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Tue, Oct 13, 2026Updated 9:38 AM IST
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छिंदवाड़ा: निमोनिया के इलाज के दौरान दो वर्षीय बच्ची की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर गलत दवा देने का लगाया आरोप; परासिया थाने में शिकायत दर्ज

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छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक बेहद दुखद और संवेदनशील मामला सामने आया है, जिसमें चिकित्सीय लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया गया है। जिले के चांदामेटा क्षेत्र में रहने वाले तेकाम परिवार की दो वर्षीय इकलौती बेटी की मौत हो गई है। परिजनों का आरोप है कि बच्ची को निमोनिया की बीमारी थी, जिसके इलाज के दौरान संबंधित डॉक्टर ने गलत दवा दी, जिसके कारण मासूम बच्ची ने अपनी जान गंवा दी। इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार में गहरा शोक और रोष व्याप्त है। परिजनों ने इस मामले में परासिया थाने पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई है और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले को संज्ञान में लेते हुए बच्ची के शव का पोस्टमार्टम कराया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा मामला छिंदवाड़ा जिले के परासिया क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चांदामेटा का है। यहां निवास करने वाले तेकाम परिवार की एक मात्र दो वर्षीय बेटी थी, जो अपने माता-पिता और परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी थी। बताया जा रहा है कि कुछ दिनों पहले बच्ची की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिजनों ने जब उसे स्थानीय स्तर पर दिखाया तो पता चला कि बच्ची निमोनिया से पीड़ित है। निमोनिया छोटे बच्चों के लिए एक गंभीर बीमारी मानी जाती है, जिसमें फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है और सांस लेने में भारी तकलीफ होती है। ऐसे में परिजनों ने बच्ची का उचित इलाज कराने के लिए एक डॉक्टर से संपर्क किया था, ताकि उनकी इकलौती संतान को स्वस्थ किया जा सके।

हालांकि, परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान डॉक्टर द्वारा बच्ची को गलत दवा दी गई। उनका कहना है कि इसी गलत दवा और चिकित्सीय लापरवाही के कारण बच्ची की हालत में सुधार होने के बजाय वह और अधिक बिगड़ती चली गई। देखते ही देखते मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया। तेकाम परिवार की यह इकलौती बेटी थी, इसलिए इस अप्रत्याशित और दुखद घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। बच्ची की मौत के बाद परिजनों ने सीधे तौर पर इलाज कर रहे डॉक्टर पर गलत इलाज करने और लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

अपनी बच्ची को न्याय दिलाने और आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तेकाम परिवार के सदस्य परासिया थाने पहुंचे। उन्होंने वहां पुलिस अधिकारियों को पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी दी और डॉक्टर के खिलाफ एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की। इस शिकायत में उन्होंने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि किस प्रकार डॉक्टर की ओर से दी गई गलत दवा के कारण उनकी दो साल की बच्ची की जान चली गई। परिजनों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि आरोपी डॉक्टर के खिलाफ चिकित्सीय लापरवाही और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।

परासिया थाना पुलिस ने पीड़ित परिवार की लिखित शिकायत को गंभीरता से लिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शिकायत मिलने के तुरंत बाद मामले की जांच शुरू कर दी गई है। चूंकि यह मामला चिकित्सीय लापरवाही और एक बच्ची की मौत से जुड़ा हुआ है, इसलिए पुलिस ने सबसे पहले वैधानिक प्रक्रिया का पालन करते हुए बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट इस मामले में बेहद अहम साबित होगी, क्योंकि इसी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची की मौत का असल कारण क्या था। यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह पुष्टि हो जाती है कि मौत गलत दवा या चिकित्सीय लापरवाही के कारण हुई है, तो आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कानूनी शिकंजा और भी कस जाएगा।

छिंदवाड़ा जिले में स्वास्थ्य सेवाओं और विशेषकर निजी चिकित्सकों द्वारा दिए जाने वाले इलाज को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। छोटे बच्चों में निमोनिया जैसे रोगों का इलाज अत्यंत सावधानी और विशेषज्ञता की मांग करता है। ऐसे मामलों में यदि कोई चिकित्सक बिना उचित जांच के या लापरवाहीपूर्वक दवा देता है, तो उसके परिणाम घातक हो सकते हैं। यह घटना न केवल तेकाम परिवार के लिए एक अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था और चिकित्सा पेशे में जिम्मेदारी की कमी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

फिलहाल, परासिया पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही पुलिस यह तय कर पाएगी कि डॉक्टर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की किन-किन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की जाए। पुलिस अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि इस मामले में पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच की जाएगी। यदि जांच में डॉक्टर की लापरवाही सामने आती है, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दूसरी ओर तेकाम परिवार का रोना रुकने का नाम नहीं ले रहा है। अपनी दो वर्षीय इकलौती बेटी को खोने का गम उन्हें अंदर तक तोड़ चुका है। पूरा परिवार अब केवल इसी उम्मीद में है कि पुलिस प्रशासन उनकी शिकायत पर उचित कार्रवाई करेगा और उनकी मासूम बच्ची को न्याय मिलेगा। यह मामला अब पूरे छिंदवाड़ा जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग चिकित्सीय लापरवाही के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने की मांग कर रहे हैं।