बिलासपुर: पुराने बस स्टैंड पर अतिक्रमण हटाने पहुंची निगम टीम को मूर्ति विक्रेताओं ने घेरा, गार्डन की दीवार से मूर्तियां हटाने पर विवाद और धक्का-मुक्की

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में रविवार को नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ टीम और मूर्ति विक्रेताओं के बीच उस समय तीखा विवाद हो गया, जब निगम के अधिकारी और कर्मचारी पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में सार्वजनिक स्थान से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने पहुंचे। यह पूरा मामला पुराने बस स्टैंड स्थित राजीव प्लाजा के ठीक सामने बने गार्डन की दीवार पर मूर्तियों की दुकानें लगाने और उन्हें हटाने को लेकर शुरू हुआ। निगम की टीम ने जैसे ही गार्डन की दीवार पर रखी मूर्तियों को जब्त करने और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की, वहां मौजूद मूर्ति विक्रेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया और निगम की टीम को चारों तरफ से घेर लिया। विरोध के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी उत्पन्न हो गई, जिससे कुछ देर के लिए मौके पर तनाव का माहौल बन गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिलासपुर नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ टीम रविवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में अवैध कब्जे हटाने के नियमित अभियान के तहत पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में पहुंची थी। इस टीम का मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्थलों, सड़कों और सरकारी भूमिका पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर आम नागरिकों की सुविधा सुनिश्चित करना था। टीम जब राजीव प्लाजा के सामने स्थित गार्डन के पास पहुंची तो उन्होंने देखा कि गार्डन की बाउंड्री दीवार का उपयोग मूर्ति विक्रेताओं द्वारा अपनी मूर्तियां प्रदर्शित करने और दुकान चलाने के लिए किया जा रहा था। निगम के नियमों के मुताबिक किसी भी सार्वजनिक गार्डन या उसकी दीवार का व्यावसायिक उपयोग नहीं किया जा सकता है, इसलिए टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए इन मूर्तियों को हटाने और जब्त करने का निर्देश दिया।
जैसे ही निगम के कर्मचारियों ने मूर्तियों को वहां से हटाना शुरू किया, मूर्ति विक्रेताओं ने इसका भारी विरोध जताया। विक्रेताओं का कहना था कि वे लंबे समय से इस स्थान पर मूर्तियों का व्यवसाय कर रहे हैं और उनकी आजीविका इसी पर निर्भर है। निगम की कार्रवाई से उनके व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। विरोध कर रहे विक्रेताओं ने निगम की टीम को काम करने से रोकने की कोशिश की और उन्हें घेर लिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी हुई और देखते ही देखते बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। हालांकि, मौके पर मौजूद अन्य लोगों और निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने स्थिति को संभालने का प्रयास किया ताकि कोई बड़ा विवाद या अनहोनी न हो सके।
बिलासपुर का पुराना बस स्टैंड इलाका शहर के सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में से एक माना जाता है। यहां दिनभर भारी मात्रा में लोगों का आवागमन बना रहता है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण होने से पैदल चलने वालों और वाहनों की आवाजाही में अक्सर बाधा उत्पन्न होती रही है। राजीव प्लाजा के सामने का गार्डन शहर के इस हिस्से में हरियाली और खुले स्थान के लिहाज से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके आसपास लगातार व्यावसायिक गतिविधियों और अतिक्रमण की शिकायतें मिलती रही हैं। नगर निगम ने शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के लिए समय-समय पर विशेष अभियान चलाए हैं, लेकिन व्यापारियों और फेरीवालों के विरोध के कारण कई बार इन अभियानों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
इस मामले में नगर निगम का स्पष्ट रुख है कि सार्वजनिक संपत्तियों और गार्डनों की दीवारों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम के अधिकारियों का मानना है कि शहर की सुंदरता और नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अतिक्रमण हटाओ अभियान को लगातार जारी रखा जाना आवश्यक है। गार्डन की दीवारों पर दुकानें लगाने से न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वहां के सौंदर्यीकरण और स्वच्छता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। निगम ने पहले भी कई बार विक्रेताओं को सार्वजनिक स्थानों से हटने के लिए चेतावनी दी है, लेकिन जब चेतावनियों का असर नहीं होता तो निगम को सख्त कार्रवाई करनी पड़ती है।
रविवार को हुए इस विवाद के बाद पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में कुछ समय के लिए हड़कंप मचा रहा। मूर्ति विक्रेताओं और निगम टीम के बीच हुई धक्का-मुक्की की घटना ने एक बार फिर शहर में अतिक्रमण और सड़क किनारे व्यापार को लेकर चल रहे विवाद को सामने ला दिया है। हालांकि, इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई सूचना नहीं है और न ही किसी बड़े नुकसान की पुष्टि हुई है। निगम की टीम ने विरोध के बावजूद अपने अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
अतिक्रमण हटाओ अभियान और फेरीवालों या छोटे विक्रेताओं के बीच टकराव बिलासपुर ही नहीं, बल्कि देश के कई शहरों में एक आम समस्या बन चुकी है। एक तरफ नगर निगमों पर शहर को व्यवस्थित और अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी होती है, वहीं दूसरी तरफ छोटे व्यापारी अपनी जीविका का हवाला देकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग करते हैं। बिलासपुर नगर निगम को इस दिशा में संतुलित नीति अपनाने की आवश्यकता है, जिसमें सार्वजनिक स्थानों को अतिक्रमण से मुक्त रखने के साथ-साथ विक्रेताओं के पुनर्वास या उन्हें वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा सके।
फिलहाल, रविवार को पुराने बस स्टैंड पर राजीव प्लाजा के सामने हुई इस घटना के बाद निगम प्रशासन और मूर्ति विक्रेताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में निगम इस क्षेत्र में अतिक्रमण को लेकर क्या अगला कदम उठाता है और विक्रेताओं की ओर से इस कार्रवाई पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है। शहर के इस प्रमुख चौराहे पर सुचारू यातायात और साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थानों को बनाए रखने के लिए निगम की कार्रवाई को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

