भोपाल में 12 अक्टूबर से शुरू होगा ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’, 10 से अधिक कला-विधाओं में प्रस्तुत होंगे रामायण के प्रसंग

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी 12 अक्टूबर 2026 से ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह सात दिवसीय महोत्सव 18 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। इस उत्सव का आयोजन शहर के प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र रविंद्र भवन में किया जाएगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में दस से अधिक विभिन्न कला और विधाओं के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ ही इस उत्सव में विदेशी विद्वानों और कलाकारों की भागीदारी भी सुनिश्चित है, जो इसे एक वैश्विक सांस्कृतिक मंच का स्वरूप प्रदान करेगी।
‘वंदे भारत न्यूज़’ की रिपोर्ट के अनुसार, रविंद्र भवन में आयोजित होने वाला यह अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव भारतीय संस्कृति, परंपरा और रामायण कालीन गाथाओं को विश्व पटल पर प्रस्तुत करने का एक बड़ा माध्यम बनने जा रहा है। 12 अक्टूबर से शुरू होकर 18 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर आयोजकों की ओर से व्यापक स्तर पर कार्य किया जा रहा है। इस उत्सव की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें केवल एक ही प्रकार की कला पर निर्भर नहीं रहा जाएगा, बल्कि दस से भी अधिक कला विधाओं के जरिए रामायण के विभिन्न प्रसंगों को दर्शकों के समक्ष जीवंत किया जाएगा। इन कला विधाओं में शास्त्रीय नृत्य, लोक नृत्य, नाटक, संगीत और अन्य पारंपरिक प्रस्तुतियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि सभी विधाओं की विस्तृत सूची अभी सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है।
इस उत्सव को ‘अंतर्राष्ट्रीय’ स्वरूप देने के लिए विदेशों से भी विद्वानों और कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। ये विदेशी विद्वान और कलाकार अपने देशों में रामायण की परंपरा और उसकी व्याख्या को किस प्रकार देखा और समझा जाता है, इस पर अपनी प्रस्तुतियां और विचार साझा करेंगे। यह बात विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्योंकि रामायण केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दक्षिण-पूर्व एशिया सहित कई अन्य देशों में भी इसके विभिन्न रूप और संस्करण सदियों से प्रचलित हैं। विदेशी कलाकारों की उपस्थिति से भोपाल के दर्शकों को यह जानने और समझने का अवसर मिलेगा कि विश्व के अन्य हिस्सों में भगवान श्रीराम की लीलाओं का मंचन और अध्ययन कैसे किया जाता है।
रविंद्र भवन, जो भोपाल का एक प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और कला केंद्र है, इस प्रकार के बड़े आयोजनों के लिए हमेशा से उपयुक्त स्थल रहा है। 12 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चलने वाले इस सात दिवसीय उत्सव में हर दिन अलग-अलग कला विधाओं और अलग-अलग प्रसंगों पर आधारित कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाएंगे। आयोजकों का उद्देश्य यह है कि रामायण के संदेशों को कला और संस्कृति के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। नृत्य, संगीत और नाटक जैसी विधाएं कथा को केवल सुनने के बजाय उसे दृश्य और श्रव्य दोनों रूपों में अनुभव करने का अवसर प्रदान करती हैं, जिससे दर्शकों का गहरा जुड़ाव स्थापित होता है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल में सांस्कृतिक आयोजनों की एक लंबी परंपरा रही है और अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव इसी परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दस से अधिक कला विधाओं का एक साथ एक ही मंच पर समावेश अपने आप में एक दुर्लभ सांस्कृतिक अनुभव होगा। इसमें शास्त्रीय नृत्य शैलियों जैसे भरतनाट्यम, कथक, ओडिसी या कुचिपुड़ी के माध्यम से रामायण के प्रसंगों की झलक देखने को मिल सकती है। इसके अतिरिक्त, विभिन्न क्षेत्रों की लोक कलाओं और पारंपरिक रामलीला के अलग-अलग रूपों को भी इस उत्सव में स्थान दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
विदेशी विद्वानों की भागीदारी इस उत्सव को केवल एक मनोरंजक कार्यक्रम से ऊपर उठाकर एक गंभीर सांस्कृतिक और शैक्षणिक मंच बनाती है। रामायण पर शोध करने वाले अंतर्राष्ट्रीय विद्वानों के व्याख्यान और उनके द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले शोध पत्र इस आयोजन की शोभा बढ़ाएंगे। हालांकि, इस संबंध में अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किन-किन देशों से विद्वान और कलाकार भोपाल पहुंचेंगे, लेकिन आयोजन के अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप को देखते हुए यह माना जा रहा है कि एशिया और अन्य महाद्वीपों के प्रतिनिधि इसमें शामिल होंगे।
12 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले इस उत्सव का समापन 18 अक्टूबर 2026 को होगा। सात दिनों तक रविंद्र भवन में राममय वातावरण रहेगा। भोपाल के कला प्रेमियों, साहित्यकारों, शोधार्थियों और आम नागरिकों के लिए यह उत्सव एक बड़ा आकर्षण केंद्र होगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आयोजकों ने इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है कि कार्यक्रम में प्रामाणिकता और कलात्मक गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए। किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचने के लिए कला विधाओं के विशेषज्ञों का मार्गदर्शन लिया जा रहा है।
कुल मिलाकर, भोपाल के रविंद्र भवन में 12 से 18 अक्टूबर तक आयोजित होने वाला ‘अंतर्राष्ट्रीय श्रीरामलीला उत्सव’ भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और उसके वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। दस से अधिक कला विधाओं में प्रस्तुत होने वाले प्रसंग और विदेशी विद्वानों व कलाकारों की सक्रिय भागीदारी इस सात दिवसीय आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पर्याप्त हैं। आने वाले दिनों में इस उत्सव के विस्तृत कार्यक्रम और शामिल होने वाले कलाकारों की सूची जारी होने की संभावना है।

