बिलासपुर: 27.57 लाख के गांजा तस्करी कांड की महिला सरगना अनुपमा मोहंती सेंट्रल जेल परिसर से गिरफ्तार, बंद आरोपियों को दे रही थी धमकी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में लगभग 27.57 लाख रुपये मूल्य के गांजा तस्करी मामले में फरार चल रही मुख्य महिला आरोपी अनुपमा मोहंती (45) को सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) ने बुधवार को सेंट्रल जेल के बाहर से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह महिला आरोपी इसी प्रकरण में पहले से सेंट्रल जेल में बंद चार अन्य आरोपियों से संपर्क करने और उन्हें धमकाने के उद्देश्य से जेल परिसर तक पहुंची थी। इस दौरान जीआरपी की सतर्क टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। यह घटना बिलासपुर के अपराधिक इतिहास में एक अत्यंत चौंकाने वाली घटना मानी जा रही है, क्योंकि कोई फरार सरगना सीधे जेल परिसर में पहुंचकर अपने ही साथियों को धमकाए, यह अपने आप में सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के हौसले दोनों पर बड़े सवाल खड़े करता है।
पुलिस द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के मुताबिक, अनुपमा मोहंती इस पूरे गांजा तस्करी नेटवर्क की मुख्य सरगना है। वह लंबे समय से कानून के शिकंजे से बचने के लिए फरार चल रही थी। उस पर करोड़ों रुपये के अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी का गंभीर आरोप है। बिलासपुर पुलिस और जीआरपी की संयुक्त कार्रवाई के तहत अब तक इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन मुख्य सरगना होने के नाते अनुपमा मोहंती की गिरफ्तारी जांच एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता थी। बुधवार को जब वह बेखौफ होकर सेंट्रल जेल के बाहर पहुंची, तो जीआरपी की निगरानी टीम ने उसे पहचान लिया और तुरंत कार्रवाई करते हुए हिरासत में ले लिया।
अनुपमा मोहंती के तस्करी के तरीके की बात करें तो पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि वह युवाओं को आर्थिक लाभ और भारी कमीशन का लालच देकर गांजा तस्करी के काम में लगाती थी। उसके इस जाल में कई युवा फंस चुके हैं, जिन्हें वह अवैध मादक पदार्थों की ढुलाई और बिक्री के लिए उपयोग करती थी। कमीशन के जरिए वह युवाओं को अपने नियंत्रण में रखती थी, ताकि अगर कोई पकड़ा भी जाए तो वह सीधे उसका नाम न ले। यही कारण है कि 27.57 लाख रुपये के इस बड़े गांजा तस्करी मामले में कई लोग शामिल थे, लेकिन पर्दे के पीछे रहकर पूरी योजना का संचालन अनुपमा मोहंती ही कर रही थी।
इस मामले की एक और गंभीर बात यह सामने आई है कि अनुपमा मोहंती जेल में बंद अपने ही गुर्गों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रही थी। पुलिस के मुताबिक, वह सेंट्रल जेल इसलिए पहुंची थी ताकि इस प्रकरण में पहले से बंद चार आरोपियों से संपर्क किया जा सके और उन्हें धमकाया जा सके। उसका मकसद यह था कि ये चारों आरोपी पुलिस पूछताछ या अदालत में उसके खिलाफ कोई बयान न दें या नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी साझा न करें। एक फरार आरोपी का जेल परिसर तक आकर बंद आरोपियों को धमकाने का प्रयास करना यह दर्शाता है कि इस तस्करी नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसके संचालक कितने बेखौफ हो चुके थे।
सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) की इस सफल कार्रवाई को बिलासपुर पुलिस प्रशासन की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। जीआरपी की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के, अपनी नियमित निगरानी और सतर्कता के आधार पर इस फरार महिला सरगना को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के बाद अनुपमा मोहंती को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए संबंधित थाना पुलिस को सौंप दिया गया है। अब पुलिस इस बात की गहन जांच कर रही है कि आखिरकार वह जेल परिसर के भीतर बंद आरोपियों तक कैसे संदेश पहुंचाने वाली थी और क्या उसके साथ कोई और व्यक्ति भी था जिसने उसे जेल तक पहुंचने में मदद की।
बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में गांजा तस्करी एक बड़ी समस्या रही है। छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गांजे की बड़ी खेप अक्सर ट्रेनों और सड़क मार्ग के जरिए लाई जाती है। इसी कारण से जीआरपी और स्थानीय पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। 27.57 लाख रुपये के इस जब्त गांजे का मामला इस बात का प्रमाण है कि तस्कर कितने बड़े पैमाने पर अवैध कारोबार चला रहे हैं। अनुपमा मोहंती जैसे सरगनाओं की गिरफ्तारी से न केवल तस्करी के नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है, बल्कि उन युवाओं को भी एक संदेश गया है जो कमीशन के लालच में इस तरह के अवैध कारोबार में शामिल होते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अनुपमा मोहंती से पूछताछ के बाद कई और अहम खुलासे होने की संभावना है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस 27.57 लाख रुपये के गांजा तस्करी रैकेट में और कौन-कौन से लोग शामिल थे और इस अवैध कारोबार से अर्जित धन का उपयोग कहां-कहां किया जा रहा था। फिलहाल, महिला सरगना की गिरफ्तारी के बाद बिलासपुर पुलिस और जीआरपी की टीमें पूरी सतर्कता के साथ मामले की तह तक जाने में जुटी हुई हैं।

