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Sun, Oct 11, 2026Updated 9:28 AM IST
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दिल्ली: जेएनयू में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न मामले में भाजपा महिला मोर्चा का प्रदर्शन, कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम की गिरफ्तारी और बर्खास्तगी की मांग

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नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न के विवादित मामले को लेकर राजधानी दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के महिला मोर्चा ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के दौरान भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम की तत्काल बर्खास्तगी और उनकी गिरफ्तारी की कड़ी मांग उठाई। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि जेएनयू जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में छात्राओं की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है और इस मामले में शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए भाजपा महिला मोर्चा की कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।

शनिवार को आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने अपने हाथों में तख्तियां और बैनर लिए हुए थे, जिन पर कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम के खिलाफ नारे लिखे हुए थे। महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं का स्पष्ट कहना था कि जेएनयू में छात्राओं के साथ हुए कथित यौन उत्पीड़न की घटना बेहद निंदनीय और शर्मनाक है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि ऐसे गंभीर मामले में जिस भी व्यक्ति की संलिप्तता या लापरवाही सामने आ रही है, उसे किसी भी प्रकार की राजनीतिक छूट नहीं दी जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी करते हुए कहा कि देश की बेटियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों को कानून के कठघरे में लाना ही होगा।

भाजपा महिला मोर्चा ने विशेष रूप से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम को निशाने पर लिया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम को उनके पद से तुरंत बर्खास्त किया जाए और इस पूरे मामले में उनकी भूमिका की गहन जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया जाए। महिला मोर्चा का आरोप है कि जेएनयू विवाद में कांग्रेस सांसद की भूमिका संदिग्ध रही है और वह छात्राओं के न्याय के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। भाजपा कार्यकर्ताओं ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उनका दायित्व पीड़ित छात्राओं को न्याय दिलाना होना चाहिए था, लेकिन इसके विपरीत उनकी कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। इसलिए उनकी सदस्यता रद्द करने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग पूरी तरह से उचित है।

इस प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह से सक्रिय रहा। जब भाजपा महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और प्रदर्शन तेज हुआ, तो मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप किया। पुलिस ने प्रदर्शन कर रही महिला मोर्चा की कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में ली गई कार्यकर्ताओं को पुलिस वाहनों के जरिए वहां से हटाया गया। पुलिस की इस कार्रवाई के बावजूद भाजपा महिला मोर्चा की नेताओं और अन्य कार्यकर्ताओं ने अपने विरोध को जारी रखा और स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे इस मुद्दे पर संघर्ष करती रहेंगी।

गौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) देश के सबसे प्रतिष्ठित केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है, जहां देश भर से छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए आते हैं। हाल ही में इस विश्वविद्यालय में छात्राओं के कथित यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया था, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दिया है। इस विवाद के सामने आने के बाद से ही विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों की ओर से प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। भाजपा महिला मोर्चा का शनिवार को किया गया यह प्रदर्शन इसी कड़ी का एक हिस्सा है, जिसमें उन्होंने पीड़ित छात्राओं को न्याय दिलाने और दोषियों को सजा देने की मांग को प्रमुखता से उठाया है।

भाजपा महिला मोर्चा ने इस अवसर पर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से भी अपील की है कि वे जेएनयू परिसर में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएं। महिला मोर्चा का कहना है कि शिक्षा के मंदिर में इस तरह की घटनाएं समाज के लिए एक गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोईजाम के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई और जेएनयू की छात्राओं को न्याय नहीं मिला, तो भाजपा महिला मोर्चा भविष्य में और भी बड़े पैमाने पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। फिलहाल, पुलिस द्वारा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन इस मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और विरोध प्रदर्शनों का दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।