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Fri, Oct 9, 2026Updated 6:42 PM IST
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बक्सर में उत्पाद पुलिस की बड़ी कार्रवाई: कागज की पेटियों के बीच छिपाकर ले जाई जा रही 1332 लीटर शराब जब्त, 16 लाख रुपये की खेप दिल्ली से समस्तीपुर पहुंचाई जानी थी; चालक गिरफ्तार

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बक्सर। बिहार में संपूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद तस्कर अवैध शराब की खेप को राज्य के अंदर पहुंचाने के लिए लगातार नए-नए और अनोखे तरीके अपना रहे हैं। ताजा मामले में बक्सर जिले की उत्पाद पुलिस ने एक बड़ी और सफल कार्रवाई करते हुए डीसीएम ट्रक में कागज की पेटियों के बीच बेहद शातिराना ढंग से छिपाकर ले जाई जा रही भारी मात्रा में विदेशी शराब को बरामद किया है। उत्पाद पुलिस की इस छापेमारी में कुल 1332 लीटर अवैध शराब जब्त की गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस पूरी खेप की अनुमानित कीमत लगभग 16 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि शराब की यह बड़ी खेप दिल्ली से लाई जा रही थी और इसे बिहार के समस्तीपुर जिले तक पहुंचाया जाना था। हालांकि, तस्करों की यह योजना बक्सर में ही उत्पाद पुलिस की सतर्कता के कारण विफल हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार, बक्सर उत्पाद पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक डीसीएम ट्रक के जरिए भारी मात्रा में अवैध शराब की खेप बिहार में प्रवेश करने वाली है। इस सूचना के आधार पर उत्पाद पुलिस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए नाकाबंदी की और संदिग्ध ट्रक को रोककर उसकी सघन तलाशी ली। ट्रक के ऊपरी हिस्से में कागज की पेटियां भरी हुई थीं, जिन्हें देखकर ऐसा प्रतीत होता था कि यह कोई सामान्य व्यापारिक मालवाहक वाहन है। लेकिन जब उत्पाद पुलिस के कर्मियों ने इन कागज की पेटियों को हटाकर गहराई से जांच शुरू की, तो उनके होश उड़ गए। कागज की पेटियों के पीछे और नीचे बड़ी मात्रा में शराब की बोतलें और कार्टून छिपाकर रखे गए थे। तस्करों ने कागज के सामान की आड़ में शराब की खेप को इस तरह से व्यवस्थित किया था कि ऊपरी तौर पर या साधारण जांच में किसी को भी इस अवैध माल का शक न हो सके।

इस कार्रवाई के दौरान उत्पाद पुलिस ने ट्रक में मौजूद चालक को भी तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार चालक से पूछताछ की जा रही है ताकि इस पूरे तस्करी नेटवर्क के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जा सके। शराब की यह खेप हरियाणा से तस्करी करके लाई जा रही थी और दिल्ली होते हुए इसे बिहार के समस्तीपुर जिले में पहुंचाने की योजना थी। यह मार्ग तस्करों द्वारा इसलिए चुना जाता है क्योंकि राष्ट्रीय राजमार्गों के जरिए बड़े वाहनों में माल ढुलाई की आड़ में शराब की तस्करी करना अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। बक्सर जिला उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित होने के कारण यहां से होकर कई महत्वपूर्ण मार्ग गुजरते हैं, जिसके चलते यह क्षेत्र तस्करों के लिए हमेशा से एक संवेदनशील और ट्रांजिट रूट रहा है।

बिहार सरकार ने अप्रैल 2016 से राज्य में संपूर्ण शराबबंदी लागू कर रखी है। इसके तहत बिहार की सीमा में शराब का निर्माण, भंडारण, परिवहन, बिक्री और सेवन पूर्ण रूप से वर्जित है। इतनी सख्त कानूनी व्यवस्था और उत्पाद विभाग की लगातार कार्रवाइयों के बावजूद तस्कर भारी मुनाफे के लालच में शराब की तस्करी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। वे पुलिस और उत्पाद विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए हर बार नई तरकीबें अपनाते हैं। कभी एंबुलेंस में, कभी सब्जी से लदे ट्रकों में, तो कभी इस बार की तरह कागज की पेटियों के बीच शराब छिपाकर तस्कर इसे बिहार में दाखिल करने की कोशिश करते रहते हैं। 1332 लीटर शराब की यह बरामदगी इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि तस्कर किस स्तर पर संगठित होकर काम कर रहे हैं और 16 लाख रुपये की यह खेप किसी छोटे स्तर की तस्करी का हिस्सा नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा और सुनियोजित गिरोह सक्रिय होने की आशंका है।

उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जब्त की गई 1332 लीटर शराब और डीसीएम ट्रक को विभागीय नियमों के तहत सील कर दिया गया है। गिरफ्तार चालक के खिलाफ बिहार उत्पाद अधिनियम के सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। उसे न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्पाद पुलिस अब इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि इस तस्करी के खेल में और कौन-कौन लोग शामिल हैं। ट्रक के मालिक, शराब भेजने वाले व्यक्ति और समस्तीपुर में इसे मंगवाने वाले प्राप्तकर्ता की पहचान करने के लिए प्रयास तेज कर दिए गए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि चालक की निशानदेही पर इस अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचा जा सकता है।

बक्सर में उत्पाद पुलिस की इस बड़ी सफलता से तस्करों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन के सामने यह चुनौती स्पष्ट कर दी है कि शराबबंदी कानून को सफल बनाने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में चेकिंग और निगरानी को और अधिक सख्त तथा तकनीकी रूप से सुसज्जित करने की आवश्यकता है। उत्पाद विभाग की ओर से ऐसे अभियानों को आगे भी निरंतर जारी रखने का आश्वासन दिया गया है, ताकि बिहार में अवैध शराब की तस्करी पर पूरी तरह से अंकुश लगाया जा सके।