भिंड में नकली खाद के खिलाफ कृषि विभाग की बड़ी कार्रवाई: जम्हौरा में संदिग्ध डीएपी की 40 बोरियां बरामद, चार आरोपियों पर दर्ज हुई FIR

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में नकली और संदिग्ध उर्वरकों की बिक्री तथा परिवहन के खिलाफ कृषि विभाग ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने अटेर क्षेत्र के जम्हौरा गांव में छापेमारी कर संदिग्ध डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) खाद की 40 बोरियां बरामद की हैं। इस मामले में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई है। कृषि विभाग ने बरामद खाद के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिए हैं, ताकि यह पुष्टि हो सके कि खाद असली है या नकली। यह कार्रवाई किसानों को मिलावटी और नकली खाद से बचाने की दिशा में विभाग द्वारा उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कृषि विभाग की टीम को अटेर क्षेत्र में अवैध रूप से खाद के भंडारण और परिवहन की गुप्त सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने जम्हौरा गांव में दबिश दी। जांच के दौरान टीम ने पाया कि एक मकान के भीतर बड़ी मात्रा में खाद का अवैध भंडारण किया गया था। इसके अलावा, एक पिकअप वाहन से बिना किसी वैध दस्तावेज के 40 बोरियां खाद का परिवहन किया जा रहा था। जब अधिकारियों ने वाहन चालक और मौजूद लोगों से खाद से संबंधित बिल, इनवॉइस और अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे, तो वे कोई संतोषजनक जवाब या कागजात पेश नहीं कर सके। दस्तावेजों के अभाव और खाद की संदिग्ध गुणवत्ता को देखते हुए विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए पूरी खेप को जब्त कर लिया।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मौके से बरामद की गई संदिग्ध डीएपी खाद की 40 बोरियों में से नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों को रासायनिक और गुणवत्ता जांच के लिए आधिकारिक प्रयोगशाला भेज दिया गया है। प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि जब्त की गई खाद किस प्रकार की है, उसमें मिलावट है या वह पूरी तरह से नकली है। यदि जांच रिपोर्ट में खाद नकली या घटिया स्तर की पाई जाती है, तो आरोपियों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO) और अन्य सुसंगत कानूनी धाराओं के तहत और भी सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण में चार व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और उनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है।
गौरतलब है कि भिंड जिले में नकली खाद के खिलाफ कृषि विभाग की यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी विभाग ने जिले के फूप और भारौली क्षेत्रों में इसी तरह की छापेमारी कर अवैध खाद के कारोबार का पर्दाफाश किया था। फूप और भारौली में हुई कार्रवाई के बाद अब जम्हौरा में की गई इस छापेमारी से यह साफ हो गया है कि कृषि विभाग ने जिले भर में नकली उर्वरकों के अवैध कारोबार के खिलाफ एक व्यापक और निरंतर अभियान छेड़ रखा है। विभाग लगातार ऐसे तत्वों पर नजर रखे हुए है जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें नकली खाद बेचने या पहुंचाने का काम करते हैं।
विशेषज्ञों और कृषि अधिकारियों का कहना है कि नकली और संदिग्ध खाद का उपयोग किसानों के लिए अत्यंत घातक सिद्ध होता है। खराब गुणवत्ता वाले उर्वरक न केवल फसलों की पैदावार को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और उसके प्राकृतिक स्वास्थ्य को भी लंबे समय के लिए नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार किसान अनजाने में सस्ती दरों पर उपलब्ध ऐसी संदिग्ध खाद खरीद लेते हैं, जिसका परिणाम उन्हें अपनी फसल बर्बाद होने के रूप में भुगतना पड़ता है। यही कारण है कि कृषि विभाग रबी और खरीफ दोनों ही फसलों के बुवाई और खाद देने के सीजन में ऐसे अवैध कारोबारियों के खिलाफ विशेष सतर्कता बरतता है और नियमित चेकिंग अभियान चलाता है।
कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि वे खाद की खरीदारी हमेशा सरकारी मान्यता प्राप्त दुकानों, सहकारी समितियों या लाइसेंस प्राप्त विक्रेताओं से ही करें। खाद खरीदते समय किसानों को हमेशा पक्का बिल (कैश मेमो) लेना चाहिए और बिल पर दुकानदार के लाइसेंस नंबर व हस्ताक्षर की जांच अवश्य करनी चाहिए। इसके साथ ही, खाद की बोरियों पर छपे बैच नंबर, निर्माण तिथि और समाप्ति तिथि को भी ध्यान से पढ़ना चाहिए। यदि किसी किसान को खाद की गुणवत्ता पर कोई संदेह होता है या उसे किसी अवैध भंडारण और परिवहन की जानकारी मिलती है, तो उसे तुरंत निकटतम कृषि विभाग के कार्यालय या संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना देनी चाहिए।
भिंड में जम्हौरा के बाद हुई इस ताजा कार्रवाई से अवैध खाद कारोबारियों में हड़कंप मच गया है। कृषि विभाग का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसानों के हितों से खिलवाड़ करने वालों और नकली खाद का काला कारोबार करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। प्रयोगशाला से नमूनों की जांच रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी, ताकि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके और किसानों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराई जा सके।

