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Sun, Oct 11, 2026Updated 10:28 AM IST
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छतरपुर जिला अस्पताल में सॉफ्टवेयर अपडेट और बिजली गुल होने से मरीजों को डेढ़ घंटे का इंतजार, 4 में से सिर्फ 2 काउंटर पर बने पर्चे

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छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिला अस्पताल में रविवार को मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अस्पताल में पर्चा बनवाने पहुंचे मरीजों को तकनीकी खराबी और बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण लंबा इंतजार करना पड़ा। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अस्पताल के कंप्यूटर सिस्टम में सॉफ्टवेयर अपडेट का कार्य चल रहा था। इसी दौरान बिजली भी गुल हो गई, जिसके परिणामस्वरूप कई कंप्यूटर काम करना बंद कर गए। इस तकनीकी समस्या की वजह से पर्चा निर्माण की प्रक्रिया ठप हो गई और मरीजों को लगभग डेढ़ घंटे तक कतार में खड़े रहकर अपने नंबर का इंतजार करना पड़ा।

जिला अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में मरीज ओपीडी सेवाओं के लिए आते हैं। पर्चा बनवाना किसी भी मरीज के उपचार का पहला और अनिवार्य चरण होता है। बिना पर्चे के मरीज डॉक्टर से परामर्श नहीं ले सकते। ऐसे में जब पर्चा बनाने वाले कंप्यूटर ही काम करना बंद कर दें, तो पूरी व्यवस्था चरमरा जाती है। रविवार को यही स्थिति छतरपुर जिला अस्पताल में देखने को मिली। सॉफ्टवेयर अपडेट और बिजली जाने की दोहरी मार ने मरीजों की मुश्किलें बढ़ा दीं। अस्पताल में कुल चार काउंटर पर्चा निर्माण के लिए संचालित होते हैं, लेकिन तकनीकी गड़बड़ी के कारण इनमें से केवल दो काउंटर ही काम कर पाए। आधे काउंटर बंद होने से जो बोझ पहले चार काउंटरों पर बंटता था, वह अब केवल दो काउंटरों पर आ गया, जिससे प्रतीक्षा समय स्वाभाविक रूप से काफी बढ़ गया।

पर्चा काउंटरों पर काम धीमा होने से अस्पताल के गलियारों और प्रतीक्षालय में मरीजों की भीड़ जमा हो गई। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चे भी इस भीड़ में फंसे रहे। कई मरीजों को डेढ़ घंटे तक लाइन में खड़े रहना पड़ा। जो मरीज दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से अपना इलाज करवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचे थे, उनके लिए यह इंतजार और भी कष्टदायक साबित हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को अस्पताल तक पहुंचने में ही काफी समय और खर्च लगता है, ऐसे में पर्चे के लिए अतिरिक्त घंटों का इंतजार उनकी शारीरिक और मानसिक दोनों तरह से परीक्षा लेने वाला रहा।

अस्पताल प्रबंधन की ओर से सॉफ्टवेयर अपडेट और बिजली कटौती को इस अव्यवस्था का मुख्य कारण बताया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि सॉफ्टवेयर अपडेट का कार्य पूर्व निर्धारित योजना के तहत किया जा रहा था या अचानक यह आवश्यकता उत्पन्न हुई। साथ ही, बिजली गुल होने की स्थिति में अस्पताल के बैकअप पावर सिस्टम जैसे जनरेटर या यूपीएस (अनइंटरप्टेबल पावर सप्लाई) ने कंप्यूटरों को कितनी देर तक चालू रखा, इस बारे में भी कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। आमतौर पर जिला अस्पतालों जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में बिजली जाने की स्थिति में तुरंत वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के सक्रिय होने की व्यवस्था होती है, ताकि मरीजों की सेवाएं बाधित न हों।

छतरपुर जिला अस्पताल जिले का सबसे बड़ा सरकारी स्वास्थ्य केंद्र है। यहां छतरपुर शहर के अलावा आसपास के तहसीलों और गांवों से हजारों मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। ओपीडी में डॉक्टरों से परामर्श लेने, जांच करवाने और दवाइयां प्राप्त करने के लिए पर्चा होना अत्यंत आवश्यक है। जब पर्चा बनाने की प्रक्रिया में ही देरी होती है, तो इसके बाद की पूरी श्रृंखला प्रभावित होती है। मरीजों को डॉक्टर से मिलने में देरी होती है, जांच केंद्रों पर भीड़ बढ़ती है और फार्मेसी से दवाइयां लेने में भी समय अधिक लगता है। इस प्रकार एक तकनीकी समस्या पूरे अस्पताल की कार्यप्रणाली को धीमा कर देती है।

चार में से केवल दो काउंटरों पर काम होने से कर्मचारियों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ा। सीमित संसाधनों के बीच कर्मचारियों को तेजी से पर्चे बनाने का प्रयास करना पड़ा, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण गति बनाए रखना कठिन था। इस दौरान कुछ मरीजों और तीमारदारों की ओर से असुविधा को लेकर नाराजगी भी व्यक्त की गई। लंबी कतारों में खड़े रहने से मरीजों को शारीरिक थकान का भी सामना करना पड़ा, जो पहले से ही बीमार चल रहे लोगों के लिए उचित नहीं माना जाता।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में तकनीकी अपग्रेडेशन समय की मांग है, लेकिन यह आवश्यक है कि ऐसी प्रक्रियाओं को इस प्रकार नियोजित किया जाए कि मरीजों की सेवाएं बाधित न हों। सॉफ्टवेयर अपडेट जैसे कार्य अक्सर उन समय किए जाते हैं जब मरीजों की संख्या कम हो, जैसे कि अस्पताल बंद होने के बाद या ओपीडी शुरू होने से पहले। यदि यह अपडेट ओपीडी के समय के दौरान किया गया, तो यह प्रबंधन की योजना में एक कमी को दर्शाता है। वहीं, बिजली कटौती एक बाहरी कारक है, लेकिन स्वास्थ्य संस्थानों में इसके समाधान के लिए मजबूत बैकअप सिस्टम का होना अनिवार्य माना जाता है।

वन्दे भारत न्यूज़ की रिपोर्ट के अनुसार, इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचे और तकनीकी प्रबंधन की चुनौतियों को उजागर किया है। छतरपुर जिला अस्पताल में मरीजों को भविष्य में ऐसी परेशानियों से बचाने के लिए बेहतर पावर बैकअप व्यवस्था और सॉफ्टवेयर अपडेट के लिए उचित समय-सारणी निर्धारित किए जाने की आवश्यकता पर चर्चा हो रही है। फिलहाल, तकनीकी खराबी दूर होने और बिजली आपूर्ति सामान्य होने के बाद स्थिति नियंत्रण में आई, लेकिन जिन मरीजों को डेढ़ घंटे तक इंतजार करना पड़ा, उन्हें हुई असुविधा से इनकार नहीं किया जा सकता।