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Fri, Oct 9, 2026Updated 6:43 PM IST
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भोपाल: गरबा में पार्टनर उपलब्ध कराने वाले पैकेज पर हिंदू उत्सव समिति ने जताई आपत्ति, पुलिस कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में नवरात्रि के दौरान आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर ऐसे पैकेज प्रचारित किए जा रहे हैं, जिनमें गरबा आयोजनों में युवाओं को पार्टनर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने इन कथित पैकेजों पर तीखी आपत्ति जताई है। संगठनों का आरोप है कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों की आड़ में इस तरह की गतिविधियां पारंपरिक मूल्यों को ठेस पहुंचा रही हैं। इसी मांग को लेकर गुरुवार को संगठन के पदाधिकारियों ने भोपाल पुलिस कमिश्नर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा और संबंधित संस्थाओं तथा लोगों की जांच कर उचित कार्रवाई करने की मांग की।

हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के नेतृत्व में संगठन के कई पदाधिकारी गुरुवार को पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे। इस दौरान उन्होंने पुलिस कमिश्नर को जो ज्ञापन सौंपा, उसमें विस्तार से यह बताया गया कि किस प्रकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कुछ संस्थाएं या व्यक्ति गरबा के लिए पार्टनर उपलब्ध कराने के नाम पर कथित पैकेज बेच रहे हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म का अत्यंत पवित्र और सांस्कृतिक महत्व का त्योहार है। गरबा और डांडिया जैसे आयोजन शक्ति की उपासना और सामूहिक सांस्कृतिक प्रदर्शन का माध्यम हैं। संगठन का मानना है कि इन धार्मिक आयोजनों में युवाओं को पार्टनर मुहैया कराने के नाम पर चल रहा यह कथित व्यापार न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि समाज में गलत संदेश भी देता है।

हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने अपने ज्ञापन के माध्यम से पुलिस प्रशासन से स्पष्ट रूप से मांग की है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के पैकेज प्रचारित करने वाले सभी संस्थाओं और व्यक्तियों की पहचान की जाए। संगठन ने मांग की है कि इन कथित पैकेजों के पीछे कौन लोग शामिल हैं, उनका असली उद्देश्य क्या है और क्या इसके जरिए किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा है, इसकी गहन जांच होनी चाहिए। चंद्रशेखर तिवारी और अन्य पदाधिकारियों ने पुलिस कमिश्नर से अनुरोध किया कि जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले संस्थानों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक आयोजन के साथ इस प्रकार का खिलवाड़ न हो सके।

भोपाल में नवरात्रि के दिनों में गरबा और डांडिया के आयोजन बड़े पैमाने पर होते हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में हर शाम हजारों की संख्या में युवा, महिलाएं और पुरुष इन आयोजनों में शामिल होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण इन आयोजनों का प्रचार-प्रसार भी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए किया जाने लगा है। कई आयोजक ऑनलाइन टिकट बुकिंग और पास की सुविधा देते हैं। हालांकि, इसी डिजिटल प्रचार के बीच कुछ ऐसे कथित ऑफर्स और पैकेज भी सामने आए हैं, जिन्होंने धार्मिक संगठनों की चिंता बढ़ा दी है। गरबा में पार्टनर उपलब्ध कराने के नाम पर सोशल मीडिया पर चल रहे ये पैकेज अब शहर में चर्चा का विषय बन गए हैं।

इस पूरे मामले में हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने अपनी चिंताओं को जनता और प्रशासन दोनों के सामने रखने का प्रयास किया है। संगठनों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि प्रशासन द्वारा इस मामले में समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो वे इस मुद्दे पर आगे भी विरोध दर्ज करा सकते हैं। फिलहाल, संगठन ने पूरी जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन को सौंपते हुए निष्पक्ष और तेज जांच की अपील की है।

गुरुवार को दिए गए इस ज्ञापन के बाद अब भोपाल पुलिस कमिश्नर कार्यालय की ओर से क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। पुलिस प्रशासन के लिए यह चुनौती होगी कि वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन कथित पैकेजों की सत्यता की जांच करे और यह पता लगाए कि क्या वास्तव में कोई संस्था या व्यक्ति इस तरह की सेवाएं प्रदान कर रहा है। यदि जांच में ये दावे सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि नवरात्रि के पवित्र अवसर पर आयोजित होने वाले गरबा कार्यक्रमों को लेकर पहले भी समय-समय पर विभिन्न संगठनों द्वारा सांस्कृतिक शुद्धता और अनुशासन बनाए रखने की मांगें उठाई जाती रही हैं। वर्तमान मामले में सोशल मीडिया पर पार्टनर उपलब्ध कराने वाले कथित पैकेजों ने इस बहस को एक बार फिर से केंद्र में ला दिया है। वंदे भारत न्यूज़ की इस रिपोर्ट में बताई गई सभी जानकारी संगठन द्वारा पुलिस कमिश्नर को सौंपे गए ज्ञापन और उनके द्वारा व्यक्त की गई आपत्तियों पर आधारित है। पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक इस ज्ञापन पर कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से जारी नहीं की गई है। आगे की जांच और कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।