बालाघाट: जनसंवाद कार्यक्रम में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ता भिड़े, विधायक अनुभा मुंजारे ने प्रशासन पर मनमानी का लगाया आरोप

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में शुक्रवार को आयोजित मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत जनसंवाद कार्यक्रम उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के प्रतिनिधि आपस में भिड़ गए। इस घटना से कार्यक्रम स्थल पर कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया। उपस्थित लोगों द्वारा बीच-बचाव किया गया, अन्यथा यह विवाद मारपीट में बदल सकता था। इस पूरे मामले को लेकर बालाघाट की विधायक अनुभा मुंजारे ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि प्रशासन अपनी तरफ से मनमानी कर रहा है और एक जनहितैषी कार्यक्रम का तेजी से राजनीतिकरण किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को बालाघाट में राज्य सरकार के महत्वपूर्ण ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ के तहत जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य आम जनता से सीधा संवाद स्थापित करना और सरकारी योजनाओं व नीतियों के बारे में उन्हें जागरूक करना था। हालांकि, कार्यक्रम के दौरान ही भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों के प्रतिनिधियों के बीच किसी बात को लेकर तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। देखते ही देखते यह नोकझोंक इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और उनके बीच भिड़ंत की स्थिति उत्पन्न हो गई।
कार्यक्रम स्थल पर मौजूद लोगों और अन्य प्रतिनिधियों ने तत्परता दिखाते हुए बीच-बचाव किया। यदि समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया जाता, तो यह राजनीतिक टकराव शारीरिक मारपीट का रूप ले सकता था। इस घटना ने स्पष्ट कर दिया कि जमीनी स्तर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के कार्यकर्ताओं के बीच तनाव किस हद तक बढ़ चुका है। एक ऐसा कार्यक्रम जो जनता की समस्याओं को सुनने और उनसे संवाद करने के लिए रखा गया था, वह राजनीतिक अखाड़े में तब्दील होते-होते बचा।
इस विवाद और कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था को लेकर बालाघाट की विधायक अनुभा मुंजारे ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विधायक अनुभा मुंजारे ने साफ तौर पर आरोप लगाया कि प्रशासन इस मामले में मनमानी कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनसंवाद जैसे लोकतांत्रिक और जन-केंद्रित कार्यक्रम का राजनीतिकरण किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से अनुचित है। विधायक का यह बयान दर्शाता है कि कार्यक्रम के आयोजन और उसके संचालन में प्रशासनिक स्तर पर जो कमियां रही हैं, उनका सीधा असर कानून व्यवस्था और राजनीतिक सौहार्द पर पड़ा है।
विधायक अनुभा मुंजारे ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए यह भी संकेत दिया कि कार्यक्रम को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के लिए आवश्यक सुरक्षा और प्रबंधन संबंधी कदम नहीं उठाए गए थे। उनका कहना है कि जब दो प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि एक ही मंच या स्थल पर मौजूद हों, तो वहां पहले से ही पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे ताकि किसी भी प्रकार के विवाद को रोका जा सके। लेकिन प्रशासन की ओर से ऐसी कोई ठोस रणनीति नहीं दिखी, जिसके परिणामस्वरूप यह अप्रिय घटना घटी।
‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ राज्य सरकार की एक बड़ी पहल है, जिसके तहत प्रदेश भर में जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस अभियान का लक्ष्य सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाना और आम नागरिकों की शिकायतों का मौके पर ही समाधान करना है। लेकिन बालाघाट में हुई इस घटना ने इस अभियान की गरिमा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब एक जनसंवाद कार्यक्रम में ही राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आपस में भिड़ जाएं, तो आम जनता का ऐसे कार्यक्रमों से विश्वास डगमगाना स्वाभाविक है।
बालाघाट में शुक्रवार को हुई इस घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेता इस घटना को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा सकते हैं। फिलहाल, विधायक अनुभा मुंजारे द्वारा प्रशासन पर लगाए गए मनमानी और राजनीतिकरण के आरोपों ने जिला प्रशासन की भूमिका को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
यह पहला मामला नहीं है जब किसी सरकारी या जनसंपर्क कार्यक्रम में राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच इस तरह का टकराव देखने को मिला हो। हालांकि, बालाघाट की यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान से जुड़ी है। अब यह देखना होगा कि जिला प्रशासन इस विवाद पर क्या रुख अपनाता है और भविष्य में ऐसे कार्यक्रमों को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए क्या नए दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं। वहीं, विधायक अनुभा मुंजारे के आरोपों के बाद यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

