जन्म पर बच्चे, मौत पर शव को पिलाते हैं शराब:कोया लोगों में सगी बुआ की बेटी से ही शादी; नियम तोड़ा तो जीते-जी पिंडदान

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शाम 8 बजे का वक्त। गांव का एक घर रंग-बिरंगे बल्ब और हैलोजन की लाइट से रोशन है। ढोल बज रहे हैं। आंगन में महिलाएं एक लाइन से जमीन पर बैठी हैं। सभी के सामने पत्तों से बने दोने रखे हैं। यहां कोई मर्द नहीं है। सिर पर मटका रखे एक महिला आती है। इस मटके में शराब है। जिसे ‘लंदा’ और ‘इड्डिकुल’ कहा जाता है। लंदा, बासी चावल और इड्डिकुल महुआ से बनती है। महिला सिर से मटका उतारकर नीचे रखती है और दोने में सभी महिलाओं को शराब परोसती है। दूसरी महिला सभी के दोने में भुनी सोयाबीन परोसती है। गीत गाती हुई यहां बूढ़ी-जवान, सभी उम्र की महिलाएं शराब पी रही हैं। यहां महिलाएं मेहमान हैं और मेजबान भी। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं कोया समुदाय की कहानी। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ में इनकी कुल आबादी 9 लाख है। इनमें से डेढ़ लाख ओडिशा के मलकानगिरी में बसे हैं… ऊपर मैंने जिस दावत का जिक्र किया है वह एक शादी की है। चटक पीली साड़ी, होठों पर हल्की गुलाबी लिपस्टिक, गले में चांदी के सिक्कों की माला पहने एक दुल्हन के कदम धीरे-धीरे आगे बढ़ रहे हैं। दूसरी ओर, सफेद पोशाक में दूल्हा उसका इंतजार कर रहा है। तभी पुरोहित आगे बढ़कर दोनों को पास-पास खड़ा कर देता है। दूल्हे की कलाई में घास की एक गांठ बांधता है। मंत्र पढ़ता है, फिर दुल्हन का हाथ दूल्हे के हाथ में थमा देता है। तभी वहां मौजूद महिलाएं दुल्हन के स्वागत में कोया गीत गाने लगती हैं। यह शादी ओडिशा के नक्सल प्रभावित जिले मलकानगिरी से करीब 35 किलोमीटर दूर बसे गांव राखेलगुड़ा में हो रही है। यहां के एक आदिवासी नेता अडमा राखा के बेटे निरंजन और नई बहू बासंती की शादी का जश्न मनाया जा रहा है। शादी होते ही महिलाएं फिर शराब पीने लगती हैं। कुछ देर बाद ये एक-दूसरे की कमर में हाथ डालकर नाचना शुरू कर देती हैं। करीब 15 मिनट बाद वे थककर बैठ जाती हैं। इसके बाद, पुरोहित दूल्हा-दुल्हन को बेडरूम में छोड़ आते हैं और बाहर से दरवाजे की कुंडी लगा देते हैं। बाहर बैठी महिलाएं फिर से गीत गाने लगती हैं। बुआ की बेटी से शादी न करने पर मिलती है सजा इसी बीच, अडमा राखा आते हैं, जिनके बेटे की शादी है। मैंने उनसे कहा- ‘दुल्हन बहुत सुंदर है।’ वो कहने लगे कि मेरी बहू बासंती तो घर की लड़की है। लगभग पूरा बचपन हमारे सामने बीता है। मैंने हैरान होकर पूछा- ‘घर की लड़की का मतलब?’ वो बोले- ‘मेरे बेटे निरंजन की शादी, मेरी बहन की बेटी यानी उसकी सगी बुआ की बेटी से हुई है। यही हमारा रिवाज है।’ सगी बुआ की बेटी न हो तो? ‘तो पिता की दूर की बहन की बेटी से भी शादी हो जाती है।’ मैंने पूछा- ‘कोई खास वजह।’ अडमा बताते हैं- ‘घर की बेटी है। उसे हमारे परिवार के तौर-तरीकों की समझ है। वह हमें कभी नुकसान नहीं पहुंचाएगी, इसलिए यही परंपरा चली आ रही है।’ ‘अगर कोई ऐसा न करे तो फिर क्या करते हैं?’ ‘समाज से बाहर कर दिया जाता है। जिंदा रहते हुए पिंडदान भी कर देते हैं। कोया लोगों में बाहरी समुदाय में विवाह किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं है।’ अब अडमा ने मुझे इरमा पवासी नाम की महिला से मिलवाते हैं। वो बताती हैं कि ‘हम लोगों में जब भी शादी या किसी रस्म में बड़ी दावत होती है तो खाने की जिम्मेदारी पूरे गांव की होती है। गांव के लोग शादी वाले घर में महुआ की शराब, मुर्गी, बकरी और मछली पहुंचाते हैं। जैसे आज आप जिस शादी में आई हैं, उसके लिए भी महिलाएं कई दिनों से जंगलों से महुआ बीनकर शराब बनाने में लगी थीं।’ इरमा मुझे और मेरे साथी मुन्ना को खाना खाने के लिए कहती हैं। पत्तलों में मछली का सिर, मटन, चिकन, चावल, रायता और पनीर परोसा जाता है। कुछ देर बाद गांव के सभी लोग खाना खाकर अपने घरों को लौटने लगते हैं, लेकिन महिलाओं की महफिल बदस्तूर जारी रहती है। कच्चा घर, लेकिन सफाई ऐसी कि हर कोना चमकता है अगली सुबह मैं फिर अपने साथी मुन्ना के साथ गांव की तरफ निकल पड़ी। यहां हर घर मिट्टी से बना है, लेकिन इन्हें करीने से सजाया गया है। आगे बांस से बने बाड़े और छोटे-छोटे गेट। घरों की छतें ताड़ के पत्तों से ढकी हैं। हवा में महुआ की खुशबू घुली हुई है। लगभग हर घर के सामने महुआ सूख रहा है। मुन्ना बताते हैं कि- ‘हमारे यहां महुआ की शराब के बिना कोई रस्म पूरी नहीं होती।’ मुन्ना सबसे पहले मुझे अपने घर ले गए। बाहर तेज गर्मी है, लेकिन घर में ठंडक महसूस हो रही है। साफ-सफाई भी ऐसी कि जमीन पर गिरी चीज बिना झिझक उठाकर खाई जा सके। आंगन के एक कोने में, खुले में खाना बन रहा है। यही इनकी रसोई है। रसोई में बर्तन भी उतने हैं, जितना खाना बनाने के लिए जरूरी हैं। अंदर केवल एक ही कमरा है। सामने रखी कुर्सी पर मुझे बैठने के लिए कहा गया। खाट पर अनाज रखा है। खाना पकने की खुशबू आ रही है। मुन्ना बताते हैं कि ‘हमारे घरों में एक ही कमरा होता है। यहीं खाते हैं, यहीं सोते हैं। आज खाने में चावल, दाल और मछली के अंडों की भुर्जी बन रही है।’ कुछ देर यहां रुकने के बाद हम अडमा राखा के घर की तरफ चल पड़े। यहां अडमा राखा हमारा इंतजार कर रहे थे। मैंने उनसे हर घर के बाहर सूख रहे महुए का जिक्र किया। तो बोले- ‘चाहे रिश्ता लेकर जाना हो, शादी का मौका हो या किसी की मौत, हर रस्म में हमारे यहां शराब जरूरी है। इसी वजह से महुआ बड़ी मात्रा में इस्तेमाल होता है। जब लड़के वाले रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं तो शराब यानी लंदा और इड्डिकुल जरूर ले जाते हैं। इसके बिना बातचीत आगे नहीं बढ़ती। मान लीजिए, रिश्ता पक्का करने के लिए लड़के वालों को लड़की के घर पांच बार जाना पड़े, तो हर बार शराब की मात्रा बढ़ा दी जाती है। पहली बार में एक बोतल, दूसरी बार दो, तीसरी बार तीन। शादी पक्की होने पर लड़के वाले अपनी हैसियत के हिसाब से लड़की के परिवार को नकद, चावल और शराब भेंट करते हैं।’ कोई दूसरी शराब पीने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना अडमा बताते हैं- ‘हम लोगों में जीवन के हर पड़ाव पर शराब का महत्व है। बच्चे का जन्म होने पर सबसे पहले शराब चखाई जाती है। मौत के समय भी मुंह में शराब डाली जाती है। हालांकि, हमारे कुछ नियम बेहद सख्त हैं। समुदाय से बाहर शादी करने और पारंपरिक शराब छोड़कर दूसरी शराब पीने पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भरना पड़ता है। महिलाओं के शराब पीने को लेकर सवाल किया तो वो हंसने लगे। बोले- ‘ये हमारी परंपरा है। हमारे समाज में महिलाएं और पुरुष बराबर हैं, सबकी खुशी समान है।’ दिन के हिसाब से रखा जाता है बच्चों का नाम अडमा के घर में मौजूद गौरी कवासी बताती हैं- ‘यहां बच्चों के नामकरण का तरीका भी अनोखा है। यहां नाम, दिन के आधार पर रखे जाते हैं- जैसे शुक्रवार को जन्मे बच्चे को ‘शुक्री’ और गुरुवार को जन्मे को ‘गुरु’ कहा जाता है।’ विवाद पर थाने नहीं जाते, खुद करते हैं फैसला मुन्ना बताते हैं- कोया, अपने घरेलू और सार्वजनिक विवाद कभी थाने लेकर नहीं जाते। समुदाय के मामलों में किसी बाहरी व्यक्ति को दखल देने का अधिकार नहीं है। वे तारीखों की व्यवस्था को नहीं मानते। फैसला लेने के लिए हमारे ही समुदाय के एक बुजुर्ग व्यक्ति को चुना जाता है, जिस पर कभी कोई आरोप न लगा हो। इन्हें हम पेद्दा कहते हैं। पेद्दा ही जुर्माने का फैसला करते हैं। इस सीरीज में अगले हफ्ते पढ़िए ऐसे ही अनोखे गालो लोगों की कहानी…. ——————————————– 1- नाचती लड़की का हाथ पकड़ा और भगा ले गया लड़का:मैतेई लोगों में शादी की अनोखी परंपरा, पैदा होते ही बच्चे को खिला देते हैं नमक शाम के 5 बजे हैं। एक सुनसान जगह पर कुछ लोग जमीन को चौकोर खोद रहे हैं। आसपास भीड़ है। आधे घंटे बाद खुदाई करने वालों को गड्ढे में कुछ नजर आया। कुछ पल बाद दो-तीन लोग उस गड्‌ढे में उतरे और एक लाश बाहर निकालकर रख दी। लाश के कई हिस्से कंकाल में तब्दील हो चुके हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- शरीर के ऊपरी हिस्से पर कपड़े नहीं पहनतीं बोंडा महिलाएं:शादी ठुकराने पर लड़कीवालों का घर तोड़ देते हैं, मृत्युभोज में खाते हैं गाय का मांस सुबह करीब 10 बजे का वक्त। मिट्टी से लिपा-पुता एक कच्चा घर। बाहर सिर मुंडाए दो महिलाएं बैठी हैं। उम्र करीब 38-40 साल। ऊपरी बदन लगभग नंगा। बाकी शरीर पर नाम मात्र के कपड़े। छाती छिपाने के लिए मोतियों और कौड़ियों से बनी मालाएं। पूरी कहानी यहां पढ़ें



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