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ईरान युद्ध के बाद पेट्रोल, डीजल और गैस के दामों में बढ़ोतरी के कारण कई देशों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की मांग तेजी से बढ़ी है। एशिया के अधिकतर देशों, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में पिछले साल की तुलना में इस साल मार्च में ईवी की बिक्री में 79 प्रतिशत उछाल आया है। इन देशों में 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 48 प्रतिशत बढ़ी थींं। लैटिन अमेरिकी देश कोस्टा रिका इलेक्ट्रिक वाहनों के कारोबार की तेज रफ्तार का एक प्रमुख उदाहरण है। कोस्टा रिका में वर्ष के पहले तीन महीनों में सभी नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक वाहनों का हिस्सा 18 प्रतिशत था। यह अमेरिका से तीन गुना अधिक है, जहां टेस्ला ने 14 साल पहले अपने मॉडल-एस से आधुनिक इलेक्ट्रिक कार क्रांति की शुरुआत की थी। इथियोपिया, उरुग्वे सहित कई अन्य देश अपनी अर्थव्यवस्थाओं और विदेशी मुद्रा भंडार के लिए भारी पड़ रहे आयातित विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार एशिया में इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे ज्यादा बिक्री चीन में हो रही है। 2024 में एक करोड़ दस लाख ईवी बेचे गए। यह कुल वाहनों का लगभग आधा है। चीन में अप्रैल 2026 में सड़क पर दस में एक वाहन इलेक्ट्रिक था। एशिया के आर्थिक रूप से उभरते देशों में 2024 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 60 फीसदी उछाल दर्ज किया गया है। वियतनाम में 40 प्रतिशत और थाईलैंड में 20प्रतिशत से अधिक इजाफा हुआ है। इंडोनेशिया में भी वृद्धि हो रही है। ईवी पर सरकारी रियायतों और चीन के सस्ते वाहनों ने कारोबार बढ़ाया है। भारत में दो पहिया और तीन पहिया ईवी की बिक्री में 15 से 25 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। कोस्टा रिका की सांसद काटिया कैम्ब्रोनेरो ने संसद में चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण की गति तेज करने के लिए विधेयक पेश किया है। कोस्टा रिका के राष्ट्रपति रॉड्रिगो शावेज द्वारा विधेयक को मंजूरी देने की संभावना है। हालांकि राष्ट्रपति रॉड्रिगो और कैम्ब्रोनेरो कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी हैं।कोस्टा रिका तेल का उत्पादन नहीं करता है और उसकी अधिकतर बिजली पनबिजली(हाइड्रोपावर) से पैदा होती है। चीन की सस्ती इलेक्ट्रिक कारों ने बाजार में अपनी धाक जमाई कोस्टा रिका ने 2018 में टैक्स और शुल्क में छूट देकर इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया है। वहां इको टूरिज्म प्रमुख इंडस्ट्री है। तेल के मूल्य बढ़ने से यह नीति सही लगती है। 2023 में सस्ते चीनी मॉडलों के आने के बाद ईवी कारों की बिक्री बढ़ी है। लेकिन अन्य गरीब देशों की स्थिति कमजोर है। ज्यादातर बड़े ट्रक डीजल और कारें पेट्रोल पर चलती हैं। कोस्टा रिका की ईवी एसोसिएशन असोमोव के मुताबिक तीन चीनी इलेक्ट्रिक मॉडलों का मूल्य 18-19 लाख रुपए से कम है। यहां प्रति व्यक्ति आय अमेरिका की एक चौथाई है। एक सर्वे में 70 प्रतिशत सदस्यों ने बताया कि उन्होंने पर्यावरण या स्वास्थ्य की दृष्टि से नहीं बल्कि पैसा बचाने के लिए ईवी को अपनाया है। कई देशों में प्रचार अभियान ईवी एसोसिएशन की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर शिल्वा रोजास इलेक्ट्रिक वाहनों की खूबियों का प्रचार करती हैं। वे मैक्सिको,कोलंबिया, ब्राजील और केन्या जैसे देशों में ईवी के पक्ष में माहौल बनाने के लिए वर्कशॉप करती हैं। कोस्टारिका में पहले टोयोटा सबसे लोकप्रिय ब्रांड था। अब चीनी इलेक्ट्रिक कारों का यहां के ईवी बाजार पर कब्जा है। ट्रांसपोर्ट में भी ज्यादा जोर ग्रॉसरी चेन ऑटो मर्केडो के फेलिपो अलोंजो बताते हैं, हमने इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से डिलीवरी खर्च 5-10% घटाया है। प्राइवेट बस कंपनी बियूसा ने 60 बसों के अपने समूचे बेड़े को बैट्री चलित बसों से बदल दिया है। डीजल बसों के मुकाबले इलेक्ट्रिक मॉडल 50 हजार डॉलर ज्यादा महंगे हैं। लेकिन कंपनी फ्यूल और मेंटेनेंस पर खर्च घटा कर इसकी भरपाई जल्द कर लेगी। ईवी ब्रांड्स में प्रतिस्पर्धा कोस्टा रिका का कोई राजनेता ईवी मालिकों को दूर नहीं करना चाहता है। बीवाईडी, गीली,एमजी और दर्जनों अन्य चीनी ब्रांड ने तेजी से हां के बाजार पर कब्जा जमा लिया है। पहले इस बाजार पर जापानी, अमेरिकन और यूरोपियन ब्रांड का दबदबा था। इसमें टोयोटा प्रमुख थी।अब यहां टेस्ला सहित पश्चिमी देशों की कंपनियों के इलेक्ट्रिक वाहनों के मॉडल बहुत कम दिखाई पड़ते हैं।
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एशिया-अफ्रीका में ईवी की मांग तेज:चीन में हर दस में से एक कार ईवी, भारत में टू और थ्री व्हीलर सेगमेंट में 25% का उछाल
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