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Fri, Oct 9, 2026Updated 1:40 PM IST
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बस्तर दशहरा 2026: सांसद महेश कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दिया न्योता, पागा पहनाकर किया सम्मान; मुरिया दरबार में राष्ट्रपति के आगमन की संभावना

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध और ऐतिहासिक बस्तर दशहरा इस वर्ष भी अपनी पूरी भव्यता और सदियों पुरानी परंपराओं के साथ मनाया जाएगा। 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे पर्व के लिए तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में बस्तर से सांसद महेश कश्यप ने राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को बस्तर दशहरा 2026 में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। इस दौरान सांसद महेश कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पारंपरिक ‘पागा’ पहनाकर उनका विधिवत सम्मान किया। यह निमंत्रण कार्यक्रम बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और वहां की गहरी परंपराओं का एक जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।

बस्तर दशहरा केवल एक सामान्य त्योहार नहीं है, बल्कि यह पूरे देश और दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। यह पर्व लगातार 75 दिनों तक चलता है, जो इसे विश्व के सबसे लंबे समय तक चलने वाले त्योहारों में से एक बनाता है। इस दौरान मां दंतेश्वरी की विशेष आराधना की जाती है। मां दंतेश्वरी बस्तर क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं और स्थानीय जनजातीय समाज में उनकी गहरी आस्था है। इस 75 दिवसीय ऐतिहासिक पर्व में बस्तर की जनजातीय संस्कृति, रीति-रिवाज और सदियों पुरानी परंपराएं अपने मूल स्वरूप में देखने को मिलती हैं। यहां का दशहरा भगवान राम की लंका विजय के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले देश के अन्य हिस्सों के दशहरे से भिन्न है। बस्तर का दशहरा मुख्य रूप से मां दंतेश्वरी की पूजा-अर्चना और जनजातीय समाज के एकजुटता का महापर्व माना जाता है।

सांसद महेश कश्यप द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दिए गए इस निमंत्रण के दौरान पारंपरिक ‘पागा’ पहनाकर जो सम्मान किया गया, वह बस्तर की जनजातीय संस्कृति का एक अभिन्न अंग है। बस्तर के जनजातीय समाज में किसी भी सम्मानित व्यक्ति या अतिथि का स्वागत पारंपरिक परिधान और विशेष रूप से ‘पागा’ (पगड़ी) पहनाकर किया जाता है। यह परंपरा अतिथि के प्रति गहरे सम्मान, आदर और स्नेह को दर्शाती है। मुख्यमंत्री को यह निमंत्रण देते हुए सांसद महेश कश्यप ने बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता के बारे में भी जानकारी साझा की।

बस्तर दशहरे के दौरान आयोजित होने वाले ‘मुरिया दरबार’ को लेकर भी इस बार विशेष चर्चा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस वर्ष मुरिया दरबार में भारत की राष्ट्रपति के आगमन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, यह अभी एक संभावना है और इसकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है। यदि ऐसा होता है, तो यह बस्तर दशहरा के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ जाएगा। मुरिया दरबार बस्तर दशहरे का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां जनजातीय समाज के लोग अपनी समस्याएं और बातें सीधे प्रशासन और सरकार के समक्ष रखते हैं। यह लोकतांत्रिक मूल्यों और जनजातीय परंपराओं के अनूठे संगम का प्रतीक है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष बस्तर दशहरे में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिरकत की थी। उनके आगमन ने इस पर्व को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रमुखता प्रदान की थी। केंद्रीय गृह मंत्री जैसे वरिष्ठ नेता की उपस्थिति ने बस्तर की संस्कृति और परंपराओं को पूरे देश के समक्ष एक बड़े मंच पर प्रदर्शित करने का कार्य किया था। अब इस वर्ष मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को निमंत्रण दिया गया है और राष्ट्रपति के संभावित आगमन की चर्चाओं के बीच, बस्तर दशहरा 2026 को लेकर स्थानीय लोगों, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।

बस्तर दशहरा 75 दिनों की इस लंबी अवधि में कई प्रकार की धार्मिक और सांस्कृतिक रस्में संपन्न होती हैं। इनमें रथ यात्रा, झाड़ फेर, कछन गाड़ी, जोगी बैठक और मुरिया दरबार जैसी अनेक पारंपरिक विधियां शामिल हैं। ये सभी रस्में बस्तर के विभिन्न जनजातीय समुदायों की सहभागिता से संपन्न होती हैं। हर समुदाय की इस पर्व में एक निर्धारित जिम्मेदारी होती है, जिसे वे पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं। यही कारण है कि बस्तर दशहरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गया है, बल्कि यह सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय एकता का एक जीता-जागता उत्सव बन चुका है।

सांसद महेश कश्यप द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को दिए गए इस औपचारिक निमंत्रण ने बस्तर दशहरा 2026 की तैयारियों को एक नई दिशा दी है। प्रदेश के मुखिया के साथ-साथ देश की सर्वोच्च पदाधिकारी के संभावित आगमन की खबरों ने इस पर्व की गरिमा को और बढ़ा दिया है। बस्तर के लोग इस ऐतिहासिक पर्व को सफल बनाने के लिए अपनी पारंपरिक तैयारियों में जुटे हुए हैं। वनदे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले दिनों में बस्तर दशहरा से जुड़े अन्य कार्यक्रमों और वीआईपी आगमन की आधिकारिक पुष्टि होने की संभावना है। बस्तर की यह 75 दिवसीय सांस्कृतिक यात्रा एक बार फिर मां दंतेश्वरी की कृपा और जनजातीय परंपराओं की अमिट छाप छोड़ने के लिए तैयार है।