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Fri, Oct 9, 2026Updated 1:39 PM IST
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बिहार में कानून व्यवस्था को लेकर CM सम्राट चौधरी की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, महिला सुरक्षा और गंभीर अपराधों पर हुई चर्चा; DGP समेत वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

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पटना। बिहार में कानून व्यवस्था की स्थिति और हाल के दिनों में बढ़ी आपराधिक घटनाओं को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को अपने आवास पर एक अत्यंत महत्वपूर्ण उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। इस बैठक में राज्य में कानून व्यवस्था की वर्तमान स्थिति, विशेष रूप से महिलाओं के खिलाफ हो रही घटनाओं और अन्य गंभीर आपराधिक मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) सहित प्रशासन और पुलिस विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। यह बैठक ऐसे समय में आयोजित की गई है जब राज्य में कुछ आपराधिक घटनाओं को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता दिखाई जा रही है और सरकार कानून व्यवस्था को और अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने पर जोर दे रही है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा राज्य में शांति व्यवस्था बनाए रखना और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने हाल के दिनों में बिहार के विभिन्न जिलों में महिलाओं के खिलाफ हुई घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने इन मामलों की बारीकी से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों से पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और पीड़िताओं को त्वरित न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

बैठक में महिला सुरक्षा के अलावा राज्य में हुए अन्य गंभीर आपराधिक मामलों पर भी व्यापक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस महानिदेशक (DGP) और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से अपराध नियंत्रण को लेकर अब तक उठाए गए कदमों और भविष्य की रणनीति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गंभीर अपराधों में शामिल आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए और उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जाए ताकि समाज में कानून का भय बना रहे। बैठक में इस बात पर भी मंथन किया गया कि किस तरह से पुलिस पेट्रोलिंग को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है, ताकि अपराधियों के हौसले पस्त किए जा सकें।

इस समीक्षा बैठक में बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) के साथ-साथ गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। सभी अधिकारियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की कानून व्यवस्था की स्थिति से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक के दौरान अपराध के आंकड़ों, लंबित मामलों की स्थिति और पुलिस बल की तैनाती जैसे अहम मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आम जनता में पुलिस के प्रति विश्वास बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर लोगों की शिकायतों का निपटारा संवेदनशीलता और समयबद्ध तरीके से होना चाहिए, जिससे लोगों को पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भरोसा बना रहे।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक में उपस्थित अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कानून व्यवस्था के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदेश की जनता, खासकर महिलाओं और कमजोर वर्गों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान करे। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि जिन जिलों में अपराध के ग्राफ में बढ़ोतरी देखी गई है, वहां के पुलिस अधीक्षकों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त बल की तैनाती की जाए।

बता दें कि बिहार में कानून व्यवस्था हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा अपने आवास पर बुलाई गई यह उच्चस्तरीय बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि राज्य सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। महिलाओं के खिलाफ बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन के लिए चुनौतियां खड़ी की हैं, जिसके मद्देनजर मुख्यमंत्री ने स्वयं पहल करते हुए इस समीक्षा बैठक का आयोजन किया। बैठक में लिए गए निर्णयों और दिए गए निर्देशों का असर आने वाले दिनों में राज्य की कानून व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।

अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को आश्वस्त किया कि बैठक में दिए गए सभी निर्देशों का तत्काल प्रभाव से अनुपालन किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय की ओर से सभी जिलों के पुलिस कप्तानों को अलर्ट रहने और अपने-अपने क्षेत्रों में गश्ती व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश जारी किए जाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बैठक के अंत में यह भी कहा कि वे कानून व्यवस्था की स्थिति की नियमित समीक्षा करते रहेंगे और अगर कोई अधिकारी अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस उच्चस्तरीय बैठक से राज्य के पुलिस और प्रशासनिक महकमे में सक्रियता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।