चंडीगढ़ में आप नेताओं का चुनाव आयोग कार्यालय घेराव का प्रयास विफल, मनीष सिसोदिया समेत दो मंत्री हिरासत में लेकर दो घंटे बाद छोड़ा

चंडीगढ़। वंदे भारत न्यूज। आम आदमी पार्टी (AAP) के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोमवार को चंडीगढ़ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। पार्टी नेताओं का इरादा निर्वाचन कार्यालय पंजाब का घेराव करने का था, लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने समय रहते बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच तीखी धक्कामुक्की की स्थिति भी उत्पन्न हो गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित दो मंत्रियों को हिरासत में ले लिया। हालांकि, करीब दो घंटे तक हिरासत में रखने के बाद पुलिस ने सभी नेताओं को छोड़ दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आम आदमी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को चंडीगढ़ में एकत्र हुए थे। उनका स्पष्ट उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना और निर्वाचन कार्यालय पंजाब का घेराव करना था। पार्टी नेताओं का आरोप है कि चुनाव आयोग की ओर से निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया जा रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यप्रणाली पर उनकी गंभीर आपत्तियां हैं। इसी विरोध को दर्ज कराने के लिए बड़ी संख्या में आप कार्यकर्ता और नेता निर्वाचन कार्यालय की ओर मार्च कर रहे थे।
जैसे ही आप नेताओं और कार्यकर्ताओं का दस्ता निर्वाचन कार्यालय पंजाब के करीब पहुंचा, चंडीगढ़ पुलिस ने पहले से लगाई गई बैरिकेडिंग के जरिए उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस प्रशासन का कहना था कि कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए कार्यालय का घेराव करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। बैरिकेडिंग पर रुकने के बाद आप नेताओं और कार्यकर्ताओं ने वहीं बैठकर और नारेबाजी करते हुए अपना विरोध तेज कर दिया। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेडिंग को पार करने या तोड़ने का प्रयास करने लगे, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें पीछे धकेलना शुरू किया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्कामुक्की का दौर शुरू हो गया। मौके पर तनावपूर्ण स्थिति बन गई और पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त बल लगाना पड़ा।
इसी धक्कामुक्की और उग्र प्रदर्शन के बीच चंडीगढ़ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया को हिरासत में ले लिया। उनके साथ पार्टी के दो अन्य मंत्रियों को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इन नेताओं को पुलिस वाहनों में बिठाकर थाने ले जाया गया। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने शांति भंग होने की आशंका और सरकारी काम में बाधा डालने के आधार पर यह कदम उठाया। मनीष सिसोदिया और अन्य मंत्रियों की हिरासत की खबर मिलते ही पार्टी के अन्य कार्यकर्ताओं में और अधिक आक्रोश फैल गया।
पुलिस हिरासत में लिए जाने के करीब दो घंटे बाद, चंडीगढ़ पुलिस ने मनीष सिसोदिया और दोनों मंत्रियों को रिहा कर दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि नेताओं को समझाइश दी गई और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की गई, जिसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। हिरासत से छूटने के बाद भी आप नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने रुख को और कड़ा करने की बात कही।
आम आदमी पार्टी और चुनाव आयोग, विशेष रूप से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के बीच पिछले कुछ समय से तनाव चल रहा है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग सत्ताधारी दल के दबाव में काम कर रहा है और विपक्षी दलों के साथ भेदभाव किया जा रहा है। चंडीगढ़ में आज का यह प्रदर्शन इसी श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। निर्वाचन कार्यालय पंजाब का घेराव करने का कार्यक्रम पार्टी द्वारा पहले से तय किया गया था, ताकि चुनाव आयोग तक अपनी बात सीधे पहुंचाई जा सके।
चंडीगढ़ पुलिस ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हुए थे। निर्वाचन कार्यालय के आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। धक्कामुक्की की घटना के बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा और कड़ा कर दिया था। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनीतिक दल को कानून हाथ में लेने या सरकारी कार्यालयों को जबरन घेरने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आम आदमी पार्टी के नेताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना उनका संवैधानिक अधिकार है और पुलिस ने बिना उचित कारण के उनके वरिष्ठ नेताओं और मंत्रियों को हिरासत में लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन किया है। हालांकि, पुलिस प्रशासन का तर्क है कि उन्होंने केवल कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए और नेताओं को लंबे समय तक हिरासत में नहीं रखा गया।
यह घटना चंडीगढ़ की राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। विपक्षी दल इसे सरकार और प्रशासन की मिलीभगत बता रहे हैं, जबकि प्रशासन ने इसे सामान्य कानून व्यवस्था का मामला बताया है। मनीष सिसोदिया की हिरासत और रिहाई के बाद आम आदमी पार्टी की ओर से आगे क्या रणनीति अपनाई जाएगी, इस पर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पार्टी नेताओं ने संघर्ष जारी रखने के संकेत दिए हैं।

