Sat, 10 Oct 202610:39 AM
Sat, Oct 10, 2026Updated 10:39 AM IST
होम › मध्य प्रदेश

छिंदवाड़ा में 32 पटवारियों को नौकरी से हटाने का नोटिस: स्वामित्व योजना के विरोध में कर रहे प्रदर्शन, प्रशासन ने काम में लापरवाही का दिया हवाला

WhatsAppFacebookX

छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में राजस्व विभाग और पटवारियों के बीच चल रहा विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। स्वामित्व योजना के तहत रजिस्ट्री संबंधी कार्यों का विरोध कर रहे पटवारियों पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। जिला प्रशासन की ओर से 32 पटवारियों को उनके पदों से हटाए जाने का नोटिस जारी किया गया है। प्रशासन ने इस कार्रवाई का आधार बताते हुए कहा है कि इन सभी पटवारियों द्वारा अपने नियमित कार्यों में लगातार लापरवाही बरती जा रही थी। दूसरी ओर, पटवारियों का कहना है कि यह कार्रवाई उनके आंदोलन को दबाने और उन्हें डराने की एक सुनियोजित कोशिश है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रांतीय पटवारी संघ के आह्वान पर बीते 17 तारीख से जिले भर के पटवारी अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन पर हैं। पटवारियों की मुख्य मांग है कि स्वामित्व योजना के अंतर्गत निष्पादक (एग्जीक्यूटिंग) का कार्य उनसे नहीं लिया जाए। पटवारियों का स्पष्ट मत है कि स्वामित्व रजिस्ट्री योजना में निष्पादक की जिम्मेदारी उन्हें सौंपना उनके मूल राजस्व कार्यों के साथ न्यायसंगत नहीं है। इसी मांग को लेकर वे 17 तारीख से इस विशेष कार्य को करने से मना कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं।

इस विवाद के बीच गुरुवार दोपहर को पटवारियों ने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाने के लिए अधिकारियों को एक औपचारिक ज्ञापन भी सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने स्वामित्व योजना में निष्पादक का कार्य दिए जाने पर अपनी आपत्तियां विस्तार से दर्ज कराईं। पटवारियों ने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि वे अपने नियमित राजस्व कार्यों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभा रहे हैं, लेकिन स्वामित्व योजना का अतिरिक्त भार उनके ऊपर अनुचित रूप से डाला जा रहा है। उनका तर्क है कि इस अतिरिक्त जिम्मेदारी से उनके मूलभूत राजस्व कार्य प्रभावित हो रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

हालांकि, जिला प्रशासन ने पटवारियों के इस कदम को कार्य में बाधा उत्पन्न करने और सरकारी निर्देशों की अवहेलना माना है। प्रशासन का कहना है कि 32 पटवारियों को जो नोटिस जारी किए गए हैं, वे उनके काम में बरती गई कथित लापरवाही के आधार पर दिए गए हैं। प्रशासन ने यह हवाला दिया है कि ये पटवारी समय पर अपने दायित्वों का निर्वहन नहीं कर रहे थे, जिसके चलते यह अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। नोटिस मिलने के बाद पटवारियों में रोष व्याप्त हो गया है और उनका मानना है कि यह कार्रवाई सीधे तौर पर उनके आंदोलन से जुड़ी हुई है।

गौरतलब है कि स्वामित्व योजना केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके आवासीय परिसरों का वैध स्वामित्व अधिकार प्रदान करना है। इस योजना के तहत गांवों में ड्रोन सर्वेक्षण और मैपिंग के जरिए संपत्तियों का सीमांकन किया जाता है और इसके बाद लाभार्थियों को संपत्ति कार्ड दिए जाते हैं। इन संपत्ति कार्डों के आधार पर लोग बैंकों से ऋण प्राप्त कर सकते हैं और अन्य वित्तीय सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इस योजना में रजिस्ट्री और निष्पादन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर राजस्व कर्मचारियों, विशेषकर पटवारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पटवारियों का संगठन प्रांतीय पटवारी संघ इस मुद्दे पर पूरी तरह से मुखर है और अपने सदस्यों के समर्थन में खड़ा है। संघ ने पहले ही 17 तारीख से निष्पादक का कार्य न करने का आह्वान कर दिया था, जिसके बाद पूरे प्रदेश में कई जिलों के पटवारियों ने इस कार्य का बहिष्कार शुरू कर दिया था। छिंदवाड़ा में जब प्रशासन ने 32 पटवारियों को हटाने का नोटिस थमाया, तो इसने विवाद को और अधिक तेज कर दिया है। पटवारी संघ के प्रतिनिधियों ने अधिकारियों को सौंपे गए ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया और जारी नोटिस वापस नहीं लिए गए, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक व्यापक स्तर पर ले जाने के लिए बाध्य होंगे।

वहीं, प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की देरी या बाधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। स्वामित्व योजना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रमों में कर्मचारियों का सहयोग अनिवार्य है और जो कर्मचारी अपने दायित्वों से पीछे हटेंगे, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई जारी रहेगी। प्रशासन ने काम में लापरवाही का हवाला देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि नोटिस देने की यह कार्रवाई पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर की गई है।

इस पूरे मामले ने छिंदवाड़ा जिले के राजस्व विभाग में हड़कंप मचा दिया है। एक तरफ 32 पटवारियों को नौकरी से हटाने का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ शेष पटवारी भी अपने संगठन के आह्वान पर अडिग हैं। इस विवाद के कारण जिले में राजस्व संबंधी सामान्य कार्यों और स्वामित्व योजना के तहत होने वाली रजिस्ट्री प्रक्रियाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आम ग्रामीण जनता, जो स्वामित्व योजना के तहत अपने संपत्ति कार्ड और रजिस्ट्री की प्रतीक्षा कर रही है, वह भी इस गतिरोध के कारण चिंतित है। फिलहाल, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और प्रशासन तथा पटवारी संघ के बीच कोई ठोस सहमति बनती हुई दिखाई नहीं दे रही है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या उच्च अधिकारी इस मामले में हस्तक्षेप करते हैं या यह विवाद और अधिक गहराता है।