भोपाल: टीईटी का विरोध कर रहे शिक्षकों ने नीलम पार्क में किया आंदोलन, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से संवाद की जताई उम्मीद

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का विरोध कर रहे शिक्षकों ने एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। राजधानी के नीलम पार्क में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए और उन्होंने अपनी बात सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक पहुंचाने की अपील की। आंदोलनरत शिक्षकों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार के साथ किसी भी प्रकार का टकराव नहीं है, बल्कि वे अपनी जायज मांगों पर संवाद और न्याय चाहते हैं। शिक्षकों ने नारे लगाते हुए कहा कि उन्हें न दबाव चाहिए और न ही टकराव चाहिए, बस उनकी मांगों पर संवाद और न्याय चाहिए।
नीलम पार्क में आयोजित इस धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति अपना विश्वास व्यक्त किया। प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने ‘दो इडली-एक डोसा, मोहन यादव पर ही भरोसा’ जैसे नारों के जरिए यह संदेश देने का प्रयास किया कि वे राज्य के मुखिया से समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। शिक्षकों का मानना है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उनकी समस्याओं को समझते हैं और वे ही इस मुद्दे का उचित समाधान निकाल सकते हैं। इसी भरोसे के आधार पर शिक्षक पिछले कुछ समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपना आंदोलन चला रहे हैं और सरकार से संवाद का रास्ता खुला रखने की गुजारिश कर रहे हैं।
शिक्षकों का यह आंदोलन मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के प्रावधानों का विरोध करने के लिए किया जा रहा है। आंदोलन में शामिल शिक्षकों का कहना है कि टीईटी की वर्तमान व्यवस्था और उससे जुड़ी शर्तें उनके हितों के अनुकूल नहीं हैं। वे इस परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग कर रहे हैं ताकि पहले से कार्यरत और योग्य शिक्षकों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े। शिक्षकों ने नीलम पार्क से अपनी आवाज बुलंद करते हुए कहा कि भोपाल के नीलम पार्क से उठ रही शिक्षकों की यह आवाज अब मुख्यमंत्री तक पहुंचनी चाहिए, ताकि उनके दर्द और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा सके।
राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में चल रहे इस आंदोलन ने राज्य भर के शिक्षकों का ध्यान खींचा है। आंदोलनकारी शिक्षकों ने प्रशासन और सरकार से अपील की है कि उनके साथ बातचीत का दौर शुरू किया जाए। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे कोई अड़ियल रवैया नहीं अपना रहे हैं और न ही वे किसी तरह का दबाव बनाना चाहते हैं। उनका एकमात्र लक्ष्य अपने अधिकारों की रक्षा करना और शिक्षा नीति से जुड़े इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर सरकार से संवाद स्थापित करना है। शिक्षकों ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें दबाव की राजनीति नहीं करनी है, बल्कि वे टकराव से बचते हुए एक सकारात्मक समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।
इस पूरे मामले में शिक्षकों की एक ही आस बची हुई है और वह है मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समाधान की उम्मीद। आंदोलनरत शिक्षकों ने विश्वास जताया है कि मुख्यमंत्री का कार्यालय उनकी बात सुनेगा और उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगा। शिक्षकों ने ‘अब मुख्यमंत्री तक पहुंचे हमारी बात’ का संकल्प दोहराते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस संवाद नहीं होता, वे नीलम पार्क में शांतिपूर्ण तरीके से बैठे रहेंगे। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि शिक्षकों की इन मांगों को नजरअंदाज न किया जाए, क्योंकि ये मांगें सीधे तौर पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था और लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़ी हुई हैं।
नीलम पार्क में जारी इस धरना-प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने पूरी तरह से अनुशासन और शांति का परिचय दिया है। उनका स्पष्ट मत है कि आंदोलन का स्वरूप लोकतांत्रिक होना चाहिए और सरकार के साथ मिलकर काम करने का रास्ता निकाला जाना चाहिए। शिक्षकों ने ‘न दबाव चाहिए, न टकराव चाहिए’ का नारा देकर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सरकार के साथ खड़े होने को तैयार हैं, बशर्ते उनकी बात सुनी जाए।
मध्य प्रदेश में शिक्षकों की मांगों को लेकर समय-समय पर आंदोलन होते रहे हैं, लेकिन इस बार शिक्षकों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर विशेष भरोसा जताया है। उनका कहना है कि वर्तमान नेतृत्व शिक्षकों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकता है। टीईटी का विरोध कर रहे इन शिक्षकों ने नीलम पार्क से जो आवाज उठाई है, उसका केंद्र बिंदु यही है कि संवाद के जरिए हर समस्या का हल निकाला जा सकता है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार और मुख्यमंत्री कार्यालय इस आंदोलन पर क्या रुख अपनाता है और शिक्षकों की मांगों पर संवाद की प्रक्रिया कब शुरू होती है। फिलहाल, भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षकों का यह आंदोलन अपनी मांगों को लेकर जारी है और वे मुख्यमंत्री से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

