भास्कर नॉलेज:क्या ईयरबड्स से भी डेटा चोरी और निजता में सेंधमारी हो सकती है?

3 Min Read




आज के स्मार्ट हेडफोन और ईयरबड्स सिर्फ म्यूजिक सुनने के उपकरण नहीं रहे। इनमें हार्ट रेट, बॉडी टेम्परेचर, माइक्रोफोन, लोकेशन, एआई ट्रांसक्रिप्शन और ट्रांसलेशन जैसे फीचर जुड़ चुके हैं। 10 साल में 2,000 से ज्यादा हेडफोन और ईयरबड्स टेस्ट कर चुकीं लॉरेन ने बताया कि इनसे सेंधमारी कैसे होती है और बचने के उपाय क्या हैं? हेडफोन अब कौन-कौन सा डेटा जुटाते हैं? टेक एक्सपर्ट्स के मुताबिक, नए ईयरबड्स में ब्लूटूथ चिप, माइक्रोफोन, सेंसर और एप कनेक्टिविटी होती है। ये डिवाइस हार्ट रेट, चलने-फिरने का पैटर्न, आवाज, लोकेशन और सुनने की क्षमता रिकॉर्ड कर सकते हैं। यह डेटा फोन के जरिए कंपनी के एप तक पहुंचता है। क्या हेल्थ डेटा अपने आप सुरक्षित होता है? डिजिटल प्राइवेसी विशेषज्ञ बताते हैं कि हेल्थ डेटा हमेशा कानून से सुरक्षित नहीं होता। अमेरिका का कानून डॉक्टर और मरीज के बीच की जानकारी पर लागू होता है। लेकिन अगर वही डेटा किसी हेडफोन या फिटनेस एप से इकट्ठा हुआ है, तो वह मार्केटिंग या एनालिटिक्स में इस्तेमाल हो सकता है। क्या कंपनियां यह डेटा बेच सकती हैं? अधिकांश कंपनियां प्राइवेसी पॉलिसी में डेटा शेयरिंग की बात लिखती हैं। यूजर को ऑप्ट-आउट का विकल्प मिल सकता है, लेकिन अक्सर शर्तें जटिल भाषा में होती हैं। टेक एनालिस्ट्स के अनुसार, कुछ डेटा एआई ट्रेनिंग के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है। ब्लूटूथ और एप से खतरा कितना है? टेक कंपनियों के ब्लूटूथ की खामियां सामने आ चुकी हैं। हालांकि बड़ा खतरा एप से होता है। अगर एप अपडेट न हो या जरूरत से ज्यादा परमिशन हो, तो डेटा आसानी से चोरी हो सकता है। यूजर अपनी प्राइवेसी कैसे बचाए? गैर-जरूरी परमिशन बंद रखें। डेटा शेयरिंग से ऑप्ट-आउट करें। एप और फर्मवेयर अपडेट रखें। संवेदनशील बातचीत में ईयरबड्स दूर रखें। ध्यान रहे कि स्मार्ट हेडफोन सुविधा देते हैं, लेकिन डेटा भी लेते हैं। इसलिए इनके उपयोग में सतर्कता जरूरी है। भारत के यूजर के लिए जोखिम क्या है? भारत में ईयरबड्स और फिटनेस एप तेजी से आम हो रहे हैं। लोग इन्हें फोन से जोड़कर लोकेशन, माइक्रोफोन, हेल्थ और फिटनेस परमिशन दे देते हैं। ईयरबड्स शरीर और व्यवहार से जुड़ा डेटा पढ़ सकते हैं। यदि एप को माइक्रोफोन, लोकेशन और हेल्थ डेटा की अनुमति है, तो वह चलने-फिरने, बातचीत, फिटनेस और आदतों से जुड़ी जानकारी जुटा सकता है। इसलिए हेडफोन खरीदते समय प्राइवेसी पॉलिसी भी देखनी चाहिए।



Source link

Share This Article
Leave a Comment