Mon, 12 Oct 20266:09 PM
Mon, Oct 12, 2026Updated 6:09 PM IST
होम › छत्तीसगढ़

बिलासपुर: पुराने बस स्टैंड पर मूर्ति विक्रेताओं और निगम की अतिक्रमण टीम के बीच विवाद, जब्ती कार्रवाई का हुआ कड़ा विरोध

WhatsAppFacebookX

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में रविवार को नगर निगम की अतिक्रमण हटाओ टीम और मूर्ति विक्रेताओं के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की का मामला सामने आया है। यह पूरा घटनाक्रम शहर के पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में स्थित राजीव प्लाजा के ठीक सामने वाले गार्डन की दीवार पर हुआ, जहां मूर्तियों की दुकानें लगाई गई थीं। नगर निगम की टीम जब इन दुकानों को हटाने और सार्वजनिक स्थल से अतिक्रमण मुक्त कराने की नियमित कार्रवाई के लिए पहुंची, तो वहां मौजूद विक्रेताओं ने इसका कड़ा विरोध किया। निगम कर्मियों द्वारा मूर्तियां जब्त करने की प्रक्रिया शुरू करते ही विक्रेताओं ने एकजुट होकर पूरी टीम को घेर लिया, जिससे मौके पर तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार को नगर निगम बिलासपुर की अतिक्रमण निरोधक दस्ता पुराने बस स्टैंड क्षेत्र में अवैध कब्जे हटाने के अभियान के तहत पहुंची थी। इस दौरान टीम का ध्यान राजीव प्लाजा के सामने बने गार्डन की दीवार पर गया, जहां कुछ विक्रेताओं ने मूर्तियों की दुकानें सजा रखी थीं। निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने इन दुकानों को सार्वजनिक संपत्ति पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए इन्हें तत्काल हटाने का निर्देश दिया। जब विक्रेताओं ने स्वयं दुकानें नहीं हटाईं, तो निगम की टीम ने मूर्तियों को जब्त करने की औपचारिक कार्रवाई आरंभ कर दी।

निगम टीम की इस जब्ती कार्रवाई से मूर्ति विक्रेताओं में भारी आक्रोश फैल गया। जैसे ही कर्मचारियों ने मूर्तियों को उठाना शुरू किया, वहां मौजूद सभी विक्रेता एक साथ विरोध में खड़े हो गए। उन्होंने निगम की टीम को चारों ओर से घेर लिया और अपनी दुकानों से मूर्तियां हटाने का कड़ा विरोध जताया। बताया जा रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति भी पैदा हो गई। विक्रेताओं का कहना था कि वे यहीं अपना व्यवसाय चला रहे हैं और अचानक इस तरह की कार्रवाई से उनकी आजीविका प्रभावित हो रही है। वहीं, निगम की टीम का स्पष्ट रुख था कि गार्डन की दीवार और सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

बिलासपुर का पुराने बस स्टैंड क्षेत्र शहर का एक अत्यंत व्यस्त और संवेदनशील व्यापारिक इलाका है। यहां हर समय लोगों और वाहनों का भारी आवागमन बना रहता है। ऐसे में सार्वजनिक स्थानों, गार्डनों की दीवारों और फुटपाथों पर दुकानें लगने से न केवल राहगीरों को असुविधा होती है, बल्कि यातायात व्यवस्था भी बाधित होती है। नगर निगम बिलासपुर समय-समय पर इस क्षेत्र में अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाता रहा है, ताकि सड़कों और सार्वजनिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त रखा जा सके। रविवार को हुई यह कार्रवाई भी इसी नियमित अभियान का हिस्सा थी, लेकिन विक्रेताओं के तीव्र विरोध के कारण यह मामला विवाद में बदल गया।

इस घटनाक्रम ने एक बार फिर शहर में सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण और छोटे विक्रेताओं की आजीविका के बीच चल रहे टकराव को उजागर किया है। मूर्ति विक्रेताओं का तर्क है कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना सीधे जब्ती की कार्रवाई करना उचित नहीं है, जबकि नगर निगम का मानना है कि सार्वजनिक संपत्ति पर कब्जा करना नियमों का सीधा उल्लंघन है। गार्डन की दीवार पर मूर्तियां रखकर दुकान लगाना न केवल सार्वजनिक सौंदर्य को प्रभावित करता है, बल्कि सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आता है।

हालांकि, इस पूरे विवाद और धक्का-मुक्की के बाद मौके पर स्थिति को कैसे नियंत्रित किया गया और निगम की टीम अंततः मूर्तियों को जब्त करने में सफल रही या नहीं, इस बारे में अभी तक कोई पुष्ट सूचना उपलब्ध नहीं हो सकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि इस घटना को लेकर नगर निगम प्रशासन द्वारा विक्रेताओं के खिलाफ कोई औपचारिक प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी या भविष्य में इस स्थान पर दोबारा अतिक्रमण न हो इसके लिए कोई स्थायी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाएगी।

वंदे भारत न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में नगर निगम बिलासपुर के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। अधिकारियों की प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण आने पर मामले में और अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है। फिलहाल, पुराने बस स्टैंड पर रविवार को हुए इस विवाद ने स्थानीय व्यापारियों और आम नागरिकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर में अतिक्रमण के खिलाफ निगम की कार्रवाई और विक्रेताओं के विरोध का यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर क्या रूप लेता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।