनगर जिला मुख्यालय पर गुरुवार को हुई इस कार्रवाई की चर्चा पूरे दिन प्रशासनिक और राजस्व अमले में होती रही। आम लोगों और किसानों ने भी राजस्व कार्यों में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ उठाए गए इस कदम को सही दिशा में बताया है। जिला प्रशासन की ओर से भविष्य में भी ऐसे ही सख्त रुख अपनाए जाने की उम्मीद जताई जा रही है, ताकि राजस्व विभाग की छवि सुधर सके और आम जनता को समय पर उनके अधिकार और दस्तावेज मिल सकें।