भिंड में पटवारियों और प्रशासन के बीच तनाव चरम पर: दो दिन में 38 पटवारियों को नोटिस, सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में राजस्व विभाग के पटवारियों और जिला प्रशासन के बीच चल रहा विवाद अब एक बड़े टकराव का रूप लेता जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत होने वाले रजिस्ट्री कार्यों को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी तक पहुंच गया है। प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए शुक्रवार को 15 और पटवारियों को नोटिस थमा दिए हैं। इससे पहले गुरुवार को भी 23 पटवारियों को नोटिस जारी किए गए थे। इस प्रकार मात्र दो दिनों के भीतर जिले में कुल 38 पटवारियों को प्रशासनिक नोटिस मिल चुके हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई से पटवारियों में भारी रोष व्याप्त है और उन्होंने शुक्रवार को पूरे दिन कलेक्ट्रेट में बैठकर अपना विरोध दर्ज कराया।
पटवारी संघ ने प्रशासन की इस कार्रवाई के खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार करते हुए चेतावनी दी है कि यदि पटवारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का यह सिलसिला इसी तरह जारी रहा, तो जिले के सभी पटवारी सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा देने का निर्णय ले सकते हैं। संघ का कहना है कि प्रशासन द्वारा लगातार एकतरफा कार्रवाई की जा रही है, जिससे राजस्व कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है और उनके कामकाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
विवाद की जड़ स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री का मामला है। स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी वाले क्षेत्रों (आवासीय भूमि) का सर्वेक्षण करके गांवों के लोगों को उनकी संपत्ति का वैध अधिकार और रिकॉर्ड उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत ड्रोन सर्वेक्षण और अन्य तकनीकी माध्यमों से गांवों का मैपिंग किया जाता है और ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड (प्रॉपर्टी कार्ड) दिए जाते हैं। इन संपत्ति कार्डों के आधार पर ग्रामीण अपनी संपत्ति का पंजीयन (रजिस्ट्री) करा सकते हैं, जिससे उन्हें बैंकों से ऋण प्राप्त करने और अपनी संपत्ति का कानूनी लेनदेन करने में सुविधा होती है।
भिंड जिले में इसी योजना के तहत हो रहे रजिस्ट्री कार्यों को लेकर पटवारी यूनियन और जिला प्रशासन के बीच मतभेद पैदा हो गए। सूत्रों के अनुसार, रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका और जिम्मेदारियों को लेकर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है। प्रशासन चाहता है कि स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री का कार्य तेजी से और बिना किसी बाधा के पूरा किया जाए, ताकि आम जनता को योजना का लाभ समय पर मिल सके। वहीं, पटवारी संघ का मानना है कि प्रशासन उन पर अतिरिक्त कार्य का दबाव बना रहा है और उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
शुक्रवार को जब 15 और पटवारियों को नोटिस थमाए गए, तो इससे नाराज पटवारियों ने कामकाज छोड़कर कलेक्ट्रेट परिसर में धरना दे दिया। वे दिनभर कलेक्ट्रेट में बैठे रहे और प्रशासन से अपने नोटिस वापस लेने तथा वार्ता करने की मांग करते रहे। पटवारियों का कहना था कि बिना उनकी बात सुने सीधे नोटिस थमाना न्यायसंगत नहीं है। कलेक्ट्रेट में पटवारियों के जमा होने से दिनभर हड़कंप की स्थिति बनी रही और राजस्व विभाग से जुड़े अन्य नियमित कार्यों पर भी असर पड़ा।
गौरतलब है कि गुरुवार को 23 पटवारियों को नोटिस दिए जाने के बाद ही पटवारी संघ ने प्रशासन को आगाह कर दिया था, लेकिन शुक्रवार को 15 और नोटिस जारी होने से स्थिति और अधिक तनावपूर्ण हो गई। अब दो दिनों में 38 पटवारियों को नोटिस मिलने के बाद संघ ने सामूहिक इस्तीफे की तैयारी शुरू कर दी है। यदि पटवारी सामूहिक इस्तीफा देते हैं, तो भिंड जिले की राजस्व व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा सकती है। पटवारी राजस्व प्रशासन की सबसे निचली और महत्वपूर्ण इकाई होते हैं, जिनके कंधों पर भू-अभिलेखों के रखरखाव, फसल सर्वेक्षण, राजस्व वसूली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में जमीनी स्तर पर मदद करने की जिम्मेदारी होती है।
पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट किया है कि वे स्वामित्व योजना के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका विरोध प्रशासन द्वारा अपनाए जा रहे रवैये और बिना कारण नोटिस थमाने की कार्रवाई के खिलाफ है। संघ ने मांग की है कि प्रशासन को चाहिए कि वह पटवारियों की समस्याओं को समझे और नोटिस वापस लेकर वार्ता का रास्ता अपनाए।
उधर, जिला प्रशासन ने अभी तक पटवारी संघ की सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। प्रशासन का रुख फिलहाल सख्त बना हुआ है और वह स्वामित्व योजना के कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं दिख रहा है। हालांकि, 38 पटवारियों को नोटिस दिए जाने और शेष पटवारियों के सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी के बाद यह मामला अब जिला स्तर से बढ़कर एक बड़ा प्रशासनिक संकट बनता जा रहा है।
भिंड जिले के इस घटनाक्रम पर राज्य स्तर के राजस्व अधिकारियों और पटवारी महासंघ की भी नजर टिकी हुई है। यदि प्रशासन और पटवारी यूनियन के बीच जल्द कोई समझौता नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में जिले में राजस्व संबंधी कार्य पूरी तरह ठप होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। आम जनता को भी इस टकराव के कारण भू-अभिलेख, खसरा-खतौनी और रजिस्ट्री जैसे जरूरी कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, कलेक्ट्रेट में पटवारियों का धरना समाप्त हो गया है, लेकिन सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी ने प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

