Mon, 12 Oct 202612:18 PM
Mon, Oct 12, 2026Updated 12:18 PM IST
होम › मध्य प्रदेश

बहाली के आदेश नहीं मिलने से पलटे पटवारी: सीएम से मुलाकात के बाद भी कलेक्टरों ने नहीं हटाए निलंबन-बर्खास्तगी के आदेश, स्वामित्व योजना का काम करने से किया इनकार

WhatsAppFacebookX

भोपाल। मध्य प्रदेश में पटवारियों और राज्य सरकार के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर गहरा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात के बाद सोमवार से स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का काम शुरू करने पर सहमत हुए पटवारी अब अपने फैसले से पीछे हट गए हैं। पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने एक वीडियो जारी करके स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से उन्हें जो आश्वासन दिए गए थे, वे जमीनी स्तर पर पूरे नहीं किए जा रहे हैं। इसी कारणवश पटवारियों ने स्वामित्व योजना का काम न करने का ऐलान किया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि संबंधी कार्यों पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने जारी किए गए वीडियो में बताया कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई बैठक में सरकार की ओर से दो महत्वपूर्ण आदेश जारी करने का आश्वासन दिया गया था। इन आदेशों में पटवारियों के निलंबन और बर्खास्तगी को वापस लेने तथा उनकी बहाली सुनिश्चित करने की बात शामिल थी। पटवारियों का कहना है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के आश्वासन पर विश्वास करते हुए सोमवार से स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री का काम शुरू करने की सहमति दे दी थी। हालांकि, जब सोमवार को कार्य शुरू करने की बारी आई, तो स्थिति पूरी तरह से बदली हुई नजर आई।

पटवारियों ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री स्तर से आश्वासन मिलने के बावजूद जिला स्तर पर कलेक्टरों ने निलंबन और बर्खास्तगी के आदेश वापस नहीं लिए हैं। संघ के प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनके निलंबित और बर्खास्त किए गए साथियों की बहाली के औपचारिक आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक वे किसी भी प्रकार का राजस्व कार्य या स्वामित्व योजना से जुड़ा काम नहीं करेंगे। पटवारियों ने इसे सरकार द्वारा दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन करार दिया है और कहा है कि बिना ठोस लिखित आदेशों के वे काम पर लौटने की स्थिति में नहीं हैं।

गौरतलब है कि स्वामित्व योजना केंद्र और राज्य सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके घरों और भूमि का वैध स्वामित्व अधिकार प्रदान करना है। इस योजना के तहत गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण कराकर मैपिंग की जाती है और उसके आधार पर ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड बनाकर दिए जाते हैं। इन संपत्ति कार्डों के आधार पर ही रजिस्ट्री और अन्य कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं। पटवारी इस पूरी प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं, क्योंकि भूमि रिकॉर्ड और राजस्व दस्तावेजों का सत्यापन उन्हीं के माध्यम से होता है। ऐसे में पटवारियों के काम रोक देने से स्वामित्व योजना का कार्य पूरी तरह से ठप होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस विवाद की शुरुआत हाल ही में हुए उस घटनाक्रम से मानी जा रही है, जिसमें कई पटवारियों को निलंबित और बर्खास्त कर दिया गया था। इसके विरोध में पटवारी संघ ने राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी थी और कामकाज ठप करने का निर्णय लिया था। बढ़ते दबाव को देखते हुए राज्य सरकार ने मामले में हस्तक्षेप किया और पटवारी प्रतिनिधियों की मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कराई गई थी। इस मुलाकात के बाद यह उम्मीद जताई जा रही थी कि विवाद सुलझ जाएगा और पटवारी अपना कामकाज सामान्य रूप से शुरू कर देंगे, लेकिन कलेक्टरों द्वारा आदेश वापस न लिए जाने से स्थिति फिर से बिगड़ गई है।

पटवारी संघ के पदाधिकारियों ने वीडियो के माध्यम से प्रदेश भर के सभी पटवारियों से अपील की है कि वे एकजुट रहें और जब तक बहाली के स्पष्ट आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक स्वामित्व योजना या किसी अन्य रजिस्ट्री के कार्य में सहयोग न करें। उनका कहना है कि मौखिक आश्वासनों के भरोसे काम करने से उनके साथियों के साथ अन्याय जारी रहेगा। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे केवल अपने निलंबित और बर्खास्त साथियों के अधिकारों की रक्षा और न्याय के लिए यह कदम उठा रहे हैं।

राजधानी भोपाल सहित मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से भी ऐसी खबरें आ रही हैं कि पटवारियों ने सोमवार को रजिस्ट्री का काम नहीं किया। इससे आम जनता, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जो लोग अपनी जमीन या मकान की रजिस्ट्री करवाने के लिए तहसील और अनुविभागीय कार्यालयों पहुंचे थे, उन्हें बिना काम हुए ही लौटना पड़ा। राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, यदि यह गतिरोध जल्द नहीं टूटा, तो स्वामित्व योजना की समय सीमा और लक्ष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

वहीं, इस पूरे मामले पर अभी तक राज्य सरकार या राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं है कि कलेक्टरों ने आदेश वापस क्यों नहीं लिए हैं या क्या इस संबंध में कोई प्रशासनिक अड़चन है। पटवारी संघ ने सरकार से मांग की है कि मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आश्वासनों को तुरंत लागू किया जाए और निलंबित-बर्खास्त पटवारियों की बहाली के आदेश बिना किसी देरी के जारी किए जाएं। जब तक ऐसा नहीं होता, पटवारियों का यह रुख यथावत बना रहेगा और स्वामित्व योजना का काम प्रभावित होता रहेगा। वंदे भारत न्यूज़ इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और प्रशासन की प्रतिक्रिया आने पर समाचार को अपडेट किया जाएगा।