Thu, 08 Oct 202611:58 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 11:58 AM IST
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बैतूल-परतवाड़ा जर्जर सड़क पर टोल वसूली का विरोध: कोथलकुंड टोल नाके पर ट्रांसपोर्टरों ने किया प्रदर्शन, अधिकारियों ने मांगे तीन दिन

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बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में खराब सड़कों की समस्या और उस पर हो रही टोल वसूली को लेकर बुधवार को ट्रांसपोर्ट संघ के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया। बैतूल से परतवाड़ा मार्ग पर स्थित कोथलकुंड टोल नाके पर ट्रांसपोर्टरों ने एकत्र होकर प्रदर्शन किया और खराब सड़क की स्थिति को देखते हुए तत्काल टोल वसूली बंद करने की मांग उठाई। इस दौरान ट्रांसपोर्टरों और टोल नाके पर मौजूद अधिकारियों के बीच लंबी चर्चा हुई, जिसके बाद अधिकारियों ने मामले के समाधान के लिए तीन दिन का समय मांगा है।

जानकारी के अनुसार, बैतूल से परतवाड़ा तक करीब 70 किलोमीटर लंबी सड़क काफी जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। सड़क पर जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं और यातायात के लिए यह मार्ग अत्यंत कठिन हो गया है। इसके बावजूद कोथलकुंड टोल नाके पर वाहनों से नियमित रूप से टोल वसूली की जा रही है। ट्रांसपोर्ट संघ के सदस्यों का कहना है कि जब सड़क की बुनियादी सुविधाएं ही दुरुस्त नहीं हैं और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसे में उनसे टोल शुल्क वसूलना पूरी तरह से अनुचित और अन्यायपूर्ण है।

बुधवार को ट्रांसपोर्ट संघ के सदस्य बड़ी संख्या में कोथलकुंड टोल नाके पर पहुंचे। उन्होंने टोल वसूली का विरोध करते हुए अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से मांग रखी कि जब तक बैतूल-परतवाड़ा मार्ग की सड़क को ठीक नहीं किया जाता, तब तक इस टोल नाके पर किसी भी प्रकार की वसूली पर रोक लगाई जानी चाहिए। ट्रांसपोर्टरों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे आगे भी इसी तरह का विरोध जारी रखेंगे और टोल देने से इनकार करेंगे।

ट्रांसपोर्टरों ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि जर्जर सड़क के कारण उनके वाहनों को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। गड्ढों वाली सड़क पर चलने से ट्रकों और अन्य भारी वाहनों के पुर्जे जल्दी खराब हो रहे हैं, जिससे वाहनों के रखरखाव का खर्च कई गुना बढ़ गया है। इतना ही नहीं, खराब सड़क के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है, जिससे माल ढुलाई में देरी होती है और व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। ट्रांसपोर्टरों का तर्क है कि टोल शुल्क का मूल उद्देश्य सड़कों के बेहतर रखरखाव और सुविधाओं के लिए होता है, लेकिन यहां 70 किलोमीटर के इस मार्ग पर सड़क की हालत इतनी खराब है कि टोल देने का कोई औचित्य नहीं बचता।

प्रदर्शन की सूचना मिलने पर संबंधित अधिकारी भी कोथलकुंड टोल नाके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ट्रांसपोर्ट संघ के पदाधिकारियों और सदस्यों से बातचीत की तथा उनकी शिकायतों को सुना। अधिकारियों ने ट्रांसपोर्टरों को आश्वासन देते हुए कहा कि उनकी मांगों और सड़क की वर्तमान स्थिति की जानकारी उच्च अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी। उन्होंने मामले के निराकरण और उचित निर्णय लेने के लिए ट्रांसपोर्ट संघ से तीन दिन का समय मांगा है। अधिकारियों ने अपील की कि इस अवधि में शांति बनाए रखी जाए ताकि प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

बैतूल से परतवाड़ा जाने वाला यह मार्ग दोनों क्षेत्रों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस रास्ते से प्रतिदिन बड़ी संख्या में मालवाहक वाहन, बसें और निजी वाहन गुजरते हैं। करीब 70 किलोमीटर लंबे इस मार्ग की खराब स्थिति से न केवल ट्रांसपोर्टरों, बल्कि आम यात्रियों और स्थानीय लोगों को भी रोजमर्रा की आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के मौसम में तो इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे सड़क और भी अधिक खतरनाक हो जाती है। दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।

ट्रांसपोर्ट संघ ने अधिकारियों द्वारा मांगे गए तीन दिन के समय पर सहमति जताई है, हालांकि उनका रुख स्पष्ट है कि यदि इस निर्धारित समय सीमा के भीतर सड़क मरम्मत या टोल वसूली बंद करने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे। संघ के सदस्यों ने कहा कि वे पिछले काफी समय से सड़क की मरम्मत की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई संतोषजनक काम नहीं हुआ है।

कोथलकुंड टोल नाके पर हुए इस प्रदर्शन से कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। हालांकि, अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों के बीच हुई वार्ता के बाद स्थिति सामान्य हो सकी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अधिकारी तीन दिन के भीतर इस मुद्दे पर क्या निर्णय लेते हैं। यदि समय रहते बैतूल-परतवाड़ा मार्ग की मरम्मत का कार्य शुरू नहीं किया गया या टोल वसूली के नियमों में बदलाव नहीं हुआ, तो ट्रांसपोर्ट संघ द्वारा भविष्य में बड़े स्तर पर चक्का जाम या अन्य कड़े कदम उठाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, प्रशासन और ट्रांसपोर्टरों के बीच बातचीत का दौर जारी है और अगले तीन दिन इस पूरे मामले में अहम माने जा रहे हैं।