Thu, 08 Oct 20261:48 PM
Thu, Oct 8, 2026Updated 1:48 PM IST
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बठिंडा किसान मेले में पहुंचे कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, CBI रेड पर बोले- पंजाब के लोग दखलअंदाजी पसंद नहीं करेंगे; किसानों से की पारंपरिक खेती की अपील

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बठिंडा। वंदे भारत न्यूज़। पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने बठिंडा में आयोजित किसान मेले में शिरकत की और इस दौरान उन्होंने राज्य में हाल ही में हुई सीबीआई (CBI) की छापेमारी को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। मंत्री खुड्डियां ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीबीआई दखल देना चाहती है, लेकिन पंजाब के लोग इसे किसी भी सूरत में पसंद नहीं करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे पारंपरिक तरीके से खेती करें। बठिंडा का किसान मेला अपने आप में एक महत्वपूर्ण कृषि आयोजन है, जहां राज्य भर से किसान, कृषि विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी जुटते हैं। इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों को नई तकनीकों, बीजों और कृषि नीतियों से अवगत कराना होता है।

पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां बठिंडा में आयोजित इस भव्य किसान मेले में पहुंचे, जहां उनका स्वागत किया गया। मेले के दौरान उन्होंने उपस्थित किसानों और लोगों को संबोधित करते हुए कई अहम विषयों पर अपनी बात रखी। कृषि मंत्री ने सबसे पहले किसानों को पारंपरिक तरीके से खेती करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसानों को अपनी जड़ों से जुड़े रहकर और पारंपरिक कृषि पद्धतियों का अनुसरण करते हुए खेती करनी चाहिए। यह बात ऐसे समय में सामने आई है जब राज्य में कृषि क्षेत्र को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं और सरकार किसानों के हित में विभिन्न कदम उठा रही है। मंत्री जी ने इस बात पर जोर दिया कि पारंपरिक खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में मदद करती है, बल्कि किसानों को रासायनिक खादों के बढ़ते खर्च से भी बचा सकती है।

किसान मेले में मौजूद लोगों के बीच तब और अधिक ध्यान आकर्षित हुआ जब कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा हाल ही में की गई छापेमारी के विवाद पर अपनी टिप्पणी दी। उन्होंने कहा कि सीबीआई दखल देना चाहती है, लेकिन पंजाब के लोग इसे पसंद नहीं करेंगे। मंत्री के इस बयान को राज्य की राजनीति और केंद्र-राज्य संबंधों के संदर्भ में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि पंजाब सरकार और सत्तारूढ़ दल सीबीआई की कार्रवाई को लेकर असहज है और इसे राज्य के मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप के रूप में देख रहा है। मंत्री ने यह भी इंगित किया कि पंजाब की जनता ऐसी कार्रवाइयों का समर्थन नहीं करती है।

गौरतलब है कि पंजाब में सीबीआई की छापेमारी को लेकर पिछले कुछ समय से राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। ऐसे में कृषि मंत्री का एक सार्वजनिक मंच, वह भी किसान मेले जैसे आयोजन से, सीबीआई पर निशाना साधना राजनीतिक रूप से काफी प्रासंगिक हो जाता है। हालांकि, मंत्री ने अपने संबोधन में सीबीआई रेड के विशिष्ट मामलों या किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना ही यह टिप्पणी की। उन्होंने अपनी बात को जनभावनाओं से जोड़ते हुए रखा कि पंजाब के लोग इस तरह की दखलअंदाजी को स्वीकार नहीं करेंगे। यह अनिश्चितता बनी हुई है कि उनकी यह टिप्पणी किस विशिष्ट मामले या घटनाक्रम के संदर्भ में थी, क्योंकि स्रोत जानकारी में इसका कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।

बठिंडा का किसान मेला पंजाब के कृषि कैलेंडर में एक प्रमुख स्थान रखता है। मालवा क्षेत्र का यह हिस्सा कपास, गेहूं और अन्य फसलों के उत्पादन के लिए जाना जाता है। ऐसे में कृषि मंत्री का यहां पहुंचना और सीधे किसानों से संवाद करना सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र को दिए जा रहे महत्व को दर्शाता है। मेले में किसानों को विभिन्न प्रकार की कृषि तकनीकों, उन्नत बीजों और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जाती है। मंत्री ने किसानों से पारंपरिक खेती की अपील करके एक संतुलित दृष्टिकोण पेश करने का प्रयास किया, जिसमें आधुनिकता के साथ-साथ परंपरा को भी महत्व दिया गया है।

मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां के इन दोनों बयानों—पारंपरिक खेती का समर्थन और सीबीआई कार्रवाई का विरोध—ने मेले में आए लोगों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना दिया है। एक तरफ जहां किसानों को खेती के तरीकों पर मार्गदर्शन दिया गया, वहीं दूसरी तरफ एक संवेदनशील राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे पर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया। पंजाब सरकार का यह रुख आने वाले दिनों में केंद्र और राज्य के बीच होने वाली राजनीतिक बहसों को और धार दे सकता है।

कुल मिलाकर, बठिंडा के किसान मेले में कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां का दौरा कृषि सुधारों की चर्चा के साथ-साथ राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों पर सरकार के स्टैंड को स्पष्ट करने का एक जरिया बन गया। उन्होंने किसानों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें पारंपरिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया और साथ ही यह संदेश देने का प्रयास किया कि पंजाब की जनता बाहरी एजेंसियों के दखल को लेकर सतर्क है और उसे नापसंद करती है। मेले में भारी संख्या में किसानों और ग्रामीणों की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को सफल बनाया।