बेखौफ दौड़ रहीं लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां।

सरीला वन रेंज में हरियाली पर संकट, बेखौफ दौड़ रहीं लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियां।
ग्रामीणों ने खदानों तक हरी झाड़ियां पहुंचाने का लगाया आरोप, डीएफओ और एसडीएम ने जांच के बाद कार्रवाई का दिया आश्वासन।
धर्मेन्द्र सिंह यादव
हमीरपुर। सरीला वन रेंज में हरे पेड़ों और झाड़ियों को नुकसान पहुंचाकर वन संपदा के अवैध परिवहन का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में हरी झाड़ियां भरकर ले जाई जा रही हैं। इन झाड़ियों को जलालपुर पुल पार कर जालौन जनपद में संचालित खदानों तक पहुंचाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं, सरीला-बिवांर मार्ग पर रात के समय लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही भी सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों ने वन क्षेत्र में हरियाली को नुकसान पहुंचाए जाने पर नाराजगी जताते हुए वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि वन संपदा का परिवहन नियमानुसार नहीं हो रहा है, तो दिनदहाड़े ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से झाड़ियों की ढुलाई कैसे की जा रही है? ग्रामीणों ने मामले की जांच कर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वन विभाग की निगरानी पर उठे सवाल
सरीला-बिवांर मार्ग पर रात के समय लकड़ियों से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की आवाजाही को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वन क्षेत्र से लकड़ी और झाड़ियों का परिवहन हो रहा है तो इसकी निगरानी कौन कर रहा है? क्या संबंधित वाहनों के पास परिवहन के वैध दस्तावेज और जरूरी अनुमति हैं? ग्रामीणों ने वन विभाग के कुछ जिम्मेदार लोगों की कथित मिलीभगत की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
डीएफओ बोले, जांच कर होगी कार्रवाई
मामले में प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) हमीरपुर अरविंद कुमार ने कहा कि प्रकरण संज्ञान में आया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छूट प्राप्त प्रजातियों को छोड़कर यदि जंगल से वन संपदा काटी जा रही है या वन क्षेत्र में खनन किया जा रहा है, तो जांच के बाद कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
वहीं, उपजिलाधिकारी सरीला विकास कुमार यादव ने भी मामले की जांच कराकर कार्रवाई किए जाने की बात कही है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि वन क्षेत्र में पेड़ों और झाड़ियों को नुकसान पहुंचाने तथा लकड़ियों के परिवहन के आरोपों में कितनी सच्चाई है। ग्रामीणों की निगाहें वन विभाग की कार्रवाई पर टिकी हैं।

